यूपी जैसा हाल अब बंगाल में! सपा की राह पर टीएमसी? स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर भारी हंगामा
देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आने में ज्यादा वक्त नहीं बचा है। सभी राजनीतिक दलों ने हार-जीत का आकलन करना शुरू कर दिया है। चार राज्यों में शांतिप्रिय माहौल चल रहा है, मगर पश्चिम बंगाल में बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। मतदान प्रक्रिया संपन्न होने के बावजूद इस राज्य में सियासी कलह बरकरार है।
सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने उन स्ट्रॉन्ग रूम की हिफाजत पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां ईवीएम और पोस्टल बैलट रखे गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद मौके पर जाकर गंभीर आरोप मढ़ दिए हैं। एग्जिट पोल्स के सर्वे में पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार आने का अनुमान जाहिर किया गया है। मसलन पंद्रह साल बाद सत्ता से टीएमसी की ‘घर वापसी’ होने की संभावना है। सत्ताधारी दल बेशक एग्जिट पोल्स पर भरोसा नहीं कर रहा, मगर उसके नेताओं की बेचैनी जरूर बढ़ी हुई है। भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से ममता बनर्जी ने चुनाव लड़ा है।
टीएमसी ने लगाया गंभीर आरोप
नजदीकी सखावत मेमोरियल स्कूल में बनाए गए स्ट्रॉन्ग रूम में भवानीपुर विस क्षेत्र की ईवीएम और पोस्टल बैलट को रखा गया है। टीएमसी का आरोप है कि स्ट्रॉन्ग रूम में पोस्टल बैलट के साथ छेड़छाड़ की गई है। जबकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है। गड़बड़ी की आशंका से बेचैन ममता बनर्जी खुद तीन घंटे तक स्ट्रॉन्ग रूम में मौजूद रहकर विरोध जताती रहीं। जिस पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
भाजपा ने टीएमसी के कदम को सियासी ड्रामेबाजी करार दिया है। चुनावी मौसम में अफवाहें बहुत तेजी से फैलती हैं। अफवाह के चक्कर में शांति एवं कानून व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ता है। यूपी में पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी इस प्रकार के घटनाक्रम देखने को मिले थे। जब मतदान संपन्न होने के उपरांत प्रमुख विपक्षी दल सपा ने विभिन्न स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर कार्यकर्ताओं को भेजकर दिन-रात पहरेदारी कराई थी। उत्तेजित सपा कार्यकर्ताओं ने ईवीएम और बैलेट पेपर लेकर जा रहे कुछ वाहनों को भी बीच सड़क पर रुकवा कर जमकर हंगामा किया था।
क्या खत्म हो जाएगी ममता की ‘राष्ट्रीय’ राजनीति
पश्चिम बंगाल में ममता सरकार लंबे समय से भाजपा और चुनाव आयोग पर निशाना साधती आ रही है। राज्य में एसआईआर प्रक्रिया का जबरदस्त विरोध देखने को मिला था। यह विधानसभा चुनाव ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए बहुत निर्णायक माने जा रहे हैं, क्योंकि हार की स्थिति उन्हें हाशिए पर पहुंचा सकती है। तृणमूल मुख्य रूप से बंगाल केंद्रित पार्टी है और आस-पड़ोस के राज्यों से लेकर गोवा तक राजनीतिक विस्तार के उसके प्रयास फलीभूत नहीं हो पाए हैं। इस स्थिति में यदि बंगाल उसके हाथ से निकलता है तो फिर राजनीतिक पूंजी पूरी तरह सिमट जाएगी। जबकि जीत की स्थिति न सिर्फ बंगाल, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी ममता बनर्जी के कद को काफी ऊंचे स्तर पर स्थापित करने का काम करेगी।
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ज्योति बसु और नवीन पटनायक के बाद वह किसी बड़े राज्य की पहली मुख्यमंत्री बन जाएंगी, जो निरंतर चौथी बार सत्ता में वापसी करने में सफल होंगी। पश्चिम बंगाल में बंपर वोटिंग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के अपने-अपने दावे हैं। जहां तृणमूल बंपर वोटिंग को सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्व में भरोसे के साथ जोड़कर प्रस्तुत कर रही है, वहीं भाजपा इसे सत्ता विरोधी रुझान के रूप में प्रचारित करने में लगी है। उधर, चुनाव परिणाम आने के बाद भी राज्य में बखेड़ा होने की संभावना है। इसके मद्देनजर सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

