भारत का वो इलाका जहां कोई नहीं देता वोट, फिर भी चुन लिए जाते हैं नेता
भारत की आजादी (Freedom) को 78 साल हो चुके हैं और आज भी इस देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया (Democracy in India) में विभिन्न बदलाव और सुधार हो रहे हैं। ये देश अपनी विविधता, संस्कृति और राजनीतिक प्रणाली के लिए जाना जाता है, जहां चुनावों के द्वारा लोगों के प्रतिनिधि चुने जाते हैं। मगर क्या आपने कभी सुना है कि भारत में एक ऐसा गांव है, जहां चुनाव की कोई परंपरा नहीं है? जी हां, उत्तराखंड के एक छोटे से गांव (Indian Village Story) में लोग कभी वोट नहीं डालते और यहां तक कि इलेक्शन भी नहीं होते।
कहां है यह गांव
ये अनोखा गांव उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित है और इसका नाम है तल्ला बोथों (Uttarakhand Tallan Bothon)। ये गांव अपने विशेष तरीके से लोकतांत्रिक व्यवस्था से अलग है।
वोट न डालने का कारण
तल्ला बोथों (Uttarakhand Tallan Bothon) के निवासियों का मानना है कि चुनाव में जो पैसे खर्च होते हैं, वही पैसे यदि गांव के विकास में लगाए जाएं तो वे अधिक फायदेमंद साबित हो सकते हैं। यही वजह है कि इस गांव के लोग चुनावों में हिस्सा नहीं लेते। उनका मानना है कि एकता और सामूहिक निर्णय की ताकत चुनावी प्रक्रिया से कहीं अधिक प्रभावी है।
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प्रधान का चयन कैसे होता है
आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि इस गांव में अब तक 100 से ज्यादा प्रधान चुने जा चुके हैं, मगर यहां पर चुनाव का कोई रिवाज नहीं है। तल्ला बोथों में गांव के बुजुर्गों और स्थानीय प्रतिष्ठित लोगों की एक सर्वसम्मति होती है, जो नए प्रधान का चुनाव करती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और समझदारी से की जाती है।
नीम करौली बाबा के आश्रम के पास स्थित ये गांव
तल्ला बोथों (Uttarakhand Tallan Bothon) गांव उत्तराखंड के प्रसिद्ध नीम करौली बाबा के आश्रम, यानी कैंची धाम से महज दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह गांव चुनावों से अलग रहते हुए भी अच्छी तरह से विकसित है। यहां के घरों में बिजली और पानी की सुविधाएं मौजूद हैं और गांव में पक्की सड़कें भी बनी हुई हैं।
गांव की जीवनशैली और विकास
इस गांव में रहकर आपको समझ में आता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में परिवर्तन संभव है और गांव की एकता और समझदारी से काम करने की प्रक्रिया भी उतनी ही प्रभावी हो सकती है। भले ही यहां पर चुनाव नहीं होते, मगर यह गांव एक मिसाल प्रस्तुत करता है कि छोटे-छोटे बदलाव और सामूहिक निर्णय से बड़ी प्रगति हो सकती है।


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