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चिराग पासवान ने महागठबंधन को घेरा, मुस्लिमों के हिस्से पर खड़ा हुआ विवाद

बिहार की राजनीति में इस बार मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। महागठबंधन ने जहां पिछड़े वर्ग को सीएम का चेहरा घोषित किया है, वहीं अति पिछड़े समुदाय को डिप्टी सीएम बनाने की घोषणा की है। इस बीच, एलजेपी के प्रमुख चिराग पासवान ने मुसलमानों के हिस्से को लेकर तीखा सवाल उठाया है, जो विपक्षी खेमे में हलचल मचाने का काम कर रहा है।

महागठबंधन की मुस्लिमों को लेकर खामोशी?

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में प्रचार तेज़ हो चुका है। महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को सीएम का चेहरा घोषित किया है और मुकेश साहनी को डिप्टी सीएम का उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, इस फैसले पर एनडीए की तरफ से यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर मुस्लिमों को इस गठबंधन में कौन सी जगह दी गई है? यादव को सीएम बनाया गया, जबकि अति पिछड़े को डिप्टी सीएम का चेहरा बना दिया गया, मगर मुसलमानों को क्या मिला?

चिराग पासवान ने 2005 के उस समय को याद करते हुए यह सवाल उठाया कि यदि महागठबंधन मुसलमानों के हितैषी थे, तो तब एक मुस्लिम को मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया गया था? यह बयान उस समय के त्रिशंकु विधानसभा के संदर्भ में है, जब चिराग के पिता रामविलास पासवान ने लालू यादव से गठबंधन करते हुए मुसलमानों के लिए मुख्यमंत्री पद की बात की थी, मगर लालू यादव इससे सहमत नहीं हुए थे।

तेजस्वी का पलटवार: “बीजेपी अब अति पिछड़ों के खिलाफ”

चिराग पासवान के आरोपों पर तेजस्वी यादव ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी अब अति पिछड़ा वर्ग से नफरत करने लगी है, खासकर जब से महागठबंधन ने मुकेश साहनी को उपमुख्यमंत्री बनाने की घोषणा की है। तेजस्वी का कहना है कि बीजेपी को अति पिछड़ा समाज के प्रति अपनी नफरत को छुपाने की जरूरत नहीं है।

मुस्लिमों का असर और उनका राजनीतिक महत्व

बिहार में मुस्लिम आबादी का प्रभावी स्थान है। राज्य में लगभग 17.7% मुस्लिम हैं, और 87 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता 20% से अधिक हैं। सीमांचल की 24 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का असर सबसे ज्यादा है, जहां मुस्लिम आबादी किशनगंज में 68%, कटिहार में 44%, अररिया में 43% और पूर्णिया में 38% है। ऐसे में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी बिना कोई संदेह राज्य की राजनीति में अहम है।

पप्पू यादव का दलित और मुस्लिम गठबंधन

वहीं, पप्पू यादव ने राहुल गांधी की तरफ से दलित और मुस्लिम दोनों समुदायों को डिप्टी सीएम पद देने का आश्वासन दिया है। उनका कहना है कि राहुल गांधी जी इन दोनों वर्गों का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस तरह, पप्पू यादव दलित और मुस्लिम दोनों को जोड़कर चुनावी समीकरण को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या मुस्लिमों के लिए बनेगा कोई चेहरा?

महागठबंधन ने अति पिछड़े समाज को डिप्टी सीएम का चेहरा बनाया है, मगर मुस्लिम समुदाय के लिए कोई चेहरा नहीं दिख रहा है। यह सवाल अब तेज हो गया है कि क्या तेजस्वी यादव मुस्लिमों को अपनी गठबंधन में किसी प्रमुख पद पर देखेंगे? क्या वे विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए मुस्लिम चेहरा पेश करेंगे? बिहार के राजनीतिक माहौल में यह सवाल जवाब की राह तक रहा है।

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बिहार की सियासत में मुस्लिम समुदाय का रोल महत्वपूर्ण है और उनकी भूमिका आगामी चुनावों में निर्णायक साबित हो सकती है।

राजनीतिक माहौल में मुस्लिम समुदाय की अहम भूमिका

बिहार के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में मुस्लिम समुदाय की अहम भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आगामी विधानसभा चुनावों में इस समुदाय के वोट बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं, और इसका असर चुनावी परिणामों पर पड़ेगा। सवाल यह है कि क्या महागठबंधन मुस्लिम समुदाय के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा या फिर उन्हें केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा?

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