बेटा CM और पिता गा रहे हैं पाकिस्तान के गुण! आखिर फारूक अब्दुल्ला को क्यों नहीं पच रही कश्मीर की शांति?
जम्मू-कश्मीर की राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला एक बार फिर अपने विवादित बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। अब्दुल्ला उस राज्य से ताल्लुक रखते हैं जहां के मौसम और सियासी मिजाज का कोई भरोसा नहीं होता। भारत में विलय के बाद से ही कश्मीर ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की भारी कीमत चुकाई है, लेकिन मोदी सरकार के पिछले 12 सालों के कार्यकाल में यहां शांति बहाली के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए गए हैं, जिसके सकारात्मक नतीजे अब जमीन पर भी दिखने लगे हैं। हालांकि, इसके बावजूद सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला अपने पुराने अंदाज में पाकिस्तान का गुणगान करने से बाज नहीं आ रहे हैं, जिसे शांति में खलल डालने की कोशिश माना जा रहा है।
‘जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद…’
फारूक अब्दुल्ला का पाकिस्तान प्रेम कोई नया नहीं है। उनका हालिया बयान कि ‘पाकिस्तान की वजह से कश्मीरी सुरक्षित हैं’ बेहद दुर्भाग्यपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में इसकी तीखी आलोचना हो रही है और इसे ‘जिस थाली में खाना, उसी में छेद करना’ कहा जा रहा है। अब्दुल्ला परिवार का जम्मू-कश्मीर की राजनीति में दशकों से दबदबा रहा है और वर्तमान में उनके बेटे उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे हैं। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि दिल्ली की सत्ता को आंख दिखाने वाला यह परिवार कभी आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता, क्योंकि उन्हें इसके गंभीर परिणाम भली-भांति पता हैं।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद बदला कश्मीर का परिदृश्य
जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद वहां की आबोहवा पूरी तरह बदल चुकी है। पत्थरबाजी और अलगाववादियों के फरमानों का खौफ अब गुजरे जमाने की बात हो गई है। बाजार बिना वजह बंद नहीं होते और आम जनता शांति से अपना जीवन यापन कर रही है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो मौजूद हैं जहां कश्मीरी युवा मोदी सरकार के विकास कार्यों और बदली हुई व्यवस्था की खुलकर तारीफ कर रहे हैं। हाल ही में दिल्ली में एक कश्मीरी युवक द्वारा पीएम मोदी के समर्थन में नारेबाजी का मामला भी सामने आया था, हालांकि इस पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताते हुए उसके साथ मारपीट की थी।
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बीजेपी का कड़ा प्रहार: ‘पाकिस्तान चले जाएं अब्दुल्ला’
बदले हुए कश्मीर में भी फारूक अब्दुल्ला जैसे नेताओं को यह शांति रास नहीं आ रही है। उनके इस विवादित बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ा ऐतराज जताया है। भाजपा नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर फारूक अब्दुल्ला अपने बयान के लिए देश से माफी नहीं मांगते हैं, तो उन्हें भारत छोड़कर अपने पसंदीदा देश पाकिस्तान चले जाना चाहिए। कश्मीर किसी एक परिवार की जागीर नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में कांग्रेस और कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा जनता को भड़काने और शांति भंग करने के ऐसे प्रयासों को नजरअंदाज करना भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

