मानसून की विदाई के बाद नया संकट! 6 से 12 अक्टूबर तक दोहरे पश्चिमी विक्षोभ का हमला, इन 6 राज्यों में भारी अलर्ट
मानसून 2026 देश के मैदानी इलाकों से आधिकारिक रूप से विदा हो चुका है, लेकिन उत्तर भारत में बादलों की आवाजाही और बारिश का सिलसिला फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है। 6 अक्टूबर से हिमालयी और मैदानी क्षेत्रों में एक नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) सक्रिय हो रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 6 से 12 अक्टूबर के दौरान एक के बाद एक लगातार दो पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के वायुमंडलीय सिस्टम को प्रभावित करेंगे, जिससे पहाड़ों से लेकर दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक मौसमी करवट देखने को मिलेगी।
6 से 12 अक्टूबर के बीच दो बैक-टू-बैक पश्चिमी विक्षोभ
निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काइमेट के उपाध्यक्ष महेश पलावत के अनुसार, मौसमी परिस्थितियों में बदलाव सोमवार से ही सतह पर दिखने लगेगा। उत्तर भारत को प्रभावित करने वाला पहला पश्चिमी विक्षोभ 6 अक्टूबर के आसपास असर दिखाना शुरू करेगा, जबकि दूसरा और अधिक प्रभावी सिस्टम 10 से 12 अक्टूबर के बीच मजबूत होगा। जून से सितंबर तक जहां बारिश का मुख्य आधार बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी नमी और हवाएं थीं, वहीं अब कैस्पियन सागर और भूमध्य सागर से उठने वाले पश्चिमी विक्षोभ मौसमी गतिविधियों की कमान संभालेंगे।
पहाड़ों पर येलो अलर्ट: उत्तराखंड के 8 जिलों में आकाशीय बिजली की चेतावनी
पहाड़ी राज्यों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश में 9 और 10 अक्टूबर को व्यापक बारिश के आसार बने हुए हैं। वहीं भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार से उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने अल्मोड़ा, नैनीताल, चंपावत, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इन पर्वतीय क्षेत्रों में बिजली कड़कने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। हरिद्वार और उधम सिंह नगर के मैदानी भागों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रहेगा।
दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा में बूंदाबांदी का दौर
मैदानी राज्यों में पश्चिमी विक्षोभ के चलते पंजाब में 7 अक्टूबर से रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला शुरू हो सकता है। हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में भी आसमान में बादलों का डेरा रहेगा और कुछ इलाकों में हल्की वर्षा या फुहारें दर्ज की जा सकती हैं। 10 अक्टूबर के बाद दूसरे वेदर सिस्टम का असर पूर्वी और उत्तरी राजस्थान तक भी पहुंचेगा। हालांकि मैदानी भागों में वर्षा की तीव्रता बहुत भारी नहीं होगी, लेकिन इसके चलते अधिकतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आएगी और रात के समय गुलाबी ठंड का अहसास गहराने लगेगा।
यूपी से 3 अक्टूबर को विदा हुआ मानसून, अब कुछ जिलों में हल्की बारिश
उत्तर प्रदेश के संदर्भ में दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 की रवानगी 3 अक्टूबर को राज्य के सभी हिस्सों से पूरी हो चुकी है। आसमान साफ होना, पछुआ व उत्तर-पश्चिमी हवाओं की रफ्तार बढ़ना और वातावरण में आर्द्रता का घटना इसकी मुख्य पहचान रही। विदाई के बावजूद नए सिस्टम के असर से वाराणसी, बलिया समेत पूर्वी और तराई के लगभग 10 जिलों में छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है। इस वर्ष यूपी में 95 दिनों के मानसूनी सीजन में दीर्घावधि औसत (746.2 मिमी) के मुकाबले 802.9 मिमी पानी बरसा, जो सामान्य से 8% ज्यादा रहा। पूर्वी यूपी में सामान्य से 2% अधिक और पश्चिमी यूपी में 16% अधिक बारिश दर्ज हुई। प्रदेश के 14 जिलों में 1000 मिमी से अधिक वर्षा हुई, जिसमें सर्वाधिक बारिश चित्रकूट में दर्ज की गई। वहीं राजधानी लखनऊ में भी सामान्य से 8% अधिक कुल 802.9 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई।
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किसानों के लिए दोहरी स्थिति: कटाई में चिंता तो रबी बुवाई के लिए संजीवनी
अक्टूबर की यह बेमौसम बारिश अन्नदाताओं के लिए मिश्रित परिणाम लेकर आ रही है। जिन इलाकों में खरीफ की प्रमुख फसलों जैसे धान की कटाई चल रही है या कटी हुई फसल खेतों में सूखने के लिए पड़ी है, वहां किसानों की चिंता और नुकसान का खतरा बढ़ सकता है। इसके उलट, आगामी रबी सीजन के लिए यह नमी वरदान साबित होगी। गेहूं, सरसों और चना जैसी फसलों की अगेती बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए खेतों में मौजूद यह नमी पलेवा और अंकुरण के लिए बेहद मुफीद वातावरण तैयार करेगी। कुल मिलाकर यह बदलाव उत्तर भारत को धीरे-धीरे शीत ऋतु के आगोश में धकेलने का काम करेगा।

