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धनखड़ vs राधाकृष्णन: जानें दोनों में क्या फर्क है, चर्चा में बीजेपी का फैसला

CP Radhakrishnan VS Jagdeep Dhankhar: केंद्र की सत्ता में काबिज एनडीए गठबंधन ने आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव (Vice Presidential Election) के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। ये फैसला उस वक्त आया है जब पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

68 वर्षीय राधाकृष्णन (NDA Candidate) जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से शुरुआती दौर में जुड़े थे एक मृदुभाषी और सुलझे हुए नेता माने जाते हैं। उनकी छवि लंबे समय से विवादों से दूर एक शांत राजनेता की रही है। उनके नाम पर सहमति बनाकर भाजपा ने एक अहम रणनीतिक चाल चली है जो केवल व्यक्ति-परिवर्तन नहीं बल्कि व्यापक राजनीतिक संदेश भी है।

बदला नजरिया, बदला चेहरा

जहां जगदीप धनखड़ को भाजपा ने 2022 में जाट आंदोलन की पृष्ठभूमि में उम्मीदवार बनाकर भेजा था वहीं राधाकृष्णन की उम्मीदवारी एक अलग दिशा की ओर संकेत करती है। उस समय पार्टी का फोकस जाट समुदाय को साधने पर था लेकिन अब पार्टी की प्राथमिकता दक्षिण भारत और ओबीसी समुदाय की ओर झुकी हुई दिख रही है।

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राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं एक ऐसा राज्य जहां भाजपा को अब तक बहुत सीमित सफलता मिली है। उन्हें ‘तमिलनाडु का मोदी’ कहे जाने की भी चर्चा होती रही है और वह प्रभावशाली ओबीसी वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। इन दोनों पहलुओं ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद का आदर्श उम्मीदवार बना दिया है खासकर ऐसे समय में जब दक्षिण भारत में भाजपा अपने आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

धनखड़ vs राधाकृष्णन; दोनों में क्या फर्क (CP Radhakrishnan VS Jagdeep Dhankhar)

धनखड़ की पहचान एक आक्रामक और बेबाक नेता की रही है। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहते हुए उनका ममता बनर्जी सरकार से टकराव लगातार सुर्खियों में रहा। उपराष्ट्रपति बनने के बाद भी राज्यसभा में उनकी तीखी टिप्पणियां चर्चा का विषय बनीं। विपक्ष अक्सर उन्हें निष्पक्षता से दूर मानता रहा।

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इसके उलट राधाकृष्णन को संतुलित और संयमित नेता माना जाता है। उनका राजनीतिक सफर विचारधारा-आधारित रहा है और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में उन्होंने लंबे समय तक काम किया है। विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा जैसी संवैधानिक संस्था को अब आक्रोश नहीं विवेक और संतुलन की ज़रूरत है और राधाकृष्णन इस भूमिका में बेहतर ढंग से फिट बैठते हैं।

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