RJD के लिए होगी मुश्किल, गठबंधन के इस सहयोगी ने फिर कर दी 40 सीटों की डिमांड
Bihar Chunav से पहले महागठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर अब तक तस्वीर साफ नहीं हो पाई है, जिससे राजनीतिक असमंजस का माहौल बना हुआ है। हालांकि जनता की नजर उन वादों और एजेंडों पर टिकी है, जो गठबंधन की ओर से सामने आ रहे हैं। ऐसे ही कुछ अहम मुद्दों पर भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने हाल ही में अपना रुख साफ किया है।
दीपांकर भट्टाचार्य ने चुनावी तैयारियों की जानकारी देते हुए कहा कि उनकी पार्टी राज्य की सभी 40 लोकसभा सीटों पर तैयारी में जुटी है। उन्होंने यह भी बताया कि सीटों से जुड़ी अपनी प्राथमिकताएं राजद नेता तेजस्वी यादव को सौंप दी गई हैं और अब महागठबंधन में जल्द ही अंतिम सहमति बनने की उम्मीद है।
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भाकपा माले इस बार पहले से ज्यादा जिलों से चुनाव (Bihar Chunav) लड़ने के मूड में है। 2019 में 12 जिलों में सक्रिय रही पार्टी इस बार 24 जिलों में अपनी पकड़ बनाने की तैयारी कर रही है। पार्टी का मानना है कि इससे महागठबंधन को और मजबूती मिलेगी और बहुमत का रास्ता आसान होगा। हालांकि इस राजनीतिक मंथन के बीच मतदाता यह जानना चाह रहे हैं कि इन दावों का सीधा असर आम लोगों की ज़िंदगी पर क्या पड़ेगा।
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दीपांकर ने अपने संबोधन में सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को केंद्र में रखते हुए कई घोषणाओं के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि गरीब महिलाओं को हर माह ढाई हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी और बुजुर्गों को मिलने वाली पेंशन की राशि भी बढ़ाकर 1,500 से 2,000 रुपये तक की जाएगी। यदि यह वादा लागू होता है, तो यह ग्रामीण महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।
सीएम नीतीश पर कसा तंज (Bihar Chunav)
इस बीच उन्होंने चीफ मिनिस्टर नीतीश कुमार पर भी निशाना साधा और उन्हें बिहार में बेरोजगारी और गरीबी की जड़ बताया। दीपांकर ने कहा कि राज्य के हालात के लिए सुशासन बाबू को जिम्मेदारी लेनी चाहिए और जनता से माफी मांगनी चाहिए।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मुद्दा भी उनके बयान में प्रमुखता से शामिल रहा। उन्होंने दावा किया कि राज्य में 22 लाख लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, वही 35 लाख प्रवासी मजदूरों को स्थायी रूप से सूची से बाहर कर दिया गया है। यह एक गंभीर आरोप है, जिसका असर चुनावी पारदर्शिता पर पड़ सकता है।


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