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बंगाल चुनाव में ‘खेला’ हो गया, ओवैसी की एंट्री से क्या बीजेपी के लिए साफ हो गया सत्ता का रास्ता

owaisi in bengal 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी जोर पकड़ रही है। चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद से सभी राजनीतिक दल सत्ता की चाबी हासिल करने की रणनीति में शिद्दत से जुट गए हैं। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी दिन-रात चुनावी रणनीति बनाने में मशगूल है। इस बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल चुनाव में ताल ठोकने की घोषणा कर दी है। ओवैसी के ऐलान से चुनावी समीकरण बदलने की संभावना बढ़ गई है। चुनाव में एआईएमआईएम की एंट्री होने पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को दोहरा झटका लगना तय है।

दरअसल टीएमसी से निकाले गए हुमायूं कबीर ने पहले से टीएमसी को टेंशन दे रखी है। ऐसे में ओवैसी ने हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन करने की रणनीति के स्पष्ट संकेत देकर टीएमसी की बेचैनी और बढ़ा डाली है। राज्य की सियासत में कबीर पिछले काफी समय से चर्चाओं में हैं। टीएमसी से निलंबित किए जाने के बाद उन्होंने बागी तेवर अपना लिए थे।

बढ़ी ममता बनर्जी की चुनौती

उन्होंने जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) का गठन को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीधे चुनौती दे डाली। बंगाल में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद का निर्माण कराया जा रहा है। इस कार्य में हुमायूं कबीर निरंतर जुटे हैं। उनके इस कदम का भारतीय जनता पार्टी भाजपा ने तीव्र विरोध किया था। टीएमसी के विरोधी कबीर अब तक एक सौ अस्सी से अधिक उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर चुके हैं।

चुनाव में एआईएमआईएम का गठबंधन होने पर सबसे ज्यादा खामियाजा सत्ताधारी टीएमसी को भुगतना पड़ सकता है। चूंकि टीएमसी के मुस्लिम वोट बैंक में बड़ी सेंध लग जाएगी। पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों की आबादी तीस फीसदी है। यह समुदाय प्रत्येक चुनाव में ममता बनर्जी का समर्थन करता रहा है। मुस्लिम वोट बैंक के कारण टीएमसी को बड़ा फायदा मिलता रहा है।

बिगड़ जाएगा TMC का खेल

कबीर और ओवैसी की एकजुटता से बेशक चुनाव में जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) व एआईएमआईएम गठबंधन को सत्ता हासिल न हो पाए, मगर टीएमसी का खेल जरूर बिगड़ जाएगा। इसका सीधा लाभ प्रमुख विपक्षी दल भाजपा को मिलेगा। पश्चिम बंगाल की सत्ता पर बैठने का भाजपा का सपना आज तक पूरा नहीं हो पाया है। विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला टीएमसी और भाजपा के मध्य है। हुमायूं कबीर का तोड़ निकालने में नाकाम ममता बनर्जी को अब एआईएमआईएम के तौर पर नई चुनौती का सामना करने को तैयार रहना पड़ेगा।

सियासी विरोधी आमतौर पर ओवैसी को ‘वोट कटवा’ की संज्ञा देते हैं। विरोधियों का मानना है कि ओवैसी की सक्रियता से मुस्लिम वोट बैंक में बिखराव आता है। इसका लाभ भाजपा को मिलता है। हालांकि ओवैसी इन आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे हैं। उन्हें भाजपा की ‘बी टीम’ होने की तोहमत भी झेलनी पड़ती रही है।

पश्चिम बंगाल की सत्ता पिछले पंद्रह साल से ममता बनर्जी के इर्द-गिर्द घूम रही है। वह निरंतर तीन बार राज्य की मुख्यमंत्री बन चुकी हैं और अब जब यह राज्य एक बार फिर विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ा है, ममता बनर्जी चौथी बार तृणमूल कांग्रेस का चेहरा बनकर चुनावी मैदान में उतर चुकी हैं। ममता यदि फिर से विजेता बनकर आती हैं, तो वह पश्चिम बंगाल की पहली ऐसी सीएम बन सकती हैं, जिन्होंने लगातार चार बार विधानसभा चुनाव जीतकर इतिहास बनाया हो।

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इस राज्य में दो चरण में चुनाव होने हैं। नामांकन प्रक्रिया जल्द शुरू हो जाएगी। चुनाव के ऐन मौके पर टीएमसी और भाजपा में वार-पलटवार का सिलसिला तेल हो चुका है।

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