रोज 4 KM पैदल स्कूल, IAS का पद ठुकराया; ये है Jagdeep Dhankhar की कहानी
देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है (Vice President Resignation 2025)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे गए अपने त्यागपत्र में उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला दिया (Jagdeep Dhankhar Health Reasons)। उनका कार्यकाल 2027 तक तय था (Vice President Tenure), मगर उससे पहले ही उन्होंने यह जिम्मेदारी छोड़ दी (Resignation to President)। 11 अगस्त 2022 को वे देश के 14वें उपराष्ट्रपति बने थे (Indian Vice President History)।
सिविल सेवा छोड़ कानून की राह
बहुत कम लोग जानते हैं कि जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar Biography) ने सिविल सेवा परीक्षा पास की थी, मगर आईएएस बनने के बावजूद उन्होंने किसी प्रशासनिक सेवा में शामिल होना मुनासिब नहीं समझा (Leaving Civil Services to Practice)। उन्होंने कानून के क्षेत्र में अपना करियर शुरू किया और 1979 में राजस्थान बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के बाद राजस्थान हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में प्रैक्टिस की (Rajasthan High Court Lawyer)। 1990 में वे महज 35 वर्ष की उम्र में राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सबसे युवा अध्यक्ष बने और उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा भी मिला (Senior Advocate Jagdeep Dhankhar)।
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उनकी कानूनी विशेषज्ञता और रणनीतिक सूझबूझ का ही परिणाम था कि राजस्थान में जाट समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का दर्जा दिलाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई (Jat Community OBC)।
गांव की पगडंडी से संसद के गलियारे तक
जगदीप धनखड़ की कहानी राजस्थान के झुंझुनू जिले के किठाना गांव से शुरू होती है (Kithana Village, Jhunjhunu Politics)। 18 मई 1951 को जन्मे धनखड़ एक जाट किसान परिवार में पले-बढ़े। उनके पिता गोकल चंद और माता केसरी देवी ने सादगी और मेहनत का जीवन जिया और वही संस्कार उन्होंने अपने बच्चों को दिए। चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर रहे जगदीप रोजाना 4-5 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाया करते थे।
प्राथमिक शिक्षा गांव में लेने के बाद उन्होंने मिडिल स्कूल की पढ़ाई घर्धना से की और फिर चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल (Sainik School Chittorgarh) में दाखिला लिया। यहां की सैन्य अनुशासन वाली शिक्षा ने उनके व्यक्तित्व को गढ़ा। पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहे धनखड़ का चयन IIT और NDA जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में हुआ, मगर उन्होंने एकेडमिक फोकस को प्राथमिकता दी। आगे चलकर उन्होंने जयपुर के महाराजा कॉलेज से भौतिकी में ऑनर्स (Jaipur Maharaja College) और फिर राजस्थान विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की (Rajasthan University Law, Jagdeep Dhankhar Education)।
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राजनीतिक सफर कैसे शुरू किया
धनखड़ का राजनीतिक जीवन 1989 में शुरू हुआ, जब उन्होंने झुंझुनू से सांसद चुने गए (MP from Jhunjhunu, Jagdeep Dhankhar Political Journey)। जनता दल (Janata Dal MP) की ओर से लोकसभा पहुंचे और चंद्रशेखर सरकार में संसदीय कार्य राज्य मंत्री बने (Chandrashekhar Government Minister)।
1991 में टिकट न मिलने पर वे कांग्रेस में शामिल हुए (Congress MLA) और 1993 में किशनगढ़ से विधायक बने। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थामा (BJP Leader) और 2003 में पार्टी में सक्रिय हो गए।
2019 में उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ उनके टकराव ने लगातार सुर्खियां बटोरीं (West Bengal Governor, Mamta Banerjee Controversy)। उनकी साफगोई और निष्पक्ष व्यवहार ने उन्हें एक अलग पहचान दी।
2022 में एनडीए ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया (NDA Vice President Candidate) और उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया (Margaret Alva Defeat)।


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