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पीएम मोदी को मिला इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान, जानें क्यों पाक-तुर्की को चुभ रही है दोनों देशों की ये गहरी दोस्ती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया की यात्रा पर हैं। उन्हें इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान ‘बिंतांग आदि पूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया मेडल ऑफ ऑनर’ दिया गया है। यह सम्मान उन नागरिकों को दिया जाता है जिन्होंने इंडोनेशिया की एकता, निरंतरता और समृद्धि के लिए असाधारण सेवा की है। निश्चित रूप से यह भारत के लिए गर्व की बात है।

पीएम मोदी बोले- यह सम्मान मेरा नहीं, 140 करोड़ भारतीयों का है

पीएम मोदी ने कहा कि यह सम्मान करोड़ों भारतीयों का है। भारत के पीएम की इस यात्रा पर समूची दुनिया की नजर है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और गहरे संबंध हैं। पीएम मोदी की गिनती आज दुनिया के चुनिंदा सबसे ताकतवर नेताओं में होती है। पिछले ग्यारह साल में उनके नेतृत्व में भारत की साख बढ़ी है। राष्ट्र की समृद्धि एवं मजबूती के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं। पीएम मोदी को विभिन्न देशों में सर्वोच्च सम्मान से नवाजा जा चुका है। सर्वाधिक मुस्लिम आबादी के हिसाब से इंडोनेशिया पहले नंबर पर आता है। वहां की आबादी लगभग सत्ताईस करोड़ है। जिसमें 87 फीसदी मुस्लिम हैं। भारत-इंडोनेशिया के रिश्तों में समय के साथ गर्माहट देखने को मिली है।

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पाकिस्तान, तुर्की और बांग्लादेश जैसे मुस्लिम मुल्कों को भारत-इंडोनेशिया की दोस्ती कतई पच नहीं रही होगी। चूंकि ये मुल्क अपने भीतर झांकने की बजाए भारत की नीतियों पर अक्सर सवाल उठाते रहते हैं। भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंध दो हजार से अधिक वर्षों से चले आ रहे हैं। वर्तमान में यह संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित हुए हैं। दोनों देश समुद्री पड़ोसी और क्वाड-इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रमुख रणनीतिक साझेदार हैं। भारत इंडोनेशिया से मुख्य रूप से कोयला, पाम ऑयल और खनिज आयात करता है, जबकि भारत से परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद, कृषि उत्पाद और वाहन निर्यात किए जाते हैं।

पीएम मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नया विस्तार दिया है। दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्रों में कई नए समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इंडोनेशिया कभी हिंदू और बौद्ध धर्म का केंद्र था, मगर यह बात हैरान करती है कि कैसे हिंदुत्व और बौद्ध धर्म वाला एक देश का पूरी तरह से इस्लामीकरण हो गया। इस्लाम के आगमन से पहले इंडोनेशिया में हिंदू धर्म का बोलबाला था। इसके अलावा भारत से आया बौद्ध धर्म भी यहां जड़े जमाए था।

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इंडोनेशिया के जावा, सुमात्रा और बाली द्वीपों के नाम भी इसलिए भारतीय संस्कृति में रचे-बसे थे। इंडोनेशिया की खूबी यह है कि यहां इस्लाम मानने वालों की आबादी सबसे ज्यादा होने के बाद भी यह आधिकारिक रूप से एक धर्मनिरपेक्ष देश है। इंडोनेशिया में इस्लाम का आगमन कारोबार से जुड़ा है। पूरी दुनिया में इस्लाम का इतिहास खून-खराबे से भरा रहा है। इस्लाम को अपनाने के पीछे बड़े पैमाने पर तलवारों के बल पर धर्मांतरण कराया गया, मगर इंडोनेशिया संभवत: इकलौता ऐसा देश रहा है, जहां इस्लाम को धीरे-धीरे आत्मसात किया गया।

बिना खून बहाए और बिना तलवार चलाए इंडोनेशिया का इस्लामीकरण हो गया। इंडोनेशिया के तटीय क्षेत्रों में मुस्लिम कारोबारियों ने बसना शुरू किया और स्थानीय आबादी पर अपना प्रभाव बढ़ाया। जल्द स्थानीय स्तर पर मुस्लिम समुदाय बन गया। वाकई इंडोनेशिया का इतिहास काफी दिलचस्प है। कुछ माह पहले भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इंडोनेशिया की यात्रा की थी। उस दौरान अहम मुद्दों पर चर्चा की गई थी। पीएम मोदी की यह यात्रा भविष्य में बेहद लाभकारी साबित होगी।

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