Gurugram Hit and Run Case: हादसा या जानबूझकर हमला, महिला बाइकर केस में पुलिस के सामने कई बड़े सवाल
मिलेनियम सिटी गुरुग्राम की सड़कों पर हुए एक दिल दहला देने वाले ‘हिट एंड रन’ मामले ने सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। अपने दोस्तों के साथ वीकेंड पर ‘संडे राइड’ का आनंद लेने निकली जानी-मानी महिला बाइकर शिवानी चौहान उर्फ सिया के साथ यह खौफनाक वारदात पेश आई।
चश्मदीदों और वायरल फुटेज के अनुसार, एक तेज रफ्तार लग्जरी कार चालक ने जिस खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना अंदाज में बाइक को सीधी टक्कर मारी, उससे सिया की जान भी जा सकती थी। गनीमत रही कि सुरक्षा गियर और किस्मत के सहारे पीड़िता की जान बच गई, लेकिन इस घटना ने सड़क पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।
घटनास्थल से फरार आरोपी जिम संचालक कल्याण बैंसला गिरफ्तार
वारदात को अंजाम देकर मौके से तेजी से भाग निकले आरोपी कार चालक को गुरुग्राम पुलिस ने घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान जिम संचालक कल्याण बैंसला के रूप में हुई है।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस बिंदु पर गहन तफ्तीश कर रही है कि क्या कल्याण ने जानबूझकर हत्या के इरादे से बाइक को निशाना बनाया था, क्या वह शराब या किसी अन्य नशे के प्रभाव में स्टेयरिंग संभाले हुए था, या फिर वह रास्ते में सिया का पीछा कर फब्तियां कसते हुए स्टॉकिंग कर रहा था। फिलहाल दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जिनका अंतिम खुलासा विस्तृत पुलिस जांच के बाद ही होगा।
पिटाई के डर से भागने की दलील, कई अनुत्तरित सवाल
हिरासत में लिए जाने के बाद आरोपी कल्याण बैंसला ने अपना बचाव करते हुए दावा किया कि वह हादसे के बाद पीड़िता की मदद करने के लिए इसलिए नहीं रुका क्योंकि उसे अंदेशा था कि सिया के साथी बाइकर मिलकर उसकी लिंचिंग या पिटाई कर देंगे।
हालांकि, इस तरह के रटे-रटाए तर्क अमूमन हिट एंड रन के अधिकांश मामलों में पकड़े जाने के बाद आरोपियों द्वारा दिए जाते रहे हैं। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर दुर्घटना से पहले के घटनाक्रम और दोनों पक्षों के बीच हुई किसी संभावित तकरार की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
चमकदार मिलेनियम सिटी में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल
फॉर्च्यून 500 बहुराष्ट्रीय कंपनियों का केंद्र, गगनचुंबी इमारतें और आसमान छूती रियल एस्टेट वाला गुरुग्राम देश-विदेश के युवाओं की पहली पसंद बना हुआ है। मगर आधुनिकता के इस चकाचौंध के बीच पॉश इलाकों में महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा का ग्राफ लगातार गिरता दिख रहा है।
मेट्रो शहरों में देर रात या अहले सुबह दोपहिया वाहनों पर निकलने वाली महिलाओं का पीछा करने और उन्हें परेशान करने की बढ़ती घटनाएं प्रशासनिक दावों की पोल खोलती हैं। इस मामले में भी यदि साथी बाइकर्स के कैमरों में पूरी वारदात रिकॉर्ड न होती, तो शायद आरोपी को इतनी तत्परता से बेनकाब करना पुलिस के लिए भी आसान न होता।
हाई-स्पीड ड्राइविंग का बढ़ता मर्ज और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी
भारत में विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे और चौड़े हाईवे का जाल तो बिछ गया है, लेकिन सड़कों पर लेन अनुशासन और गति सीमा का पालन कराने में व्यवस्था आज भी बेबस नजर आती है। ट्रैफिक पुलिस के ऑटोमैटिक रडार और एआई कैमरे प्रतिदिन हजारों ओवरस्पीड चालान काटते हैं, फिर भी महंगी गाड़ियों के नशे में चूर बिगड़ैल चालकों का दिमाग दुरुस्त नहीं हो पा रहा है।
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अनियंत्रित स्पीड, रैश ड्राइविंग और फुटपाथों तक वाहनों को दौड़ाने की प्रवृत्ति के चलते देश में हर दिन सैकड़ों बेकसूर नागरिक अकाल मौत के मुंह में समा रहे हैं। गुरुग्राम के इस चर्चित प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सख्त कानूनी सजा और सख्त निगरानी धरातल पर लागू नहीं होगी, तब तक सड़कों पर जानलेवा अराजकता थामना नामुमकिन रहेगा।

