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माँगा मौत का सबूत, तो कब्र से कंकाल लेकर बैंक पहुँचा भाई

बैंक और ग्राहकों के बीच भरोसे का रिश्ता होता है। बैंक में अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई और बेशकीमती आभूषण जमा कराकर ग्राहक संतुष्ट रहते हैं। जरूरत पड़ने पर वह कैश या जेवर निकाल लेते हैं। यह प्रक्रिया लंबे समय तक चलती है। इसके बावजूद बैंकों और ग्राहकों के मध्य अक्सर किसी न किसी बात पर टकराव देखने को मिलता रहता है। वैसे सरकारी से ज्यादा निजी बैंकों की कार्यशैली अधिक स्मार्ट व कस्टमर फ्रेंडली होती है। सरकारी बैंकों की शाखाओं में अक्सर विवाद होते रहते हैं।

देश भर में यह मामला बना चर्चा का विषय

ओडिशा के क्योंझर जिले में प्रकाश में आए मामले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इंडियन ओवरसीज बैंक द्वारा प्रायोजित ग्रामीण बैंक की मल्लीपोसी शाखा से जुड़े मामले ने हर किसी को हैरान कर दिया है। मृत बहन के खाते से रकम निकालने के लिए भाई को साक्ष्य के तौर पर कब्र से कंकाल निकाल कर बैंक जाना पड़ा।

सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होने पर बैंक प्रबंधन की खूब छीछालेदर हो रही है। हालांकि बैंक ने स्पष्टीकरण देकर अपना बचाव करने की कोशिश की है। आदिवासी जीतू मुंडा की बहन कलारा मुंडा का खाता ग्रामीण बैंक की ब्रांच में था। कलारा की मौत हो चुकी है। पैसों की जरूरत होने पर भाई जीतू ने बैंक पहुंचकर बहन के खाते से रकम निकालने की गुजारिश की।

कलारा की मौत का कोई ठोस साक्ष्य न होने पर जीतू और बैंक कर्मचारियों के बीच मतभेद हो गए। इसके बाद गुस्से में आकर जीतू सीधे कब्रिस्तान पहुंचा। वहां कब्र को खोदकर वह अपनी बहन का कंकाल निकालकर सीधे बैंक के बाहर पहुंच जाता है। मानव कंकाल को देख बैंक कर्मियों के होश उड़ जाते हैं। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बैंक के आला अफसरों की बेचैनी बढ़ना तय था।

विवाद गहराने पर बैंक ने सफाई दी कि जीतू ने कलारा की मौत से संबंधित कोई कागजी दस्तावेज जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र आदि प्रस्तुत नहीं किया था। जिस कारण रकम का भुगतान संभव नहीं था। फिलहाल स्थानीय प्रशासन को इस प्रकरण में हस्तक्षेप करना पड़ा है। ओडिशा का यह सनसनीखेज मामला इस बात का प्रमाण है कि सरकारी बैंकों में अनपढ़ व्यक्तियों को किसी तरीके से हैंडल किया जाता है।

सरकारी बैंकों की संवेदनहीनता की हद

इंडियन ओवरसीज बैंक की ग्रामीण शाखा में यदि जीतू मुंडा को सही तरीके से हैंडल किया जाता तो संभवत: उसे गुस्से में आकर वह कदम नहीं उठाना पड़ता, जो उसने उठाया। बैंकों में कई बार स्टाफ और ग्राहकों में तनातनी हो जाती है। ग्राहकों को सही नियम कानूनों की सटीक जानकारी नहीं होती। ऐसे में यदि कोई ग्राहक बार-बार एक ही बात कहने लगे तो स्टाफ का मूड उखड़ जाता है। जबकि ग्राहकों के प्रति बैंकों को ज्यादा संवेदनशील होने की आवश्यकता है। मौजूदा दौर में खाताधारकों के साथ धोखाधड़ी के मामले निरंतर सामने आ रहे हैं।

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कई मामले ऐसे होते हैं जब अकाउंट से पैसे कट जाते हैं, मगर ग्राहक के मोबाइल पर रकम निकासी का कोई मैसेज नहीं आता। बाद में बैंक में जाकर शिकायत करने पर स्टाफ सीधे मुंह बात नहीं करता। उलटा ग्राहक की कमियां गिना दी जाती हैं। बैंक के लॉकर से सामान गायब होने के मामलों में भी स्टाफ की लापरवाही सामने आती रही है। कई बार ग्राहक भी आवेश में आकर मर्यादा की लक्ष्मण रेखा को पार कर जाते हैं।

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