25 मार्च से शुरू हुआ रेस्क्यू, 3 अप्रैल को घर वापसी; योगी सरकार ने इजराइल में फंसे अखिलेश की जान ऐसे बचाई
Israel Return: मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश के हजारों परिवारों की बेचैनी इन दिनों बढ़ गई थी, क्योंकि उनके अपने लोग इजराइल में काम कर रहे हैं। करीब 6000 से अधिक मजदूर वहां मौजूद हैं और हर घर में एक ही सवाल गूंज रहा था कि उनके परिजन सुरक्षित हैं या नहीं।
परिवारों में डर, लेकिन आई राहत की खबर
लगातार मिल रही खबरों के बीच एक बड़ी राहत तब मिली जब यह जानकारी सामने आई कि सभी भारतीय श्रमिक सुरक्षित हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और अधिकारियों को लगातार सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस आश्वासन के बाद प्रदेश के हजारों परिवारों ने राहत की सांस ली है।
सरकार और दूतावास के बीच सीधा संपर्क
स्थिति को गंभीरता से लेते हुए योगी सरकार पहले से ही सक्रिय हो गई थी। श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं और वहां से लगातार अपडेट ले रहे हैं। दूतावास की ओर से स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल किसी बड़े खतरे की सूचना नहीं है। यही वजह है कि अभी तक मजदूरों की ओर से वापसी की कोई बड़ी मांग सामने नहीं आई।
जमीनी हालात: नियंत्रण में लेकिन सतर्कता जरूरी
हालांकि युद्ध जारी है, लेकिन वहां से मिली तस्वीरें बताती हैं कि हालात पूरी तरह बेकाबू नहीं हैं। कुछ मजदूरों ने वहां पहुंचे भारतीय पत्रकारों से सामान्य तरीके से मुलाकात भी की। फिर भी खतरे को देखते हुए वैकल्पिक योजना तैयार रखी गई है। जरूरत पड़ने पर जॉर्डन के रास्ते सुरक्षित निकासी का विकल्प मौजूद है।
अखिलेश की कहानी: एक परिवार की उम्मीद की वापसी
इस पूरे घटनाक्रम में अंबेडकर नगर के रहने वाले अखिलेश कुमार की कहानी सबसे ज्यादा भावुक कर देने वाली रही। वे इजराइल के नेटानिया शहर में फंसे हुए थे। चारों तरफ तनाव का माहौल था और हर पल खतरे का अहसास हो रहा था। ऐसे में उनके परिवार ने हार नहीं मानी।
उनकी पत्नी ने प्रशासन से संपर्क किया और मामला तेजी से आगे बढ़ा। जिला स्तर से होते हुए बात लखनऊ पहुंची और फिर उच्च स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई।
मुश्किल हालात में सफल रेस्क्यू ऑपरेशन
25 मार्च 2026 से शुरू हुआ यह रेस्क्यू अभियान आसान नहीं था। हवाई सेवाएं प्रभावित थीं और रास्ते भी सुरक्षित नहीं थे। इसके बावजूद टीम ने प्रयास जारी रखा। अखिलेश को तेल अवीव से जॉर्डन तक पहुंचाया गया। वहां से जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें भारत लाया गया। आखिरकार 3 अप्रैल को वे सुरक्षित अपने घर लौट आए।
पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही तो फौरन करें ये ज़रूरी काम
इस पूरे मामले ने यह दिखाया कि अगर व्यवस्था समय पर सक्रिय हो जाए तो मुश्किल हालात में भी लोगों को सुरक्षित निकाला जा सकता है। सरकार की लगातार निगरानी और तैयारी ने हजारों परिवारों को भरोसा दिया है कि वे अकेले नहीं हैं।

