रामलीला से बढ़कर है राम का संदेश, जानिए क्यों आज राम बन पाना मुश्किल
Dashahara 2025: विजयदशमी की खुशियों के बीच रामोत्सव की असली भावना को समझना जरूरी है। यह पर्व केवल रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों को जलाने तक सीमित नहीं है। असल में यह पर्व हमें श्रीराम के जीवन से सीखने का मौका देता है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जीवन संघर्षों से भरा रहा। उनके सामने पहाड़ जैसे संकट आए, मगर उन्होंने अपने आदर्शों से कभी समझौता नहीं किया।
आज के दौर में राम (Rama festival 2025) जैसा मनुष्य बन पाना कठिन है। राम की तरह एक आज्ञाकारी पुत्र, जानकी जैसी पत्नी, लक्ष्मण जैसा भाई और हनुमान जैसा भक्त मिलना मुश्किल है। रामलीला अब पहले जैसी नहीं रही। अधिकतर लोग इसे देखने के बजाय मेले का मज़ा लेने आते हैं। जहां देश 2025 में Dashahara का पर्व मना रहा है। वहीं हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुआ था जिसमें कहा गया था कि “आज के दौर में राम होना संभव नहीं।” इस बात में गहराई है क्योंकि राम ने दशरथ के आदेश पर चौदह साल वनवास स्वीकार किया था।
ये भी पढ़ें- dussehra in 2025: क्या आप जानते हैं रावण ने अपनी मृत्यु के वक्त लक्ष्मण को दिया था ये मंत्र
वनवास के दौरान भी राम, सीता और लक्ष्मण को शांति नहीं मिली। आज के परिवारों में यदि कोई आज्ञाकारी पुत्र हो तो उसे ईश्वर की बड़ी कृपा माननी चाहिए। देश में वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ रही है। वहां बहुत से बुजुर्ग अकेले अपना जीवन गुजार रहे हैं क्योंकि उनके बच्चे या तो विदेश चले गए हैं या उन्हें साथ नहीं रखना चाहते। साठ की उम्र के बाद हर इंसान को परिवार का प्यार चाहिए।
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है शरीर कमजोर होता है। जब परिवार भी साथ न दे तो जीवन दुखदायी हो जाता है। वृद्धाश्रमों में रह रहे बुजुर्गों की कहानियां दिल दहलाने वाली होती हैं। प्रसिद्ध कवि सुरेंद्र शर्मा कहते हैं कि वे नहीं चाहते कि उनके बच्चे विदेश जाकर खूब पैसा कमाएं, बल्कि देश में रहकर थोड़ा कम कमाएं और परिवार के साथ खुश रहें।
ये भी पढ़ें- Dussehra sweets recipe without milk in hindi | Dairy-free mithai recipe for dussehra
आज की युवा पीढ़ी में विदेश में नौकरी करने का क्रेज बढ़ रहा है। खासकर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में कई भारतीय सेटल हो रहे हैं। अधिकांश बच्चे वहां जाकर स्वदेश लौटना नहीं चाहते। वे माता-पिता की चिंता नहीं करते, वही माता-पिता दिन-रात बच्चों की चिंता करते हैं। महंगे स्कूलों में पढ़ाई के बावजूद संस्कार की कमी युवा पीढ़ी को पथभ्रष्ट कर रही है। इसलिए परिवार में संस्कारों का होना बहुत जरूरी है।
ये भी पढ़ें- holiday in october 2025: स्कूल-कॉलेज से लेकर बैंक और दफ्तर में कितने दिन रहेगी छुट्टी, देखें पूरी लिस्ट
परिवार के साथ बैठकर खाना, बातें करना और एक-दूसरे की परेशानियां समझना ही संस्कारों की असली पहचान है। नवरात्रि और Vijayadashami 2025 जैसे पर्व हमें यही सिखाते हैं कि अच्छाई की जीत तभी संभव है जब हम राम जैसे आदर्शों को अपनाएं।


Pingback: Gandhi jayanti 2025: जानें राष्ट्रपिता की उपाधि पर विवाद क्यों
Pingback: Karwa Chauth 2025 Tips: कुंवारी लड़कियां ऐसे रखें करवा का व्रत
Pingback: Diwali Puja 2025: ऐसे करें लक्ष्मी पूजा होगी लाभकारी, जानिए शुभ मुहूर्त
Pingback: धनतेरस 2025 पर झाड़ू खरीदना क्यों जरूरी, जानें नरक चतुर्दशी कब
Pingback: dev diwali 2025: पूजा विधि, मुहूर्त और विशेष उपासना के बारे में जानें