hamas vs isreal war: इन दो वजहों के चलते गाजा खून खराबे पर चुप हैं अरब देश
hamas vs isreal war: हमास और इजराइल के बीच 2 साल बाद जंग थम चुकी है। इस जंग के थमने के साथ ही गाजा में नई उम्मीद जगी है। धीरे-धीरे गाजा वासियों की जिंदगी भी पटरी पर आने लगी है। यह सब हो पाया है ट्रंप के गाजा पीस प्लान की बदौलत। मगर इस समझौते को एक हफ्ता ही गुजरा है कि ट्रंप ने एक बार फिर हमास को बड़ी धमकी दे डाली है।
डोनाल्ड ट्रंप ने साफ-साफ बोल डाला है कि हमास ने अगर अभी भी गाजा में खूनखराबा जारी रखा तो उनको अब छोड़ा नहीं जाएगा और उन्हें गाजा के अंदर घुसकर खत्म कर दिया जाएगा। इससे पहले गाजा में 2 सालों से ज्यादा समय से जारी युद्ध को रुकवाने का क्रेडिट ट्रंप को ही दिया जा रहा है। इजराइल और हमास ने बीते हफ्ते अमेरिका की मध्यस्था में तैयार किए गए इस शांति समझौते वाले प्रस्ताव पर सहमति जताई थी। यह प्रस्ताव 10 अक्टूबर से प्रभावी हो गया है।
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यूएस प्रेसिडेंट ने गुरुवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में हमास के लिए वार्निंग जारी की है। ट्रंप ने लिखा है कि अगर हमास गाजा में लोगों को मारना जारी रखता है जो समझौता का हिस्सा नहीं है तो हमारे पास अंदर जाकर उन्हें मारने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। ट्रंप ने इससे पहले भी हमास को सख्त चेतावनी जारी की ट्रंप ने कहा था कि अगर हमास हथियार नहीं डालता है तो और सभी बंधकों को नहीं लौटाता है तो उसके विरुद्ध अब तक की सबसे बड़ी कारवाई की जाएगी।
ट्रंप के अलावा इजरायल भी दे रहा धमकियां
ट्रंप ने वाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि मैंने हमास से सीधी बात की है और पूछा है कि क्या वो hamas vs isreal war में हथियार डालेंगे तो उनका जवाब था कि वह ऐसा करेंगे। उन्होंने मुझसे यही वादा किया था और अब या तो वह हथियार छोड़े या हम उनके विरुद्ध आवश्यक कदम उठाएंगे। ट्रंप के अलावा हमास को इजराइल से भी धमकी लगातार मिल रही है।
इजराइली अधिकारियों ने हमास को चेतावनी दी है कि अगर हमास ने युद्ध विराम समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया और सहमति के मुताबिक सभी शवों को वापस नहीं लौटाया तो इजराइल दोबारा हमले शुरू कर देगा और इस बार अमेरिका भी उसका साथ देगा। इजराइल रक्षा मंत्री इजराइल कॉर्ड्स ने कहा है कि उन्होंने सेना को निर्देश दिया है कि अगर hamas vs isreal war फिर से शुरू होता है तो हमास को पूरी तरह से कुचलने की योजना तैयार करें। इजराइल के रक्षा मंत्री की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था कि अगर हमास समझौते का पालन करने से इंकार करता है तो इजराइल अमेरिका के साथ मिलकर लड़ाई फिर से शुरू करेगा और हमास को पूरी तरह से हराने और युद्ध के सभी उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कारवाई करेगा।
