अखिलेश ने आजम खान को दी पहली अहम जिम्मेदारी, टीम में डिंपल यादव भी
अखिलेश यादव की पार्टी के दिग्गज नेता और रामपुर से दस बार के विधायक रह चुके आजम खान की जेल से बाहर आने के बाद पार्टी ने उन्हें बिहार विधानसभा इलेक्शन के लिए अहम जिम्मेदारी सौंपी है। बीते 23 सितंबर को सीतापुर जेल से रिहा हुए आजम खान को सपा चीफ अखिलेश यादव ने फौरन पार्टी की रणनीति में शामिल कर लिया है। ये कदम बिहार में मुस्लिम और यादव वोटों को एकजुट करने की प्लानिंग का हिस्सा माना जा रहा है।
सपा ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए 20 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है। जिसमें अखिलेश यादव, उनकी पत्नी और मैनपुरी सांसद डिंपल यादव, आजम खान, किरणमय नंदा, अवधेश प्रसाद, इकरा हसन, प्रिया सरोज, बाबू सिंह कुशवाहा, नरेश उत्तम पटेल, रमाशंकर विद्यार्थी राजभर, लालजी वर्मा, छोटेलाल खरबार, राजीव राय, सनातन पांडे, लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद, तेज प्रताप सिंह यादव, ओम प्रकाश सिंह, कांशीनाथ यादव और धर्मेंद्र सोलंकी को जो है वह स्टार प्रचारक बनाया है।
समाजवादी पार्टी ने आजम खान को क्यों बनाया स्टार प्रचारक?
आजम खान उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय के बीच मजबूत प्रभाव रखते हैं। उन्हें स्टार प्रचारक बनाकर सपा ने बिहार की मुस्लिम आबादी जो लगभग 17 फ़ीसदी है उन्हें एकजुट करने की रणनीति अपनाई है। आजम खान की रिहाई के बाद उनकी सुरक्षा बहाल कर दी गई है और अखिलेश यादव ने उन्हें नकली मुकदमों का शिकार बताते हुए पार्टी में उनकी वापसी का स्वागत किया। आजम खान पर दर्ज 40 से ज्यादा मुकदमों में से कई को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जिसे सपा ने अपनी नैतिक जीत के रूप में प्रचारित किया।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आजम खान का प्रचार बिहार के उन मुस्लिम क्षेत्रों में काफी प्रभावी हो सकता है जहां मुस्लिम और यादव मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। सपा की रणनीति बीजेपी और एनडीए की जो है एनडीए के खिलाफ जो है वह माहौल बनाने का प्रयास है। इसके अलावा अफजाल अंसारी का नाम सूचि में शामिल करना पूर्वांचल और बिहार के कुछ हिस्सों में सपा के प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आजम खान की रिहाई को न्याय की जीत करार दिया है और इसे विपक्षी एकता का प्रतीक बताया।
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बिहार में महागठबंधन के तहत सपा, आरजेडी और कांग्रेस के साथ जो अन्य दल हैं, वह मिलकर एनडीए को कड़ी चुनौती देने की तैयारी में है। आजम खान को स्टार प्रचारक बनाना ना केवल पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरता है बल्कि यह संदेश भी देता है कि सपा अपने नेताओं के साथ हर परिस्थिति में खड़ी रहती है। हालांकि सियासी जानकारों का मानना है कि आजम खान पर कुछ मामले अभी भी लंबित हैं। जिसके कारण यह कदम विवादास्पद हो सकता है। फिर भी सपा का मानना है कि आजम की लोकप्रियता और उनका अनुभव बिहार में गठबंधन के लिए फायदेमंद साबित होगा।
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आपको बता दें कि जब आजम खान जेल से बाहर आए तब उन्होंने सरकार द्वारा दी जा रही वाई प्लस सुरक्षा लेने से भी इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार की ओर से कोई लिखित पत्र इस बारे में नहीं आया। इसके अलावा उनके पार्टी छोड़ने की बातें भी चल रही थी। लेकिन सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव उनसे मिलने गए। दोनों के बीच लंबी बातचीत हुई। इसके बाद कहा जा रहा है कि आजम खान पार्टी में पूरी तरह से सक्रियता दिखाएंगे।
फिलहाल बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में 243 सीटों के लिए होने वाले मुकाबले में महागठबंधन और एनडीए के बीच कांटे की टक्कर है। आजम खान को स्टार प्रचारक बनाकर सपा ने ना केवल अपनी एकजुटता और वफादारी दिखाई बल्कि बिहार में मुस्लिम यादव गठजोड़ को मजबूत करने की रणनीति भी अपनाई है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में दोनों गठबंधन दल यानी एनडीए और इंडिया गठबंधन एक दूसरे पर किस तरह के जुबानी हमले करते हैं।


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