वर्ल्डहोम

तीसरे विश्व युद्ध की दस्तक! अमेरिका ने ईरान पर की भीषण बमबारी, बौखलाए ईरान ने दिया मुंहतोड़ जवाब

अमेरिका और ईरान एक बार फिर आपस में भिड़ गए हैं। दोनों तरफ से ताकत का प्रदर्शन शुरू हो गया है। हवाई हमलों का नया दौर समूची दुनिया के लिए चिंताजनक है। अमेरिका ने ईरान पर भीषण बमबारी की है। जवाब में ईरान ने कतर, कुवैत और बहरीन के अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने में देर नहीं की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कुछ दिन से तेहरान के खिलाफ आग उगल रहे हैं। उनके बयानों ने साफतौर पर संकेत दे दिए थे कि वाशिंगटन की ओर से पुन: कुछ बड़ा होने वाला है।

दोनों देशों को बीच विवाद बरकरार

दोनों देशों का आपसी विवाद दूर होने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच बेहद डरावनी खबर भी सामने आई है। डोनाल्ड ट्रंप के आक्रामक मिजाज को देखकर यह चर्चा शुरू हो गई हैं कि निकट भविष्य में ईरान पर अमेरिका परमाणु हमला कर सकता है। ऐसा होने पर तीसरे विश्व युद्ध को रोक पाना संभव नहीं होगा। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के वार्ताकारों को लेकर सख्त बयान दिया है।

उन्होंने कहा कि वे वास्तव में मानसिक रूप से बीमार हैं। उनके नेता मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं हैं। मेरी नजर में उनसे निपटना सिर्फ समय की बर्बादी है। ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष खत्म करने के लिए जो समझौता सामने आया था, उस पर अब सवाल उठ रहे हैं। तकनीकी रूप से युद्ध विराम अप्रैल की शुरुआत से लागू हुआ था। हालांकि पहले भी दोनों पक्ष एक-दूसरे पर जवाबी हमलों के दौरान सीजफायर का उल्लंघन करने का आरोप लगाते रहे हैं। ट्रंप के एग्रेसिव मोड में आने की एक बड़ी वजह भी बताई जाती है।

ट्रंप से नाराज हैं ईरानी

दरअसल ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम विदाई कार्यक्रम के दरम्यान नागरिकों ने जिस प्रकार का रुख अपनाया, उसने ट्रंप को नाराज कर दिया है। ट्रंप की हत्या की कसम खाए जाने की बात भी सामने आई थी। दरअसल ईरान में न सिर्फ कट्टरपंथी सरकार काबिज है, बल्कि दिवंगत शीर्ष नेता खामेनेई के जनाजे में उमड़ी भीड़ भी यही दर्शाने वाली रही कि उसके प्रति समर्थन में कोई कमी नहीं आई है। इतने लंबे समय तक भीषण हमले झेलने के बावजूद ईरान के पास ड्रोन और मिसाइलों का आधा जखीरा अभी भी शेष है।

अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भी पूरी तरह से बेपटरी नहीं कर पाया। ईरान युद्ध के कारण दुनिया भर में हुई अमेरिका की किरकिरी के कारण राष्ट्रपति ट्रंप के लिए घरेलू राजनीति की राह फिसलन भरी हो गई है। न सिर्फ विपक्षी डेमोक्रेट बल्कि रिपब्लिकन पार्टी के धड़े भी उनके विरोध में उतर आए हैं। रिपब्लिकन सीनेटर और ट्रंप के वफादार माने जाने वाले बिल कैसिडी ने तो इस समझौते को अमेरिकी विदेश नीति की दशकों में सबसे बड़ी भूल बताया है।

पीएम मोदी को मिला इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान, जानें क्यों पाक-तुर्की को चुभ रही है दोनों देशों की ये गहरी दोस्ती

ईरान के खिलाफ इजरायली मुहिम को अंजाम तक पहुंचाने से पहले ही उसे रोक देने के कारण यहूदी समुदाय भी नाराज है। अमेरिकी सत्ता एवं व्यापारिक प्रतिष्ठान में यहूदियों का वर्चस्व किसी से छिपा नहीं रहा है। इस समझौते से ट्रंप का कद कुछ कमजोर पड़ा है तो किसी स्थिति में इसके नाकाम रहने का उन्हें और भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव में ट्रंप और उनकी नीतियां स्वाभाविक रूप से कसौटी पर होंगी। अलबत्ता अमेरिका-ईरान में बढ़ती अदावत ने दोबारा से हर किसी को बेचैन कर दिया है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट भी प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *