ट्रंप और नेतन्याहू का गेम ओवर, दुनिया के दो सबसे ताकतवर नेताओं पर मंडराया ये बड़ा खतरा
वैश्विक सियासत के फलक पर इस वक्त दो सबसे चर्चित और ताकतवर चेहरे अग्निपरीक्षा के दौर से गुजर रहे हैं। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं, जिनकी नीतियों पर अमेरिकी जनता मध्यावधि चुनाव के जरिए अपनी मुहर लगाने जा रही है। दूसरी तरफ इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हैं, जिनकी सत्ता में वापसी का फैसला मतगणना के अंतिम दौर में उलझा हुआ है। दोनों ही नेताओं का राजनीतिक भविष्य न केवल उनके अपने मुल्कों, बल्कि समूचे पश्चिम एशिया और वैश्विक संतुलन की दिशा तय करने वाला साबित होगा।
इजरायल में कांटे की टक्कर: सबसे बड़ी पार्टी बनकर भी बहुमत से दूर नेतन्याहू
इजरायल में हाल ही में संपन्न हुए आम चुनावों की मतगणना अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सामने आ रहे नतीजों और रुझानों के मुताबिक, बेंजामिन नेतन्याहू की अगुवाई वाली पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभर चुकी है, लेकिन जादुई आंकड़े से अब भी दूर है। अपने सहयोगी दलों के साथ मैदान में उतरे नेतन्याहू को पूर्ण बहुमत न मिलने से सरकार गठन की राह पेचीदा हो गई है। ऐसे में देश के कुछ प्रमुख अरब दल किंगमेकर की हैसियत में आ गए हैं। अरब दलों का रुख जिस गठबंधन की ओर झुकेगा, यरूशलम के तख्त पर उसी की ताजपोशी होगी।
मिडिल ईस्ट का रण और ट्रंप-नेतन्याहू की मजबूत जुगलबंदी
गाजा पट्टी में हमास के आतंकी हमलों के बाद से इजरायल ने लगातार आक्रामक रुख अख्तियार किया हुआ है। हमास के बुनियादी ढांचे को तबाह करने और लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह को भारी नुकसान पहुंचाने के बाद इजरायल ने अमेरिका के रणनीतिक समर्थन से ईरान पर भी सीधी सैन्य कार्रवाई की थी। डोनाल्ड ट्रंप हर हाल में नेतन्याहू की सत्ता में दोबारा वापसी देखना चाहते हैं, क्योंकि दोनों के बीच का तालमेल जगजाहिर है। यदि नेतन्याहू की कुर्सी छिनती है, तो वॉशिंगटन को नए नेतृत्व के साथ सामंजस्य बैठाने में कड़ी मशक्कत करनी होगी, जिससे ईरान विरोधी मोर्चे की धार कुंद पड़ सकती है।
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव: ट्रंप की अग्निपरीक्षा और आर्थिक चुनौतियां
उधर, अमेरिका में मध्यावधि चुनाव की घड़ी बेहद नजदीक आ चुकी है, जिसे सीधे तौर पर ट्रंप के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड माना जा रहा है। यदि इन चुनावों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगता है, तो संसद (कांग्रेस) में उन्हें विपक्ष के साथ कड़े समझौते करने पड़ेंगे और मनमाने फैसलों पर ब्रेक लग जाएगा। वर्तमान में अमेरिकी अर्थव्यवस्था भारी दबाव में है; महंगाई दर ने आम अमेरिकी नागरिकों की जेब पर असर डाला है। ईरान के खिलाफ सैन्य गतिविधियों में अमेरिका को अरबों डॉलर का खर्च उठाना पड़ा है। इसके अलावा, ट्रंप के आक्रामक टैरिफ फैसलों के कारण भारत समेत दुनिया के कई अहम मित्र देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों में तल्खी आई है।
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ओबामा की सक्रियता और वैश्विक मंच पर बदलता शक्ति संतुलन
डोनाल्ड ट्रंप की घटती लोकप्रियता और जनता के आक्रोश को भुनाने के लिए पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी रैलियों में उतरकर ट्रंप नीतियों पर सीधे प्रहार कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप और नेतन्याहू की राजनीतिक ताकत कमजोर होती है, तो यह चीन, ईरान और फिलिस्तीन जैसे देशों के लिए रणनीतिक राहत लेकर आएगा। वहीं, अगर ट्रंप मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर नए सैन्य हमलों का जोखिम उठाते हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नई अनिश्चितता खड़ी हो जाएगी। आने वाले कुछ दिन यह साफ कर देंगे कि इन दोनों दिग्गजों का सियासी रसूख कायम रहेगा या वैश्विक राजनीति नई करवट लेगी।

