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तमिलनाडु की सियासत में भूचाल; उदयनिधि स्टालिन की एक गलती और छिन गई रातों की नींद, जानें पूरा मामला

सभ्य समाज और राजनीति में किसी भी नेता का कद उसकी दौलत से नहीं, बल्कि उसकी भाषा और विचारों से तय होता है। दुर्भाग्य से भारतीय राजनीति में बदजुबानी का एक लंबा इतिहास रहा है। जब कोई बड़ा राजनेता सार्वजनिक मंच से अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पर निजी और घटिया टिप्पणी करता है, तो जनता के बीच भारी आक्रोश पैदा होना लाजमी है।

इन दिनों तमिलनाडु की राजनीति कावेरी जल विवाद को लेकर पहले से ही उबल रही है, जहां राज्य सरकार ने अपने अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। लेकिन इस संवेदनशील माहौल के बीच मुख्य विपक्षी दल डीएमके (DMK) के नेता उदयनिधि स्टालिन की एक ओछी टिप्पणी ने राज्य में एक नया और भयंकर सियासी बखेड़ा खड़ा कर दिया है।

तंजावुर प्रदर्शन में बिगड़े उदयनिधि के बोल

यह पूरा विवाद तमिलनाडु के तंजावुर में कावेरी जल विवाद पर आयोजित एक विरोध-प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ। मंच से भाषण देते हुए डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन भाषा की सारी मर्यादाएं लांघ गए। उन्होंने सत्ताधारी दल के मुखिया और राज्य के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय तथा उनकी को-एक्ट्रेस रहीं मशहूर अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन को लेकर बेहद अशोभनीय तंज कसा। राजनीतिक गलियारों में सीएम विजय और त्रिशा के बीच अच्छे संबंधों की अक्सर चर्चा होती है, लेकिन एक विपक्षी नेता द्वारा सार्वजनिक मंच से इस तरह का घटिया कटाक्ष करना उनकी ओछी मानसिकता को दर्शाता है।

भड़की सत्ताधारी TVK और भाजपा, सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग

उदयनिधि के इस विवादित बयान के बाद सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के नेता और कार्यकर्ता बुरी तरह भड़क गए हैं। टीवीके विधायक रेवंत चरण ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह डीएमके की गिरती हुई राजनीतिक संस्कृति का सबसे बड़ा प्रमाण है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि डीएमके की इसी बदजुबानी और घमंड के कारण तमिलनाडु की जनता ने उन्हें सत्ता से उखाड़ फेंका है। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी उदयनिधि स्टालिन के बयान की कड़ी निंदा की है। फिलहाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर डीएमके और टीवीके के समर्थकों के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

सत्ता छिनने की बौखलाहट या कुछ और?

राजनीतिक जानकारों की मानें तो उदयनिधि स्टालिन का यह बयान उनकी राजनीतिक हताशा का नतीजा है। पिछले विधानसभा चुनाव में तमिलनाडु की जनता ने डीएमके को पूरी तरह से नकारते हुए लोकप्रिय अभिनेता जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके पर अपना भरपूर प्यार लुटाया था। हालांकि टीवीके बहुमत से थोड़ा दूर रह गई थी, लेकिन कांग्रेस ने अपनी पुरानी सहयोगी डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके को समर्थन दे दिया, जिससे विजय के नेतृत्व में राज्य में नई सरकार का गठन हुआ। चुनाव में मिली इस करारी और शर्मनाक हार को उदयनिधि स्टालिन अब तक पचा नहीं पाए हैं। वे लगातार टीवीके नेतृत्व पर बेबुनियाद हमले कर रहे हैं, जिससे जनता के बीच उनकी खुद की छवि ही खराब हो रही है।

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पुलिस हिरासत में उदयनिधि, पहुंचे कोर्ट की शरण में

इस अभद्र टिप्पणी के बाद अब टीवीके सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री पर सीधे तौर पर किए गए इस निजी हमले को लेकर पुलिस ने सख्त कदम उठाते हुए उदयनिधि स्टालिन को हिरासत में ले लिया है। गिरफ्तारी और बढ़ती कानूनी मुश्किलों को देखते हुए डीएमके नेता ने अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि उदयनिधि स्टालिन को अपनी इस गलती के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांग लेनी चाहिए, अन्यथा आने वाले समय में उन्हें जनता के भारी गुस्से और कानूनी कार्रवाई दोनों का सामना करना पड़ेगा। तमिलनाडु की सियासत में फिलहाल यह तूफान आसानी से थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है।

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