Budget 2026: जानें बजट से किन लोगों को होगा फायदा और किनका नुकसान
Budget 2026: आम बजट का पिटारा खुल चुका है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में आम बजट का ऐलान कर केंद्र सरकार की भविष्य की नीतियों एवं कार्यक्रमों से पर्दा उठा दिया है। इसके बाद सियासी हलचल बढ़ गई है। विपक्ष को बेशक बजट पसंद न आए, मगर आम आदमी ने अपने नजरिए से इसका आकलन शुरू कर दिया है। शेयर बाजार में हलचल देखने को मिल रही है।
आम बजट पर केंद्र सरकार जहां अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं विपक्ष ने सवाल उठाने में देर नहीं की है। बजट में वैसे तो विभिन्न आकर्षक घोषणाएं हुई हैं, मगर जनस्वास्थ्य की चिंता कर सरकार ने अच्छा कदम उठाया है। अविकसित भारत घनी आबादी का देश है। बीमारी की मार पड़ने पर मध्यम वर्गीय परिवार कराह उठते हैं। चूंकि बीमारी का खर्च उनके घरेलू बजट को तबाह कर देता है। शत-प्रतिशत परिवारों के पास हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा नहीं है। बीमारी यदि गंभीर हो जाए तो परेशानी और बढ़ जाती है।
बजट में कैंसर और शुगर की सत्रह दवाओं को सस्ता करने की घोषणा प्रशंसनीय है। देश में कैंसर व शुगर के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। दोनों बीमारियों का उपचार भी महंगा है।
इन परिवारों को मिली राहत
अलबत्ता दवाएं सस्ती होने से उन परिवारों को राहत मिल सकेगी, जो महंगी दवाएं खरीदने में सक्षम नहीं हैं। देश में कैंसर का उपचार अक्सर परिवारों को कर्ज के जाल में धकेल देता है। ऐसे में जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों में कटौती एक संजीवनी की तरह काम करेगी। इसके अलावा सात अन्य दुर्लभ बीमारियों के लिए विशेष दवाओं और मेडिकल फूड के व्यक्तिगत आयात को भी शुल्क मुक्त किया जाना अच्छी बात है, जो सीधे तौर पर गंभीर मरीजों की जेब पर पड़ने वाले भारी-भरकम बोझ को कम करेगा।
कैंसर के इलाज में सबसे बड़ी बाधा दवाओं की अत्यधिक लागत रही है, जिनमें से अधिकांश आधुनिक थेरेपी और दवाएं विदेशों से आयात की जाती हैं। वित्त मंत्री ने इस समस्या का समाधान कर सत्रह कैंसर दवाओं पर शून्य बेसिक सीमा शुल्क का प्रस्ताव दिया है। पहले इन दवाओं पर बेसिक सीमा शुल्क लगने के कारण इनकी ‘लैंडेड कॉस्ट’ काफी बढ़ जाती थी।
क्या सच में शक्तिशाली है भारत की अर्थव्यवस्था, इन आंकड़ों ने बढ़ाई सरकार की सरदर्दी
अब ड्यूटी हटने से बाजार में इन दवाओं की खुदरा कीमतें कम होंगी। यह छूट विशेष रूप से उन मरीजों के लिए प्रभावी होगी जो एडवांस्ड कैंसर के इलाज के लिए विदेशी इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड दवाओं पर निर्भर हैं। भारत में कैंसर के इलाज का खर्च अक्सर बीमा कवर से बाहर हो जाता है। दवाओं की कीमतों में छोटी सी कटौती भी उन मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी बचत साबित होती है जो लंबे समय तक चलने वाले कैंसर उपचार चक्रों से गुजर रहे हैं। कैंसर व शुगर ऐसी बीमारी हैं, जिनका नाम सुनकर भी नागरिकों के होश उड़ जाते हैं। दवाओं के दाम कम होने से मरीजों एवं उनके परिवारों की टेंशन काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है।
बजट से ये लोग हैं काफी परेशान
उधर, आम बजट में तम्बाकू उत्पादों पर अधिक टैक्स लगाए जाने से इसके शौकीन परेशान हैं। हालांकि बजट आने से पहले ही बाजार में तम्बाकू, गुटखा और सिगरेट के दाम मनमाने तरीके से बढ़ा दिए गए थे। नए दामों को लेकर दुकानदार और ग्राहकों में विवाद भी देखने को मिला है। तम्बाकू, गुटखा व सिगरेट स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इसके बावजूद देश में इसके ग्राहकों की संख्या करोड़ों में है।

