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सोना 32 से 1 लाख का हुआ! पिछले 6 सालों में 200% की बढ़ोतरी, अगले 5 सालों में इतना महंगा हो जाएगा

इस साल एमसीएक्स पर सोने ने निवेशकों को 30% से ज़्यादा का रिटर्न दिया है (MCX gold investment, gold returns), वही चांदी में भी लगभग 35% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है (silver rise)। इसकी तुलना में, निफ्टी 50 इंडेक्स ने लगभग 4.65% (Nifty 50 returns) और बीएसई सेंसेक्स ने 3.75% (BSE Sensex returns) का रिटर्न दिया है। यानी सोने और चांदी ने अन्य संपत्तियों की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है (gold and silver performance), जिससे निवेशक इनकी ओर आकर्षित हुए हैं।

पिछले छह सालों में एमसीएक्स पर सोने की कीमत 32,000 से बढ़कर 97,800 प्रति 10 ग्राम हो गई है (gold price, gold rise), जो 200% से ज़्यादा की बढ़ोतरी दर्शाता है। इस दौरान सोने ने बाजार में अपना दबदबा साबित किया है (commodity market, financial markets)।

जानें कितना महंगा हो सकता है सोना

कमोडिटी बाजार के जानकारों के अनुसार, आने वाले वक्त में सोना सबसे सुरक्षित संपत्तियों में से एक बना रहेगा (safe investment)। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मंदी के दौर में भी सोना अगले पाँच सालों में कम से कम 40% रिटर्न दे सकता है और अगर तेज़ी आती है, तो ये 125% तक महंगा हो सकता है (gold price forecast, gold future)।

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निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सोने का हमेशा से भावनात्मक और वित्तीय महत्व रहा है (financial importance of gold, investment expert opinion)। हाल के दिनों में ये दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के लिए एक रणनीतिक संपत्ति बन गया है (central bank gold)। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस के विदेशी मुद्रा भंडार के जम जाने के बाद यह रुझान और तेज़ हो गया है (Russia-Ukraine war, currency devaluation, geopolitical tensions, MCX gold investment)।

कई केंद्रीय बैंक अब अपने भंडार में डॉलर की बजाय सोने को तरजीह दे रहे हैं (central bank reserves, share of dollar)। इससे डॉलर की स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं (dollar stability) और मूल्य के भंडार के रूप में सोना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। यही कारण है कि वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता के दौर में लोग सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर आकर्षित हो रहे हैं (global political instability, safe investment, gold demand)।

पिछले छह सालों में सोने ने लगभग 200% रिटर्न दिया है (gold returns)। कोविड-19 महामारी, ढीली मौद्रिक नीतियाँ, भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय बाज़ारों में अनिश्चितता इस वृद्धि के मुख्य कारण हैं (COVID-19 impact, inflation, geopolitical tensions, financial markets)। महामारी के दौरान, अर्थव्यवस्था में भारी मात्रा में धन डाला गया और ब्याज दरें कम की गईं, जिससे मुद्रास्फीति और मुद्रा अवमूल्यन की आशंकाएँ बढ़ गईं (inflation, currency devaluation)।

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रूस-यूक्रेन युद्ध (फ़रवरी 2022), संयुक्त राज्य अमेरिका में बैंकिंग संकट (2023), मध्य पूर्व में तनाव (अक्टूबर 2023), और संयुक्त राज्य अमेरिका में बढ़ते व्यापार युद्ध (2025) जैसे कई भू-राजनीतिक कारकों के कारण सोना नई ऊँचाइयों पर पहुँच गया है (Russia-Ukraine war, banking crisis, trade war, geopolitical tensions)। इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों द्वारा रिकॉर्ड सोने की खरीदारी भी एक महत्वपूर्ण कारण रही है (gold buying, central bank gold, central bank reserves)।

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोना खरीदना जारी रखने के कारण सोने की माँग मज़बूत बनी रहेगी (gold demand, central bank gold)। आज, केंद्रीय बैंक के भंडार में सोने का हिस्सा लगभग 20% तक बढ़ गया है, वही 2001 में डॉलर का हिस्सा 73% था, जो अब घटकर 58% रह गया है (share of dollar, central bank reserves)।

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