नीतीश के जाते ही बदल गया बिहार; सीएम सम्राट चौधरी का ‘मिशन क्लीन’ शुरू, कांप रहे हैं माफिया
तेरहवीं से पहले अपराधी की फोटो पर माला पहना दीजिए…। अपराधी बिहार छोड़ दें या अपराध करना…। कोई संगीन वारदात होने पर कड़ी कार्रवाई भी होगी और जरूरत पड़ने पर बुलडोजर भी चलेगा…। बिहार को अपराध मुक्त रखने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आजकल एक्शन मोड में हैं। क्राइम कंट्रोल के लिए उन्होंने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने पर जोर दिया है। सीएम ने सभी डीएम और एसएसपी को अपनी मंशा से अवगत करा दिया है।
बिहार में ‘हाफ’ और ‘फुल’ एनकाउंटर का सिलसिला जारी
सरकार से ‘ग्रीन सिग्नल’ मिलने पर पुलिस-प्रशासन ने कमर कस ली है। बिहार में ‘हाफ’ और ‘फुल’ एनकाउंटर का सिलसिला शुरू हो चुका है। अपराधी अब जान बचाने के लिए इधर से उधर भाग रहे हैं। जिन्हें एनकाउंटर की आशंका है, वह या तो दूसरे राज्य में शिफ्ट हो गए हैं अथवा भूमिगत होकर पुलिस कार्रवाई पर नजर रख रहे हैं। जनता दल (यू) प्रमुख नीतीश कुमार द्वारा सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद यह जिम्मेदारी सम्राट चौधरी को सौंपी गई है। नए सीएम ने राज्य की दिशा एवं दशा बदलने का बीड़ा उठा लिया है।
भ्रष्टाचार और अपराधों की रोकथाम के मद्देनजर प्रभावी कदम उठाए गए हैं। जमीनी स्तर पर इसके सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे हैं। निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बिहार में अपराधियों से निपटने का प्रयोग आरंभ किया गया है। अपराधियों को सबक सिखाने की यूपी की पॉलिसी आज देशभर में लोकप्रिय है। न सिर्फ भाजपा शासित राज्यों बल्कि गैर भाजपा शासित राज्यों में भी यह प्रयोग चल रहा है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ समय-समय पर अपराधियों को चेतावनी देते रहते हैं। जिन्हें सीएम की चेतावनी में दम नजर नहीं आता, उन्हें आखिरकार गंभीर नतीजे भुगतने पड़ते हैं। बिहार हमेशा भ्रष्टाचार, अपराध और विकास की धीमी गति की वजह से त्रस्त रहा है।
औद्योगिक माहौल बेहतर न होने के कारण आज भी बिहार के नागरिक गैर राज्यों में रोजगार के साधन तलाशने में दिलचस्पी रखते हैं। पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के राज में यह राज्य अपराधियों के लिए सबसे मुफीद जगह बन गया था। लूट, हत्या, अपहरण, छेड़छाड़, बलात्कार और रंगदारी वसूली की घटनाएं रोजमर्रा की बात हो चुकी थीं।
नीतीश के जाते ही बदल गया बिहार
नीतीश कुमार के शासन में स्थिति में काफी सुधार आया, मगर अभी भी राज्य में अपराधियों पर पूरी तरह से नकेल नहीं कस पाई है। बिहार में विधानसभा चुनाव के दौरान भी कई आपराधिक मामले प्रकाश में आए थे। विभिन्न संगठित गिरोह राज्य में लंबे समय से अपनी जड़ें जमाए हैं। प्रत्येक गिरोह में कई-कई सदस्य हैं। यह गैंग चोरी, लूट, रंगदारी वसूली, स्ट्रीट वेंडर्स से जबरन वसूली जैसे गैर कानूनी कृत्यों को अंजाम देते रहे हैं।
हालांकि समय अब बदल चुका है। सीएम सम्राट चौधरी का सबसे ज्यादा फोकस अपराध नियंत्रण पर है। कुछ दिन पहले उन्होंने बयान दिया था कि ‘पीड़ित बच्चियों या मृतक बच्चियों की तेरहवीं से पहले अपराधी की फोटो पर माला पहना दीजिए। ऐसे मामलों में तत्काल केस दर्ज कर, तुरंत चार्जशीट दाखिल की जाए और कोर्ट के जरिए अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए।’
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इस बयान में सीएम के अपराधियों के प्रति कड़े तेवरों को महसूस कर लिया गया था। सीएम सम्राट चौधरी का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि बच्चियों और महिलाओं के प्रति गंभीर अपराध होने पर पुलिस-प्रशासन कतई हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठे। अपराध में लिप्त बदमाशों को ऐसा सबक सिखाया जाए, जो नजीर साबित हो सके।

