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बृजभूषण शरण सिंह ने खेली सियासत की बड़ी चाल, सपा को इन इलाकों में हो सकता है भारी नुकसान

दबदबा था, दबदबा है और दबदबा रहेगा। ये बात बृजभूषण शरण सिंह के लिए हमेशा कही जाती है और फिर एक बार इसी प्रबलता ने यूपी की सियासत में एक बार फिर राजनीतिक सरसराहट को तेज कर दिया है। इस बार बृजभूषण ने जो चाल चली है उसने सियासत में एक बड़ा संदेश दिया है। लंबे वक्त तक खामोश रहने के बाद बृजभूषण ने अचानक ऐसा मोर्चा खोला है जिसने अयोध्या और आसपास की सियासी गलियारों में सनसनी मचा दी है।

अब उनकी मंशा इतनी स्पष्ट हो चुकी है कि इसे किसी साधारण वापसी की कोशिश नहीं माना जा रहा बल्कि सियासी पंडितों का मानना है कि बृजभूषण इस बार सिर्फ चुनाव लड़ने नहीं बल्कि पूरे सियासी संतुलन को बदलने की तैयारी में जुट गए हैं। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी के भीतर बेचैनी बढ़ती हुई नजर आ रही है और अखिलेश यादव की चिंता खुलकर सामने आ रही है।

सपा को गहरे जख्म दे सकते हैं बृजभूषण

कहा जा रहा है कि कैसरगंज के बाहुबली नेता की ये रणनीति सीधे-सीधे सपा की सियासी जड़ों पर वार कर सकता है। क्या है वो कदम जिसने सपा प्रमुख के माथे पर बल दे दिया है? इस खबर में सब कुछ आपको बताएंगे। लंबे समय से खामोशी ओढ़े बृजभूषण शरण सिंह की वापसी सिर्फ एक नेता की एंट्री नहीं बल्कि उस शतरंज की चाल है जो पूरे पूर्वांचल खासकर फैजाबाद का सियासी संतुलन उलट सकती है और यही वजह है कि इस हलचल ने अखिलेश यादव की टेंशन बढ़ा दी है।

लंबे अरसे तक पर्दे के पीछे रहने के बाद बाहुबली के संकेत अब धुंधले नहीं रहे। उनके इशारे, मुलाकातें और क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता बता रही है कि इस बार मामला सिर्फ चुनाव जीतने का नहीं बल्कि मैदान की रेखाएं बदलने का है। सियासी विशेषज्ञों की मानें तो बृजभूषण इस बार सीट नहीं सिस्टम पर दांव लगा रहे हैं और यही सपा के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बनता जा रहा है। अयोध्या और आसपास की सियासत पहले से ही बहुत अलग है।

धार्मिक प्रतीक, जातीय गणित और संगठात्मक ताकत सब एक साथ चलते हैं। ऐसे में बृजभूषण की एंट्री इस समीकरण में एक नया वजन जोड़ सकती है। उनका प्रभाव सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं रहा है। उनका नेटवर्क जमीनी पकड़ और चुनावी अनुभव आसपास की सीटों पर भी असर डालने की क्षमता रखता है।

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यही वजह है कि सपा प्रमुख की चिंता फैजाबाद तक सीमित नहीं बल्कि उससे आगे तक फैली हुई है। सबसे दिलचस्प चर्चा यह है कि अगर बृजभूषण फैजाबाद सीट से सांसद बनने के अखाड़े में उतरते हैं तो सपा का सियासी गेम गड़बड़ा सकता है। फैजाबाद जो हालिया सालों में सियासी प्रतीकों का केंद्र बन चुका है। वहां मुकाबला सिर्फ चेहरों का नहीं होता। वहां नैरेटिव लड़ते हैं। बाहुबली सिंह की मौजूदगी उस नैरेटिव को शिफ्ट कर सकती है। जहां सपा अब तक अपनी जमीन मजबूत मानकर चल रही है।

सपा मुखिया के सामने दोहरी चुनौती

अखिलेश यादव के सामने चुनौती दोहरी है। एक तरफ संगठन को एकजुट रखना। दूसरी तरफ ऐसे नेता से निपटना जो चुनावी राजनीति के साथ-साथ मैनेजमेंट ऑफ पावर में भी माहिर माना जाता है। सिंह की रणनीति अक्सर आखिरी वक्त तक पत्ते ना खोलने की रही है और यही अनिश्चितता सपा के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन रही है। किस सीट पर कौन उतरेगा? कौन किसके साथ जाएगा? इस सवाल का जवाब साफ ना होना ही टेंशन बढ़ाने के लिए काफी है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि बृजभूषण की चाल का मकसद सिर्फ जीत हार नहीं बल्कि विपक्ष की रणनीति को डिस्टर्ब करना है। उम्मीदवार चयन से लेकर वोट ट्रांसफर तक उनकी मौजूदगी कई स्तरों पर सपा की रणनीति पर असर डाल सकती है। खासकर उन इलाकों में जहां सपा मजबूत स्थिति में है और जहां मुकाबला कांटे का होता है, वहां एक मजबूत स्थानीय चेहरा पूरी बाजी पलट सकता है।

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