Nobel Peace Prize 2025: इस वजह से ट्रंप को नहीं Maria Corina Machado को मिला सम्मान
Nobel Peace Prize 2025: इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल सकता है। मगर 2025 का नोबेल शांति सम्मान किसी और को मिला।
इस साल वेनेजुएला की विपक्षी नेता Maria Corina Machado को यह पुरस्कार मिला है। उन्हें यह सम्मान तानाशाही के विरुद्ध लोकतंत्र की लड़ाई और शांतिपूर्ण बदलाव के प्रयासों के लिए दिया गया।
Maria Corina Machado के बारे में जानें
Maria Corina Machado वेनेजुएला की एक जानी-मानी राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे 7 अक्टूबर 1967 को जन्मी थीं और बीते दो दशकों से लगातार अपने देश में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ रही हैं।
RBI के नियमों में बड़ा बदलाव, घंटों में क्लियर होगी चेक, लोन मिलना हुआ आसान
- 2002 में मचाडो ने सुमाते नामक संगठन की सह-स्थापना की, जो निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों के लिए काम करता है।
- 2013 में उन्होंने वेंटे वेनेजुएला नाम से एक राजनीतिक दल शुरू किया।
- 2011 से 2014 तक वे वेनेजुएला की नेशनल असेंबली की सदस्य भी रहीं।
- उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है – कभी हार न मानना।
लोकतंत्र की लौ जलाए रखने वाली
नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने की, जिसकी अध्यक्षता जॉर्जेन वाटने फ्राइडनेस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मारिया मचाडो ने अंधेरे समय में लोकतंत्र की लौ जलाई रखी। वे शांति की समर्थक हैं और सत्तावादी शासन के विरुद्ध लड़ने वाली सबसे साहसी नेताओं में से एक हैं।
कमेटी के मुताबिक मचाडो ने वेनेजुएला के विपक्ष को एकजुट किया और शांतिपूर्ण परिवर्तन का समर्थन करते हुए सैन्यीकरण का खुलकर विरोध किया।
tylenol use in hindi: जानें क्या है acetaminophen, जिसे लेने से ट्रंप ने किया मना
2024 में क्यों नहीं लड़ पाईं राष्ट्रपति चुनाव?
Maria Corina Machado को 2024 में वेनेजुएला के राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने से रोक दिया गया था। हालांकि उन्होंने विपक्षी प्राइमरी में 92% से ज़्यादा वोट हासिल किए थे, मगर सरकार ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया।
इसके बाद उन्होंने एडमंडो गोंजालेज का समर्थन किया, जिन्होंने 70% वोटों के साथ जीत दर्ज की। मगर चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल उठे और विपक्षी दलों को प्रताड़ित किया गया।
ट्रंप ने खुद को बताया था Nobel Prize 2025 का हकदार
डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार सार्वजनिक मंचों पर कहा है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। उनका दावा है कि उन्होंने कि भारत-पाकिस्तान संघर्ष को शांत करने में अहम भूमिका निभाई और मध्य पूर्व में शांति वार्ताओं को आगे बढ़ाया। अपने कार्यकाल के दौरान 7 लंबे युद्धों को समाप्त किया।
donald trump की मेहनत पर फिरा पानी, टैरिफ की वजह से अमेरिका को हो सकता है भारी नुकसान
उन्होंने कहा कि सिर्फ़ सात महीनों में मैंने सात अंतहीन युद्धों को रोका। कुछ तो 30 सालों से भी चल रहे थे। उनके समर्थकों में पाकिस्तान, इज़राइल, थाईलैंड, कंबोडिया जैसे देश भी शामिल थे जिन्होंने नोबेल के लिए ट्रंप का नाम आगे बढ़ाया था।
पिछले 10 वर्षों में किसे मिला Nobel Peace Prize
नोबेल शांति पुरस्कार का इतिहास यह दर्शाता है कि दुनिया भर में शांति, लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाले लोगों और संगठनों को कैसे सम्मानित किया गया है। पिछले एक दशक में ये पुरस्कार उन व्यक्तियों और समूहों को मिला, जिन्होंने अपने साहसिक प्रयासों से वैश्विक बदलाव की दिशा तय की। साल 2015 में यह पुरस्कार ट्यूनिशियाई डायलॉग क्वार्टेट को मिला, जिन्होंने ट्यूनिशिया में बहुलवादी लोकतंत्र की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। 2016 में कोलंबिया के राष्ट्रपति जुआन मैनुअल सैंटोस को कोलंबिया के लंबे गृहयुद्ध को खत्म करने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। 2017 में, ICAN (अंतरराष्ट्रीय परमाणु हथियार उन्मूलन अभियान) को परमाणु हथियारों के खतरों के विरुद्ध जागरूकता फैलाने के लिए यह पुरस्कार मिला।
