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इलाज में 20 से 25 लाख भी पड़ रहे हैं कम, जानिए क्यों बेकार साबित हो रही हैं पुरानी हेल्थ पॉलिसियां

बीते कुछ सालों में लोगों की जीवनशैली तेजी से बदली है। खाने-पीने की आदतों से लेकर रोजमर्रा की दिनचर्या तक हर चीज का असर अब सेहत पर साफ दिखने लगा है। नई बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और इनके इलाज का खर्च आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। हालत यह है कि कई परिवार इलाज में अपनी जमा पूंजी तक गंवा देते हैं। वहीं आर्थिक कमजोरी की वजह से कई लोग गंभीर बीमारियों का पूरा इलाज भी नहीं करा पाते।

ऐसे समय में सिर्फ बचत करना काफी नहीं माना जा रहा। अब लोग अपने परिवार की सुरक्षा के लिए बड़े हेल्थ इंश्योरेंस कवर की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं।

सिर्फ साधारण हेल्थ पॉलिसी अब नहीं मानी जा रही पर्याप्त

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और बीमा सेक्टर से जुड़े लोगों का मानना है कि आज के दौर में छोटा हेल्थ कवर भविष्य के लिए सुरक्षित विकल्प नहीं है। अस्पतालों में इलाज और सर्जरी का खर्च लगातार बढ़ रहा है। कई मामलों में 20 से 25 लाख रुपये तक का खर्च भी कम पड़ जाता है।

इसी वजह से अब लोग ऐसी पॉलिसी चुन रहे हैं जिसमें इलाज के दौरान जेब से कम से कम पैसा खर्च करना पड़े। परिवार के आकार और शहर के हिसाब से बड़ा बीमा कवर लेना अब जरूरी माना जा रहा है।

जीएसटी हटने के बाद बढ़ा बड़े कवर का ट्रेंड

सरकार की तरफ से व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों पर लगने वाले 18 प्रतिशत जीएसटी को शून्य किए जाने के बाद बीमा बाजार में बड़ा बदलाव देखा गया है। प्रीमियम सस्ता होने से अब लोग छोटे प्लान छोड़कर 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के सुपर टॉपअप प्लान खरीद रहे हैं।

बीमा कंपनियों के मुताबिक पिछले कुछ समय में बड़े कवर वाली पॉलिसियों की मांग तेजी से बढ़ी है। लोग अब भविष्य की मेडिकल जरूरतों को ध्यान में रखकर लंबी तैयारी कर रहे हैं।

किसे कितना हेल्थ इंश्योरेंस लेना चाहिए

विशेषज्ञों के अनुसार छोटे शहर में रहने वाले व्यक्ति या परिवार के लिए 15 से 20 लाख रुपये तक का हेल्थ कवर जरूरी माना जा सकता है। वहीं दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में रहने वाले परिवारों को कम से कम 25 से 50 लाख रुपये तक का बीमा लेना चाहिए।

बुजुर्गों के लिए सुपर टॉपअप प्लान को ज्यादा जरूरी बताया जा रहा है। क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ बीमारियों का खतरा और इलाज दोनों महंगे हो जाते हैं। ऐसे में 25 से 50 लाख रुपये तक का अतिरिक्त कवर सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।

आखिर क्यों बढ़ रही बड़े बीमा कवर की मांग

इसके पीछे कई बड़े कारण सामने आ रहे हैं।

पहला कारण यह है कि जीएसटी हटने से प्रीमियम में सीधी राहत मिली है। इससे लोगों पर आर्थिक बोझ कम हुआ है।

दूसरा कारण मेडिकल खर्च में लगातार बढ़ोतरी है। रिपोर्ट्स के अनुसार देश में हर 5 से 7 साल में इलाज का खर्च लगभग दोगुना हो जाता है। इसके बावजूद आज भी इलाज पर होने वाले कुल खर्च का बड़ा हिस्सा लोगों को अपनी जेब से देना पड़ता है।

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तीसरा कारण कॉर्पोरेट हेल्थ कवर को माना जा रहा है। ज्यादातर कंपनियां कर्मचारियों को सीमित स्वास्थ्य बीमा देती हैं जो गंभीर बीमारी के समय पर्याप्त साबित नहीं होता। यही वजह है कि लोग अब निजी तौर पर बड़ा हेल्थ कवर खरीद रहे हैं।

पॉलिसी लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप भी हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने की योजना बना रहे हैं तो सिर्फ कम प्रीमियम देखकर फैसला न लें। अपनी उम्र परिवार शहर और भविष्य के मेडिकल खर्च को ध्यान में रखकर पॉलिसी चुनें। सही समय पर लिया गया बड़ा हेल्थ कवर आने वाले समय में आर्थिक सुरक्षा की मजबूत ढाल बन सकता है।

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