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इसी बीच हमास ने दो और मृतक बंधकों के शव इजराइल को भेज दिए हैं। हब्रो मीडिया के रिपोर्ट के मुताबिक दोनों ताबूतों को इजराइली रक्षा बल के सैनिकों को सौंप दिया गया है। इससे पहले हमास ने बुधवार को चार शवों को सौंपा था। जिसमें एक को इजराइल ने फिलिस्तीनी नागरिक का शव बताया था। फिलहाल हमास ने कुल 28 शवों में से सिर्फ नौ बंधकों के शवों को ही सौंपा है। वही 19 अभी भी लापता है।
हालांकि हमास का कहना है कि वो धीरे-धीरे शवों को ढूंढ रहा है और वो धीरे-धीरे इजराइल को सभी शवों को सौंप देगा। मगर जिस तरीके से ट्रंप ने चेतावनी दी है उससे अब सवाल उठता है कि फिर गाजा में युद्ध शुरू हो जाएगा।
करीब 20 ताकतवर अरब देश और मुस्लिम मुल्कों के नुमाइंदे साथ में खुद प्रेसिडेंट ट्रंप की मौजूदगी जिनकी गारंटी से गाजा का सीजफायर समझौता होता है। ये उस जंग को रोकने के लिए हुआ जो 2023 से लगातार जारी थी और इसराइल की आक्रामकता ने गाजा को धूल में बदल दिया। हमास और इसराइल के बीच जंगबंदी में सऊदी, क़तर, मिस्र, यूएई, तुर्की, पाकिस्तान जैसे मुल्कों के राष्ट्रध्यक्ष या प्रतिनिधि मौजूद थे और इन देशों ने प्रेसिडेंट ट्रंप के गजा पीस प्लान पर खूब कसीदे भी पढ़े। मगर सीज फायर प्लान की गारंटी लेने वाले सभी देश इस प्लान के अमल होने पर कितनी नजर रख रहे हैं? यह बड़ा सवाल है।
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खबर आ रही है कि इसराइल ने गाजा में अनाज और जरूरी चीजों की रसद फिर रोकना शुरू कर दी है और अरब और मुस्लिम देश चुप हैं। वही मिस्र की राफा बॉर्डर से ही यह रसद इसराइल को भेजी जा रही है। मगर इसराइल ने बंधकों की सही लाशें ना मिलने का आरोप लगाते हुए गाजा में शर्त के मुताबिक एंटर होने वाले 600 ट्रकों में से आधे रुकवा दिए हैं। क्या वह गजा के भूख से बिलखते लोगों को प्रताड़ित करके अपनी शर्तें पूरी कराने की कोशिश में है। मगर अब वही सीज फायर हो गया है और उस पर अमल भी शुरू हो चुका है। फिर इस पर यहूदी देश के जरिए लगाए जा रहे अड़ंगों पर मुस्लिम देशों और अमेरिका की खामोशी कई सवाल खड़े कर रही है।
गाजा विवाद (hamas vs isreal war) पर इस वजह से चुप हैं अरब देश
मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट कहते हैं कि डर, मजबूरी और खरबों के खेल की वजह से भी अरब और मुस्लिम देश सब देखते रहते हैं और देखकर भी कुछ नहीं बोल पाते। पहला खौफ तो अमेरिका का है जो इजरायल का पक्का दोस्त है और अरब देशों की सुरक्षा की गारंटी लेता है। हालांकि क़तर पर हमले के बाद से अरब मुल्कों का अमेरिका से भरोसा डगमगाया जरूर है।
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वहीं दूसरी तरफ गाजा में रिकंस्ट्रक्शन के नाम पर अभी अमेरिका के जरिए इन्हीं अरब मुल्कों को काम करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इन्हीं मुल्कों की कंपनियां वहां पर काम करेंगी। यही वजह है कि गाजा में सीज फायर के बावजूद इसराइली आक्रामकता पर अरब और मुस्लिम देश चुप हैं। इनमें सऊदी, तुर्की और मिस्र तो ताकतवर देश है। बावजूद इसके पीस डील कराने के बाद सभी ने चुप्पी साध ली है और इजरायल हमेशा की तरह सीज फायर तोड़ने की जुगत में नजर आ रहा है। अपनी मनमानी करते दिख रहा है।

