भारत या चीन; इस दोस्ती से सबसे ज्यादा फायदा किसे, जानें क्या कहते हैं आंकड़े
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के कारण भारत और चीन के बीच संबंध (India China Relations) और भी प्रगाढ़ हुए हैं। ट्रंप सरकार ने भारत पर भारी टैरिफ (Trade Tariff War) लगाए हैं। उनका कहना है कि ये टैरिफ रूस से कच्चे तेल की खरीद के कारण लगाए गए थे। इसके कारण भारत और चीन के बीच समीकरण बदल गए हैं। दोनों के बीच संबंध बहुत तेज़ी से सुधरने लगे हैं। चीनी विदेश मंत्री वांग यी भी भारत आ चुके हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए तियानजिन जा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर भारत और चीन के बीच संबंध सुधरते हैं, तो दोनों देशों में से किसे ज़्यादा फ़ायदा होगा। हालाँकि, संबंधों में सुधार से दोनों देशों को फ़ायदा होगा। हालाँकि, मौजूदा आँकड़ों पर नज़र डालें तो चीन को ज़्यादा लाभ होने की संभावना है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और चीन के बीच कुल व्यापार 127.7 अरब डॉलर का था। इसमें भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 99.2 अरब डॉलर था। भारत चीन से तैयार माल ज़्यादा खरीदता है। कच्चा माल कम बेचता है। चीनी कंपनियों ने भारत के टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप सेक्टर में काफ़ी निवेश किया है। भारत कई चीज़ों के लिए चीन पर निर्भर है। ऐसे में अगर रिश्ते बेहतर होते हैं, तो चीन को एक बड़ा बाज़ार मिलेगा। मगर भारत को अपने उद्योगों को मज़बूत करना होगा।
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चीन या भारत जानें ज्यादा फायदा किसे (India China Relations)
भारत और चीन के रिश्ते दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित करते हैं। अगर रिश्ते बेहतर होते हैं, तो दोनों को फ़ायदा हो सकता है। हालाँकि, चीन को ज्यादा फ़ायदा होने की संभावना है। ऐसा होने के कुछ कारण हैं।
सबसे अहम बात है व्यापार घाटा। व्यापार घाटा बताता है कि कौन सा देश ज़्यादा कमा रहा है। भारत और चीन के बीच व्यापार में चीन का पलड़ा भारी है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच व्यापार 127.7 अरब डॉलर का था। भारत ने चीन से 113.45 अरब डॉलर का सामान खरीदा। वहीं, चीन ने भारत से केवल 14.25 अरब डॉलर का सामान खरीदा। नतीजतन, भारत को चीन के साथ 99.2 अरब डॉलर का घाटा उठाना पड़ा। यह घाटा लगातार बढ़ रहा है। इसका मतलब है कि भारत चीन से सामान खरीदने पर बहुत ज़्यादा निर्भर है।
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व्यापार की प्रकृति भी बताती है कि किसे फ़ायदा हो रहा है। भारत चीन से तैयार माल खरीदता है। जैसे मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स (मोबाइल फ़ोन, कंप्यूटर), दवाइयाँ, रसायन और खिलौने। ये सभी चीज़ें चीन में बड़े पैमाने पर बनती हैं। वहीं, भारत चीन को कच्चा माल भी बेचता है। जैसे लोहा, समुद्री भोजन, कपास और कुछ रसायन। कच्चा माल बेचने में उतना मुनाफ़ा नहीं होता जितना तैयार माल बेचने में होता है।
चीन की वजह से ऐसे हो सकता है भारत का भारी नुकसान
निवेश और निर्भरता भी महत्वपूर्ण हैं। चीनी कंपनियों ने भारत में काफ़ी पैसा लगाया है। ख़ासकर टेक और स्टार्टअप कंपनियों में। हालाँकि, भारत ने सुरक्षा कारणों से इस निवेश को कम करने की कोशिश की है। भारत कई ज़रूरी चीज़ों के लिए चीन पर निर्भर है। जैसे दवा और इलेक्ट्रॉनिक्स। अगर चीन से माल आना बंद हो जाए, तो भारत के इन उद्योगों को काफ़ी नुकसान हो सकता है।
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अगर दोनों देशों के बीच संबंध बेहतर होते हैं, तो चीन को भारत (India China Business) जैसा बड़ा बाज़ार मिलेगा। वो बिना किसी परेशानी के अपना माल बेच सकेगा। इससे उसका व्यापार और बढ़ेगा। चीन से सस्ता कच्चा माल और मशीनें मिलने से भारत को फायदा होगा। इससे भारत में माल की उत्पादन लागत कम हो सकती है। हालाँकि, इससे भारत के अपने उद्योगों पर दबाव बढ़ सकता है। उन्हें चीन से प्रतिस्पर्धा करनी होगी। भारत को अपना माल ज़्यादा बेचना होगा और व्यापार घाटा कम करना होगा। तभी यह रिश्ता दोनों के लिए फ़ायदेमंद होगा।
इस दोस्ती (India China Business) के ज़रिए चीन अमेरिका जैसी महाशक्तियों को आसानी से रोक पाएगा। उसके पास पूरे क्षेत्र पर आसानी से नियंत्रण करने की ताकत होगी। ऐसे में भारत के लिए चीन के साथ संतुलन बनाए रखना बेहद ज़रूरी है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ट्रंप का कार्यकाल कुछ ही वर्षों का है। इसके ख़त्म होने के बाद नई सरकार के साथ एक नए तरह के रिश्ते बन सकते हैं। ऐसे में दरवाज़े हमेशा के लिए बंद कर देना ठीक नहीं होगा। उन्हें दीर्घकालिक रणनीति पर काम करने की जरूरत है।


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