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बृजभूषण सिंह ने तारीफ में अखिलेश के लिए जो कह दिया, उसे सुनकर बीजेपी के पैरों तले खिसक जाएगी जमीन

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कब कौन किसके पक्ष में खड़ा हो जाए और कब पुरानी यादें ताजा हो जाएं यह कहना बड़ा मुश्किल है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं। वजह कोई विवाद नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के प्रति उनकी उमड़ती हुई श्रद्धा है। एक हालिया इंटरव्यू में बृजभूषण सिंह ने जिस तरह अखिलेश यादव की तारीफों के पुल बांधे उसने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

संस्कारों की बात और गेट तक छोड़ने का वो किस्सा

बृजभूषण सिंह उस समय को याद करते हैं जब वह समाजवादी पार्टी का हिस्सा थे। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पार्टी छोड़ने का मन बनाया और यह बात मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव को बताई तो दोनों ने उन्हें रोकने की बहुत कोशिश की। वे चाहते थे कि बृजभूषण अपने फैसले पर दोबारा सोचें। जब बात नहीं बनी और विदाई की घड़ी आई तो अखिलेश यादव खुद उन्हें बाहर गेट तक छोड़ने आए थे। बृजभूषण इसे यादव परिवार के उच्च संस्कारों का प्रतीक मानते हैं। उनका कहना है कि पार्टी छोड़ने के बावजूद अखिलेश ने उनके क्षेत्र के विकास कार्यों में कभी अड़ंगा नहीं लगाया बल्कि पूरा सहयोग किया।

जब मुलायम सिंह ने विरोधी दल में होते हुए भी सुनी गुहार

बृजभूषण सिंह ने नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प वाकया भी साझा किया। उस वक्त बृजभूषण बीजेपी में थे और मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे। बृजभूषण ने उन्हें दो काम के सिलसिले में चिट्ठियां दी थीं। हैरानी की बात यह रही कि बृजभूषण अभी लखनऊ से अपने घर गोंडा भी नहीं पहुंच पाए थे कि जिले के कलेक्टर का फोन आ गया कि आपके काम की मंजूरी मिल गई है। यह किस्सा सुनाते हुए वह भावुक हो जाते हैं और कहते हैं कि इसी शालीनता की वजह से वह आज भी उस परिवार का सम्मान करते हैं।

मुश्किल दौर में अखिलेश का मौन बना ‘ढाल’

पहलवानों के साथ चले विवाद और भारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान जब देश-दुनिया से बृजभूषण सिंह पर दबाव बनाया जा रहा था तब अखिलेश यादव की चुप्पी ने सबको हैरान किया था। अब बृजभूषण ने खुद इसका राज खोला है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव अच्छी तरह जानते थे कि उनके खिलाफ रची गई बातें एक गहरी साजिश का हिस्सा थीं।

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बृजभूषण ने खुलासा किया कि जब सपा के कुछ नेताओं ने उनके खिलाफ बयानबाजी की कोशिश की थी तब अखिलेश यादव ने खुद उन्हें टोक दिया था। अखिलेश ने अपने नेताओं को निर्देश दिए थे कि इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई भी टिप्पणी न की जाए। इसी बात के लिए बृजभूषण सिंह आज भी अखिलेश यादव का आभार जताते हैं और उन्हें एक बेहद सुलझा हुआ नेता मानते हैं।

क्या हैं इस प्रशंसा के सियासी मायने

बृजभूषण शरण सिंह आज भले ही किसी सदन के सदस्य न हों मगर दबदबा आज भी कायम है। गोंडा, कैसरगंज, बहराइच और अयोध्या समेत आसपास के करीब आठ-दस जिलों की राजनीति में उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। उनका एक बेटा वर्तमान में सांसद है और दूसरा विधायक। ऐसे में बीजेपी के एक दिग्गज नेता द्वारा विरोधी दल के नेता की सार्वजनिक मंच से इतनी सराहना करना महज शिष्टाचार है या भविष्य की किसी नई राजनीतिक बिसात की तैयारी यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल तो बृजभूषण का यह बयान यूपी की राजनीति में ठंडी हवा के झोंके की तरह है जो कड़वाहट के बीच आपसी सम्मान की कहानी कह रहा है।

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