उत्तर प्रदेशपॉलिटिक्स

माघ मेले में मुलायम सिंह की प्रतिमा पर गहराया विवाद, आवंटन रद्द करने की धमकी

प्रयागराज की पावन रेती पर लगने वाला माघ मेला इस बार भक्ति और आस्था के साथ-साथ तीखी राजनीति का केंद्र बन गया है। मामला जुड़ा है धरतीपुत्र मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा से। खबर है कि मेले में नेताजी की प्रतिमा लगाए जाने की तैयारियों के बीच प्रशासन ने नोटिस चस्पा कर दिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) इसे सीधे तौर पर ‘पिछड़ों के मसीहा’ का अपमान बता रही है। आखिर एक प्रतिमा से प्रशासन को क्या दिक्कत है? क्या वाकई इसके पीछे कोई राजनीतिक दबाव है या मामला कुछ और है? आइए विस्तार से समझते हैं।

क्या है पूरा विवाद

मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान द्वारा मेले में एक शिविर लगाया गया है। इसी शिविर में नेताजी की आदमकद प्रतिमा का लोकार्पण होना था। मगर इससे पहले कि कार्यक्रम आगे बढ़ता, अपर मेला अधिकारी दयानंद प्रसाद ने संस्था को एक नोटिस थमा दिया।

नोटिस की मुख्य बातें

  • संस्था पर ‘धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं के विपरीत’ कार्य करने का आरोप लगाया गया है।
  • कहा गया है कि गैर-धार्मिक क्रियाकलापों के कारण मेले के साधु-संतों ने आपत्ति जताई है।
  • संस्था से 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया है।
  • चेतावनी दी गई है कि जवाब न मिलने पर भूखंड (Plot No. SLE 631) का आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा।

सपा का कड़ा प्रहार: “भाजपा डर रही है”

इस नोटिस के बाद समाजवादी पार्टी का पारा चढ़ गया है। सपा मीडिया सेल ने सोशल मीडिया (X) पर इसे ‘निंदाजनक और शर्मनाक’ करार दिया। पार्टी का कहना है कि इस शिविर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन और दूध की व्यवस्था की जानी थी, मगर भाजपा सरकार PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की एकजुटता और नेताजी की लोकप्रियता से डर गई है।

संस्था के संचालक और सपा नेता संदीप यादव ने भावुक होते हुए कहा कि क्या श्रद्धा भाव से दूध पिलाना और भोजन कराना अपराध है? अगर प्रशासन ने भाजपा के इशारे पर शिविर हटाने की कोशिश की, तो हम संगम की रेती पर आत्मदाह करेंगे।

माता प्रसाद पांडेय का सवाल- कटआउट लग सकते हैं तो प्रतिमा क्यों नहीं

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, जिन्हें इस प्रतिमा का अनावरण करना था, उन्होंने भी सरकार को घेरा। उन्होंने तर्क दिया कि पिछले कुंभ में भी बड़े-बड़े कटआउट लगे थे। मुलायम सिंह यादव के लाखों अनुयायी मेले में आते हैं। अगर वे स्नान के बाद अपने नेता को प्रणाम करते हैं और कार्यकर्ता उन्हें नाश्ता-पानी कराते हैं, तो इसमें धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन कहां है?

Up panchayat Election 2026: लड़ना है प्रधानी का चुनाव तो ये 10 कागज फौरन करो तैयार

क्या वाकई ये ‘खुन्नस’ की राजनीति है

सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाती हैं। सवाल यह उठता है कि क्या माघ मेले जैसे धार्मिक आयोजन में किसी राजनीतिक व्यक्तित्व की प्रतिमा लगाना परंपरा के विरुद्ध है? या फिर यह प्रशासन की अति-सक्रियता है?

इससे पहले महाकुंभ में भी ऐसी कोशिशें हुई थीं, मगर तब प्रतिमा लगी रही थी। अब माघ मेले में इस तरह का नोटिस आना कई सवाल खड़े करता है:

  • क्या साधु-संतों की आपत्ति वास्तविक है या इसे आधार बनाया जा रहा है?
  • क्या प्रशासन विकास और व्यवस्था के नाम पर एक पक्षीय कार्रवाई कर रहा है?

बृजभूषण सिंह ने तारीफ में अखिलेश के लिए जो कह दिया, उसे सुनकर बीजेपी के पैरों तले खिसक जाएगी जमीन

आगे की रणनीति क्या

शिविर के आयोजक संदीप यादव ने अपना जवाब प्रशासन को सौंप दिया है। फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सपा नेताओं का कहना है कि वे इस मामले को लेकर अखिलेश यादव से चर्चा करेंगे और जरूरत पड़ी तो बड़ा आंदोलन भी किया जाएगा।

प्रयागराज की धरती पर धर्म और राजनीति का यह टकराव फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। एक तरफ प्रशासन नियमों की दुहाई दे रहा है, तो दूसरी तरफ सपा इसे अस्मिता की लड़ाई बना चुकी है। देखना होगा कि क्या ‘नेताजी’ की प्रतिमा को संगम की रेती पर जगह मिल पाती है या राजनीति की भेंट चढ़ जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *