INDIA ब्लॉक का बड़ा दांव: गिर सकती है केंद्र सरकार, NDA से समर्थन वापस ले सकते हैं नायडू
उपराष्ट्रपति पद का चुनाव (Vice President election) इस बार सिर्फ संवैधानिक औपचारिकता भर नहीं रह गया है बल्कि राजनीतिक पटल पर एक नई जंग और संभावित उलटफेर की बुनियाद रखता दिखाई दे रहा है। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाकर ऐसा दांव खेला है, जिसने केंद्र की मोदी सरकार और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को असहज कर दिया है।
क्षेत्रीयता बनाम गठबंधन की मजबूरी
सुदर्शन रेड्डी का तेलंगाना के रंगारेड्डी ज़िले से आना पूरे समीकरण को बदल रहा है। भले ही ये इलाका अब तेलंगाना में है लेकिन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से ये आंध्र प्रदेश के बेहद करीब माना जाता है। यही वजह है कि Telugu Desam Party (टीडीपी) और उसके प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू क्षेत्रीय भावनाओं और गठबंधन की निष्ठा दोनों के बीच फंसे हुए हैं।
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वहीं एनडीए की ओर से महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया गया है, जिनकी पृष्ठभूमि तमिलनाडु से जुड़ी है। इस तरह से चुनाव अब केवल संख्याओं के हिसाब से नहीं बल्कि क्षेत्रीय अस्मिता और राजनीतिक संदेश के लिहाज से भी बेहद दिलचस्प हो गया है।
नायडू की दुविधा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नायडू एनडीए के उम्मीदवार के साथ खड़े होते हैं तो आंध्र प्रदेश में उनकी विश्वसनीयता पर आंच आ सकती है। ऐसा कदम जनता के बीच “क्षेत्रीय हितों की उपेक्षा” के तौर पर देखा जाएगा। दूसरी तरफ यदि वे सुदर्शन रेड्डी को समर्थन देते हैं तो यह मोदी सरकार के खिलाफ सीधी बगावत मानी जाएगी।
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मोदी सरकार पर असर?
एनडीए के पास मौजूदा समय में लोकसभा में 293 सांसद हैं। यदि चंद्रबाबू नायडू (Chandrababu Naidu) पाला बदलते हैं तो ये संख्या घटकर 277 रह जाएगी। तकनीकी रूप से सरकार के पास 272 के जादुई आंकड़े से अभी भी कुछ सांसदों का बफ़र रहेगा, मगर इससे एनडीए की राजनीतिक स्थिरता और “अपनी पकड़ बनाए रखने की क्षमता” पर सवाल जरूर खड़े होंगे। साथ ही, एनडीए के अन्य सहयोगियों को भी दलगत निष्ठा पर पुनर्विचार का अवसर मिल सकता है।
अब आगे क्या
फिलहाल स्थिति बहुत संवेदनशील और अनिश्चित है। उपराष्ट्रपति चुनाव (Vice President election) के नतीजे चाहे जैसे आएं, पर यह तय है कि नायडू की अगली चाल ही सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए निर्णायक साबित होगी। इस चुनाव से निकला संदेश 2024 के आम चुनावों के बाद की राजनीति पर भी गहरा असर डाल सकता है।


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