भारत पर 50% टैरिफ, लेकिन अमेरिका पड़ोसी देशों पर मेहरबान! चीन से लेकर पाकिस्तान तक पर कितना शुल्क
2018 में यह सम्मान कांगो के डॉ. डेनिस मुकवेगे और इराक की नादिया मुराद को यौन हिंसा के विरुद्ध संघर्ष के लिए दिया गया। 2019 में, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली को इथियोपिया और इरिट्रिया के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद को शांति से सुलझाने के प्रयासों के लिए नोबेल से नवाजा गया। 2020 में विश्व खाद्य कार्यक्रम को यह पुरस्कार भूख और संघर्ष-प्रभावित इलाकों में खाद्य सहायता पहुंचाने के लिए दिया गया।
सैलरी से नहीं निकल पा रहे महीने के खर्चे, 6 बेहतरीन साइड इनकम प्लान पर एक नजर
2021 में फिलीपींस की पत्रकार मारिया रेसा और रूस के दिमित्री मुराटोव को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उनके कार्यों के लिए सम्मान मिला। इसके बाद 2022 में बेलारूस के कार्यकर्ता एलेस बियालियात्स्की, रूस के मेमोरियल और यूक्रेन के सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज को मानवाधिकारों और लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए यह पुरस्कार दिया गया। 2023 में यह पुरस्कार ईरान की नरगिस मोहम्मदी को मिला, जिन्होंने स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के लिए अदम्य साहस दिखाया। 2024 में जापान के संगठन निहोन हिडांक्यो को यह पुरस्कार परमाणु हथियारों के विरुद्ध शांति और निरस्त्रीकरण की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए दिया गया।
इन सभी विजेताओं ने अपने साहसी कार्यों से यह सिद्ध किया कि दुनिया को एक बेहतर और शांतिपूर्ण स्थान बनाने के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयासों की कितनी गहरी भूमिका होती है।
New Income Tax Bill हुआ पास, जानें किस समस्या को दूर करने के लिए पुराने वाले को किया खत्म
ट्रंप की प्रतिक्रिया क्या रही?
हालांकि ट्रंप की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, मगर उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वे खफा और हैरान हैं। 2025 में Nobel Peace Prize की रेस में शामिल होना ट्रंप की छवि के लिए अहम माना जा रहा था, खासकर 2024 के अमेरिकी चुनाव हारने के बाद।
FD-RD सब भूल जाएंगे; इस LIC प्लान से जिंदगी भर बरसेगा पैसा, टेंशन होगी खत्म
मचाडो की जीत क्यों मायने रखती है?
आपको बता दें कि Maria Corina Machado की जीत सिर्फ एक पुरस्कार नहीं है। ये उन लाखों वेनेजुएलावासियों के लिए आशा की किरण है जो तानाशाही, आर्थिक संकट और दमन से जूझ रहे हैं।
- उनकी निडरता और दृढ़ता ने विपक्ष को आवाज़ दी।
- उन्होंने न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर लोकतंत्र की मांग उठाई।
- वे एक नई राजनीतिक सोच और साहसी नेतृत्व की प्रतीक बन चुकी हैं।
घर बैठे बनवाएं पैन कार्ड, जानें पूरी ऑनलाइन प्रक्रिया
BREAKING NEWS
The Norwegian Nobel Committee has decided to award the 2025 #NobelPeacePrize to Maria Corina Machado for her tireless work promoting democratic rights for the people of Venezuela and for her struggle to achieve a just and peaceful transition from dictatorship to… pic.twitter.com/Zgth8KNJk9— The Nobel Prize (@NobelPrize) October 10, 2025


Pingback: hamas vs isreal war: इन दो वजहों से गाजा खून खराबे पर चुप हैं अरब देश