मौत के बाद BLO को मिला न्याय; अखिलेश यादव का इमोशनल फैसला, तुरंत करें चेक
उत्तर प्रदेश में एसआईआर (मतदाता सूची पुनरीक्षण) प्रक्रिया के दौरान BLO (बूथ लेवल ऑफिसर्स) की बढ़ती मौतों को लेकर सियासी हलकों में तगड़ा बवाल मच चुका है। इस समय बिहार के बाद अब देश के 12 राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। जहां एक ओर लोग इस प्रक्रिया में दस्तावेजों के साथ उलझे हुए हैं। वहीं बीएलओ पर भी भारी दबाव आ पड़ा है। बीएलओ का काम इतना कठिन हो गया है कि उनके जीवन पर संकट आ गया है।
पिछले कुछ हफ्तों में बीएलओ की मौतों में लगातार इजाफा हुआ है। इस पर सवाल उठाते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार और चुनाव आयोग पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि यह सब एक सुनियोजित चुनावी महाघोटाले का हिस्सा हो सकता है।
आखिर क्यों बढ़ रही हैं बीएलओ की मौतें?
BLO की मौतों का सिलसिला जब से शुरू हुआ, तब से इसके राजनीतिक और मानवीय पहलू पर लगातार बहस हो रही है। सबसे हालिया मामला उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले का है, जहां एक लेखपाल सुधीर कुमार कोरी ने अपनी जान दे दी। यह घटना बेहद दुखद है और इसके बाद प्रशासन के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सुधीर कुमार की शादी होने वाली थी, लेकिन चुनावी कार्यों के दबाव के कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली।
सुधीर कुमार की बहन अमृता का कहना है कि उसे अपने भाई की मौत के पीछे बीएलओ की नौकरी और चुनावी दबाव को जिम्मेदार ठहराती हैं। बताया जा रहा है कि एक बैठक में अनुपस्थिति के कारण सुधीर कुमार को सस्पेंड करने की धमकी दी गई थी। इसी मानसिक दबाव के कारण उन्होंने यह कदम उठाया।
अखिलेश यादव की बड़ी मांग
इस घटना के बाद सपा प्रमुख ने चुनाव आयोग से मृतक परिवार को ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि BLO पर बेहद कठिन कार्यभार डाला गया है, जिसके कारण उनकी जान जा रही है। सपा अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे मानसिक दबाव में काम करने से कर्मचारियों का जीवन खतरे में पड़ सकता है।
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सपा अध्यक्ष ने आगे कहा कि बीजेपी सरकार और चुनाव आयोग की नीति ने कर्मचारियों को केवल मानसिक पीड़ा और शारीरिक थकान दी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनावी मशीनरी की तरह काम करने के दबाव में लोग नौकरी छोड़ रहे हैं या आत्महत्या कर रहे हैं।
देशभर में बीएलओ की बढ़ती मौतें
पिछले कुछ महीनों में देशभर में 25 से ज्यादा बीएलओ की मौत हो चुकी है, जिनमें सबसे ज्यादा मौतें मध्य प्रदेश में हुई हैं। इस समस्या को लेकर विपक्षी दलों ने भी चुनाव आयोग और सरकार को घेरते हुए कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस नेता सुप्रिया स्नेत ने आरोप लगाया कि एसआईआर के माध्यम से वोट चोरी की जा रही है, और यह सब चुनावी धांधली का हिस्सा हो सकता है।
क्या एसआईआर की प्रक्रिया को फिर से टाला जा सकता है?
विपक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा है कि एसआईआर प्रक्रिया में इतनी जल्दी क्यों की जा रही है, जबकि इसे सही तरीके से किया जा सकता है। कुछ जानकारों का मानना है कि काम के दबाव के कारण बीएलओ अपनी जान गंवा रहे हैं। चुनाव आयोग ने बीएलओ का मानदेय बढ़ा दिया है, लेकिन इसका कोई सकारात्मक असर नहीं दिख रहा है।
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2003 में हुए एसआईआर पुनरीक्षण में कर्मचारियों पर इतना दबाव नहीं था और वह पूरी प्रक्रिया समय रहते पूरी हो गई थी। अब जब एसआईआर की प्रक्रिया में इतने कर्मचारी अपनी जान गंवा रहे हैं, तो यह सवाल उठता है कि क्या चुनाव आयोग को इस पर अधिक संवेदनशीलता दिखानी चाहिए?
अब आगे क्या होगा?
BLO की मौतों को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। बीजेपी और चुनाव आयोग को घेरते हुए विपक्षी दलों ने यह सवाल उठाया है कि क्या इस प्रक्रिया के कारण जानें जाती रहेंगी? अखिलेश यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि अगर इस तरह की घटनाएं नहीं रुकीं, तो आने वाले चुनावों में जनता सख्त फैसला ले सकती है।
एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में अब कर्मचारियों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए, ताकि उन्हें मानसिक और शारीरिक दबाव से मुक्ति मिल सके।


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