खुद की ही पार्टी को दे दिया 85 करोड़ का चंदा, हमेशा साधारण दिखने वाले PK की कुल संपत्ति देख उड़ जाएंगे होश
Bankipur Assembly By Election 2026: बिहार की सियासत में हमेशा पर्दे के पीछे रहकर बड़े-बड़े सूरमाओं को सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाने वाले प्रशांत किशोर अब खुद जनता की अदालत में आ चुके हैं। सूबे की सबसे वीआईपी मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए उन्होंने बाकायदा अपनी दावेदारी ठोक दी है।
सोमवार को पर्चा दाखिल करने के साथ ही उनके द्वारा दिए गए ब्यौरे ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। चुनावी हलफनामे से बाहर आई करोड़ों की संपत्ति और उनकी शैक्षणिक योग्यता की यह कहानी आज बिहार के हर चौक-चौराहे पर चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन चुकी है।
बिहार की जनता के बीच पीके के करोड़ों के साम्राज्य की चर्चा
चुनावी हलफनामे के जो आंकड़े सामने आए हैं वे आम जनता को हैरान करने वाले हैं। हमेशा साधारण कपड़ों में पदयात्रा करने वाले प्रशांत किशोर के पास कुल 96.06 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति है।
सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि एक निजी कंपनी में उनकी शत-प्रतिशत हिस्सेदारी है और इसी कंपनी के जरिए उन्होंने अपनी जन सुराज पार्टी को 85 करोड़ रुपये का भारी-भरकम चंदा दिया है। इसके अलावा जन सुराज फाउंडेशन को भी 50 लाख रुपये की राशि दी गई है। आंकड़ों के मुताबिक उनके पास 22.19 करोड़ रुपये की चल और 73.87 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति मौजूद है जबकि हाथ में नकद राशि महज 65 हजार 570 रुपये है।
संपत्ति के मामले में पत्नी से पीछे छूटे जन सुराज के मुखिया
इस पूरे चुनावी घोषणापत्र में जो बात मतदाताओं को सबसे ज्यादा चौंका रही है वह है प्रशांत किशोर की पत्नी की आर्थिक ताकत। हलफनामे से साफ है कि नकदी और चल संपत्ति के मामले में उनकी पत्नी खुद पीके से काफी आगे हैं। जहाँ पीके के पास 22 करोड़ की चल संपत्ति है वहीं उनकी पत्नी के नाम पर 89.51 करोड़ रुपये की चल संपत्ति दर्ज है। इसके साथ ही उनके पास 12.42 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति भी है और उनके हाथ में मौजूद नकदी 1 लाख 95 हजार 200 रुपये है। आम वोटरों के बीच अब इस बात का कौतूहल है कि पर्दे के पीछे काम करने वाले इस रणनीतिकार के पूरे परिवार की माली हालत इतनी मजबूत है।
बक्सर के स्कूल से लेकर फ्रांस की यूनिवर्सिटी तक का सफर
पारदर्शिता का दावा करने वाले प्रशांत किशोर ने अपनी पढ़ाई-लिखाई का जो ब्यौरा दिया है वह भी काफी दिलचस्प है। उन्होंने साल 1991 में बक्सर के एमपी हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। इसके बाद साल 1993 में उन्होंने पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की।
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उच्च शिक्षा के लिए वह उत्तर प्रदेश गए जहाँ लखनऊ विश्वविद्यालय से उन्होंने 1999 में बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री ली। इसके बाद साल 2003 में हैदराबाद से स्वास्थ्य प्रशासन में मास्टर की डिग्री हासिल की। यही नहीं साल 2010 में उन्होंने फ्रांस के कैविलम विची से फ्रेंच भाषा की विशेष पढ़ाई भी की है। एक ठेठ बिहारी पृष्ठभूमि से निकलकर विदेशी यूनिवर्सिटी तक पहुंचने की यह यात्रा युवाओं के बीच खासी चर्चा में है।
पटना के दिल में छिड़ा सबसे बड़ा सियासी घमासान
बांकीपुर विधानसभा सीट को पटना का दिल माना जाता है। यह बेहद प्रतिष्ठित सीट भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। पिछले चुनाव में उन्होंने यहाँ से एकतरफा जीत हासिल की थी लेकिन पार्टी द्वारा उन्हें राज्यसभा भेजने और राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपने के बाद उन्होंने इस पद को छोड़ दिया था। अब इस खाली मैदान में प्रशांत किशोर का सीधा मुकाबला भाजपा के नीरज सिन्हा से होने जा रहा है। जनता अब यह देखने को उत्सुक है कि दूसरों को जिताने की रणनीति बनाने वाले पीके खुद इस चुनावी अखाड़े को कैसे पार करते हैं।

