भारतहोम

अब चुटकियों में मिलेगी देश की नागरिकता, इन 6 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों के लिए आई बड़ी खुशखबरी

केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने भारतीय नागरिकता प्रदान करने की प्रशासनिक व्यवस्था को तेज और सुगम बनाने के लिए नागरिकता नियमावली में अहम संशोधन किया है।

नए प्रावधानों के तहत देश के छह राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में जिला कलेक्टरों को नागरिकता संबंधी आवेदनों के सत्यापन, स्वीकृति और निष्ठा की शपथ दिलाने की सीधी शक्तियां प्रदान की गई हैं। यह बदलाव नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के सेक्शन 6B के दायरे में आने वाले गैर-मुस्लिम शरणार्थियों के लिए किया गया है।

इन 6 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हुई नई व्यवस्था

यह नई जिला-स्तरीय व्यवस्था गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा के साथ केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में प्रभावी होगी। हालांकि, संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले असम और त्रिपुरा के जनजातीय बहुल क्षेत्रों को इस प्रशासनिक दायरे से अलग रखा गया है। इन चिह्नित क्षेत्रों में रहने वाले पात्र शरणार्थियों के मामले अब सीधे स्थानीय डीएम/कलेक्टर के माध्यम से निपटाए जाएंगे।

जिला कलेक्टरों को मिले यह अहम प्रशासनिक अधिकार

नए नियमों के अनुसार, सेक्शन 6B के तहत नागरिकता के इलेक्ट्रॉनिक आवेदन सीधे जिला कलेक्टर के कार्यालय में जमा होंगे, जहां से फॉर्म-14 के जरिए पावती जारी की जाएगी। कलेक्टर मूल दस्तावेजों की प्रामाणिकता जांचेंगे और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सत्यापन कराएंगे। इसके बाद आवेदक को सिटीजनशिप एक्ट की दूसरी अनुसूची के अनुसार भारत के प्रति निष्ठा की औपचारिक शपथ दिलाई जाएगी।

क्या 6 सदस्यों के बिना नहीं बनेगा आयुष्मान कार्ड, सरकार ने दूर किया सबसे बड़ा डर

प्रक्रिया पूरी तरह संतोषजनक पाए जाने पर कलेक्टर नागरिकता प्रमाणपत्र जारी करने की औपचारिकता पूरी करेंगे। पर्याप्त अवसर मिलने के बावजूद तय समय पर उपस्थित न होने या शपथ न लेने पर आवेदन खारिज करने का अधिकार भी कलेक्टर के पास रहेगा।

लंबित आवेदनों के ट्रांसफर और फॉर्म्स में तकनीकी बदलाव

अब तक नागरिकता देने की प्रक्रिया ‘एंपावर्ड कमेटी’ और ‘डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी’ के जरिए संचालित होती थी। 19 अगस्त के सरकारी आदेश के अनुसार, इन समितियों के पास पहले से लंबित सभी सेक्शन 6B के आवेदन संबंधित जिला कलेक्टरों को स्थानांतरित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही गृह मंत्रालय ने नियम 14, 15, 38 और शेड्यूल-1 के फॉर्म 2A से 8A तथा शेड्यूल-1C में संशोधन कर पोस्टल अधीक्षकों के साथ-साथ कलेक्टर की भूमिका को औपचारिक रूप से शामिल कर दिया है। सरकार का उद्देश्य जिला स्तर पर प्रशासनिक प्रक्रिया को पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध बनाना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *