धनतेरस पर झाड़ू खरीदना क्यों जरूरी, जानें नरक चतुर्दशी कब
धनतेरस 2025 सर पर है और इस खास पर्व पर झाड़ू खरीदने की परंपरा हर घर में देखी जाती है मगर क्या आप जानते हैं धनतेरस पर झाड़ू खरीदना क्यों आवश्यक है और अगर नहीं खरीदी तो आपके साथ क्या हो सकता है? आईये जानते हैं इस खबर के माध्यम से। धनतेरस जो इस साल 18 अक्टूबर को मनाया जा रहा है।
हिंदू संस्कृति में धन और वैभव का पर्व है। इस दिन नई चीजें खरीदना शुभ माना जाता है और झाड़ू इनमें खास स्थान रखता है। मगर सवाल यह है कि झाड़ू ही क्यों? पहला कारण है झाड़ू का लक्ष्मी से संबंध। हिंदू मान्यताओं में झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। यह घर से गंदगी और नकारात्मक ऊर्जा को हटाती है। जिससे सकारात्मकता और धन का प्रवाह बढ़ता है।
धनतेरस पर झाड़ू क्यों जरूरी
साल 2025 में जब लोग आर्थिक चुनौतियां और महंगाई से जूझ रहे हैं। यह परंपरा और भी प्रासंगिक हो जाती है क्योंकि यह आर्थिक स्थिरता की उम्मीद जगाती है। दूसरा स्वच्छता का महत्व। भारतीय संस्कृति में स्वच्छता को समृद्धि से जोड़ा जाता है। धनतेरस पर नया झाड़ू खरीदकर घर को साफ करना नए अवसरों और धन के आगमन का संकेत देता है। ये एक तरफ से पुरानी नकारात्मकता को अलविदा कहने और नई शुरुआत करने का प्रतीक है। तीसरा झाड़ू खरीदना शुभता का संदेश देता है।
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धनतेरस 2025 पर नया झाड़ू लाना न केवल घर की सफाई के लिए बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि इसे सम्मान पूर्वक रखना चाहिए और रात में इसका उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि यह लक्ष्मी के अपमान का प्रतीक हो सकता है। अब सवाल यह कि अगर झाड़ू न खरीदी तो क्या होगा? धनतेरस पर झाड़ू न खरीदना कोई बड़ा पाप तो नहीं है, मगर मान्यताओं के अनुसार यह शुभ अवसर चूक सकता है।
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ऐसा माना जाता है कि नया झाड़ू नय लाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। जो आर्थिक समृद्धि और सकारात्मकता को बाधित कर सकती है। यह परंपरा लक्ष्मी को आमंत्रित करने का प्रतीक है और इसे छोड़ने से धन के प्रभाव में रुकावट आ सकती है और आज जब हम डिजिटल युग में जी रहे हैं। यह परंपरा हमें अपनी जड़ों से जुड़ी रखती है। यह हमें याद दिलाती है कि साधारण चीजें भी हमारे जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। तो इस धनतेरस एक नया झाड़ू जरूर खरीदें और अपने घर में समृद्धि और सकारात्मकता का स्वागत करें। तो इस धनतेरस अपने घर में सकारात्मकता लाने के लिए झाड़ू जरूर खरीदें।
जानें नरक चतुर्दशी कब
बता दें कि दीपोत्सव की शुरुआत हो चुकी है और चारों तरफ रोशनी की तैयारी है। मगर इस तैयारी के बीच एक बड़ा सवाल जो हर किसी के मन में है। नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली आखिर इस साल 19 अक्टूबर को है या 20 को? और सबसे खास रूप चौदस का वह विशेष अभ्यंग है। स्नान कब होगा जो आपको सौंदर्य और आरोग्य का वरदान देता है। आपके इसी दुविधा को दूर करने के लिए हम पंचांग के सबसे सटीक और नए अपडेट्स लेकर आए हैं।
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इस साल तिथियों के फेर के कारण यह पर्व दो दिन मनाया जाएगा जिसकी सही जानकारी होना बेहद जरूरी है। पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि इस वर्ष 19 अक्टूबर 2025 रविवार को दोपहर 1:51 से शुरू होगी और अगले दिन 20 अक्टूबर सोमवार को दोपहर 3:44 पर समाप्त होगी। ध्यान दीजिए नरक चतुर्दशी पर यमराज की पूजा और दिव मुख्य रूप से रात के समय किया जाता है। क्योंकि चतुर्दशी तिथि 19 अक्टूबर की रात को भी रहेगी। इसलिए नरक चतुर्दशी की पूजा 19 अक्टूबर रविवार की रात को की जाएगी।
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आपको बता दें कि नरक चतुर्दशी को ही रूप चौदशी या रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कर्म है अभंग स्नान जो सूर्योदय से पहले किया जाता है। यह स्नान सौंदर्य और आरोग्य के लिए वरदान माना जाता है। स्नान के लिए तिथि की गणना और सूर्योदय का समय देखा जाता है। इसलिए अभ्यंग स्नान 19 अक्टूबर को नहीं बल्कि 20 अक्टूबर 2025 सोमवार को किया जाएगा।
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स्नान का मुहूर्त होगा प्रातः काल 5:13 से 6:25 तक। इस 1 घंटे 12 मिनट के शुभ मुहूर्त में आपको तिल के तिल से मालिश और उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए। यह माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को नरक के कष्टों से मुक्ति मिलती है और वह रूपवान बनता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर का वध किया था और 16,000 कन्याओं को उसके केंद्र से मुक्त करवाया था। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
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इसलिए नरक चतुर्दशी हमें संदेश देती है कि हमें अपने भीतर के आलस्य, नकारात्मकता और अहंकार को समाप्त करके ज्ञान और प्रकाश की ओर बढ़ना चाहिए। तो इन शुभ तिथियों और मुहूर्तों का ध्यान रखें। सही विधि से पूजा और स्नान करें और अपने जीवन से हर अंधकार को मिटा दें। हम उम्मीद करते हैं यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी।
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ज्ञात करा दें कि धनतेरस 2025 और नरक चतुर्दशी जैसे पर्व केवल धार्मिक रीति-रिवाज़ नहीं हैं । ये हमारे जीवन में ऐसे मोड़ बन सकते हैं जहां हम साधारण कार्यों जैसे कि झाड़ू खरीदना या सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और उनके ज़रिए नए विचार और नई ऊर्जा को आमंत्रित कर सकते हैं।
इस साल जब आर्थिक और सामाजिक चुनौतियाँ हमारे सामने हैं, ये पर्व हमें हमारी जड़ों से जोड़ते हैं और याद दिलाते हैं कि सपनों की शुरुआत छोटी आदतों से होती है।

