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जमीन की खरीद-बिक्री करने वाले सावधान! बदल गए रजिस्ट्री के नियम, आम आदमी परेशान

बिहार के भागलपुर जिले में जमीन खरीद-बिक्री की गतिविधियों में इन दिनों कमी देखने को मिल रही है। पहले जहां रजिस्ट्री कार्यालयों में रोजाना काफी भीड़ रहती थी, वहीं अब लोगों की आवाजाही कम हो गई है। इसका सीधा असर सरकारी राजस्व और स्थानीय संपत्ति बाजार पर पड़ रहा है।

खरीददारों की दूरी की बड़ी वजहें

जमीन कारोबार में आई इस सुस्ती के पीछे कई कारण सामने आए हैं। इन दिनों मलमास का समय चल रहा है, जिसे शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसी वजह से कई लोग जमीन खरीदने या निवेश करने से बच रहे हैं।

इसके अलावा विकास परियोजनाओं का भी असर दिख रहा है। भागलपुर एयरपोर्ट और अन्य सरकारी योजनाओं के लिए कुछ क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री पर अस्थायी रोक लगी हुई है। इससे कई लोग चाहकर भी रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे हैं।

बढ़ती लागत ने बढ़ाई आम लोगों की चिंता

सबसे बड़ा कारण जमीन की बढ़ती कीमतें और रजिस्ट्री खर्च को माना जा रहा है। हाल ही में सरकारी दरों में बढ़ोतरी हुई है। साथ ही स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस भी पहले से ज्यादा हो गई है।

इस वजह से आम खरीदारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। पहले जहां लोग आसानी से रजिस्ट्री करा लेते थे, अब वही प्रक्रिया महंगी हो गई है। कई लोग अपने खरीद फैसले टाल रहे हैं।

रजिस्ट्री की संख्या में गिरावट

पहले भागलपुर में रोज लगभग 80 से 100 रजिस्ट्री होती थीं। अब यह संख्या घटकर करीब 60 के आसपास रह गई है। इस गिरावट का असर रजिस्ट्री कार्यालय की गतिविधियों और स्थानीय बाजार दोनों पर साफ दिखाई दे रहा है।

निवेश की रफ्तार भी धीमी हो गई है और संपत्ति लेन-देन में पहले जैसी तेजी नहीं रही।

डिजिटल व्यवस्था की ओर बढ़ता विभाग

इन चुनौतियों के बीच सरकार रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी कर रही है। विभाग ने लक्ष्य रखा है कि 15 जुलाई तक सभी कार्यालयों को पेपरलेस सिस्टम में बदला जाएगा।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद अधिकतर काम ऑनलाइन होंगे। इससे दस्तावेजों का प्रबंधन आसान होगा और लोगों को बार-बार दफ्तर जाने की जरूरत कम पड़ेगी।

पारदर्शिता और सुरक्षा पर जोर

डिजिटल सिस्टम से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होने की उम्मीद है। फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। खरीदार और विक्रेता दोनों से सीधे बातचीत कर सत्यापन किया जा रहा है।

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रजिस्ट्री से पहले जरूरी जानकारी ली जाती है ताकि हर सौदा नियमों के अनुसार हो। इससे भविष्य में विवाद कम होने की संभावना है।

लोगों की नजर 15 जुलाई पर

फिलहाल बढ़े हुए खर्च और धीमे बाजार के कारण जमीन कारोबार दबाव में है। लेकिन लोगों की उम्मीदें डिजिटल सिस्टम की शुरुआत से जुड़ी हैं। 15 जुलाई के बाद भागलपुर में रजिस्ट्री व्यवस्था पूरी तरह नए रूप में नजर आ सकती है।

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