सीधे 12,000 हुई सैलरी! योगी सरकार के एक फैसले से 3 लाख परिवारों की बल्ले-बल्ले, विरोधियों के उड़े होश
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए एक बहुत बड़ा फैसला लेते हुए उन्हें दिवाली पर शानदार सौगात दी है। इस फैसले के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 8,000 रुपये से बढ़ाकर सीधा 12,000 रुपये कर दिया गया है, जबकि सहायिकाओं का मानदेय 4,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये कर दिया गया है।
सिर्फ मानदेय में बढ़ोतरी ही नहीं की गई है, बल्कि सरकार ने इन सभी कर्मचारियों को सालाना 5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की मुफ्त सुविधा देने का भी ऐतिहासिक ऐलान किया है। इस दोतरफा राहत से प्रदेश के लाखों परिवारों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही है और विरोधियों के खेमे में सियासी तनाव बढ़ गया है।
कितने परिवारों को मिलेगा सीधा फायदा और क्या है पूरा चुनावी समीकरण
उत्तर प्रदेश में कुल मिलाकर करीब 1,89,000 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 1,39,000 सहायिकाएं कार्यरत हैं, यानी इस तरह कुल मिलाकर लगभग 2,91,000 परिवारों को इस मास्टर स्ट्रोक का सीधा लाभ मिलने जा रहा है। सियासत के जानकारों का मानना है कि सरकार का कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला जब लाखों लोगों तक पहुंचता है, तो वह चुनाव के वक्त एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन जाता है। यदि इन 2.91 लाख परिवारों के सदस्यों की औसत संख्या के आधार पर मतदाताओं की गिनती की जाए और हर परिवार में औसतन 5 मतदाता माने जाएं, तो यह पूरा चुनावी आंकड़ा सीधे तौर पर लगभग 15 लाख वोटों तक पहुंच जाता है। यही वजह है कि इस फैसले को केवल एक प्रशासनिक कदम के रूप में नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक दिशा तय करने वाले एक बड़े मास्टर स्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है।
2022 के चुनावी आंकड़े और 2027 के महामुकाबले का दिलचस्प गणित
राज्य की राजनीतिक हलचलों को समझने के लिए साल 2022 के विधानसभा चुनाव के परिणामों पर नजर डालना बेहद जरूरी हो जाता है। उस चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को कुल 4 करोड़ 4 लाख वोट मिले थे, जिसका वोट प्रतिशत लगभग 43.82% रहा था, जबकि समाजवादी पार्टी गठबंधन को लगभग 3 करोड़ 37 लाख यानी 36.60% वोट हासिल हुए थे।
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दोनों प्रमुख गठबंधनों के बीच कुल वोटों का यह अंतर करीब 67 लाख वोटों का था। अब विश्लेषकों का मानना है कि यदि मानदेय वृद्धि और स्वास्थ्य लाभ से जुड़े परिवारों के अनुमानित 15 लाख वोट एनडीए के पक्ष में मजबूती से जुड़ जाते हैं, तो यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 4 करोड़ 19 लाख तक पहुंच सकता है।
क्या 403 विधानसभा सीटों पर पलट सकता है हार-जीत का पासा
राजनीतिक पंडितों के अनुसार यदि इन 15 लाख अतिरिक्त वोटों को उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर समान रूप से वितरित किया जाए, तो हर एक सीट पर औसतन लगभग 3,722 अतिरिक्त वोट जुड़ते नजर आते हैं। यह संख्या उन कई सीटों के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकती है जहां पिछले चुनावों में हार-जीत का अंतर बेहद कम रहा था। यही कारण है कि विपक्षी दलों में इस बात को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है कि क्या योगी सरकार का यह कल्याणकारी कदम आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में गेमचेंजर साबित होगा। फिलहाल, इस बड़े सियासी दांव ने उत्तर प्रदेश की राजनीति का तापमान पूरी तरह से बढ़ा दिया है और हर किसी की नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि यह राहत जमीन पर वोटों में कितनी तब्दील हो पाती है।

