दफ्तरों के चक्करों से आजादी, जानें योगी सरकार की ‘फैमिली आईडी’ ने कैसे बदली करोड़ों की जिंदगी
उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में इन दिनों एक खामोश लेकिन बेहद असरदार क्रांति चल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘एक परिवार, एक पहचान’ का विजन अब धरातल पर उतर चुका है। जिसे हम फैमिली आईडी के नाम से जान रहे हैं, वह दरअसल केवल 12 अंकों का एक नंबर नहीं, बल्कि प्रदेश के करोड़ों परिवारों के लिए सरकारी सुविधाओं का ‘प्रवेश द्वार’ बन गया है।
क्या है यह नई व्यवस्था
सरल शब्दों में कहें तो जैसे हर व्यक्ति की अपनी एक पहचान होती है, वैसे ही अब उत्तर प्रदेश में हर परिवार की अपनी एक विशिष्ट पहचान होगी। इस 12 अंकों की आईडी में परिवार के हर सदस्य का नाम, आयु और पता दर्ज रहता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब सरकार को पता है कि किस परिवार को किस योजना की जरूरत है।
जानें क्या कहते हैं आंकड़े
इस योजना की पहुंच कितनी व्यापक है, इसे कुछ आंकड़ों से समझा जा सकता है:
- अब तक लगभग 15.70 करोड़ नागरिक इस व्यवस्था से जुड़ चुके हैं।
- करीब 14.70 करोड़ लोगों का डेटा राशन कार्ड के जरिए इस डेटाबेस का हिस्सा बन चुका है।
- 1.03 करोड़ से ज्यादा लोगों ने खुद आगे बढ़कर पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया है।
डिजिलॉकर पर भी यह आईडी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे कागजी दस्तावेजों को साथ लेकर चलने की मजबूरी खत्म हो गई है।
बिचौलियों का खेल खत्म, सीधे खाते में पैसा
पत्रकारिता के नजरिए से देखें तो इस योजना का सबसे क्रांतिकारी पहलू है डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT)। जब फैमिली आईडी को बैंक खातों से जोड़ा गया, तो बीच में पैसा खाने वाले बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई। अब पेंशन, छात्रवृत्ति या किसान सम्मान निधि की राशि बिना किसी रुकावट के सीधे लाभार्थी के हाथ में पहुंच रही है।
फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम
अक्सर देखा जाता था कि रसूखदार लोग फर्जी तरीके से सरकारी योजनाओं का दोहरा लाभ उठा लेते थे। फैमिली आईडी ने इस ‘डुप्लीकेट एंट्री’ वाले सिस्टम को ध्वस्त कर दिया है। अब डेटाबेस में छेड़छाड़ मुमकिन नहीं है, जिससे सरकारी संसाधनों का सही इस्तेमाल हो रहा है और लाभ केवल उन्हें मिल रहा है जो वाकई इसके हकदार हैं।
दफ्तरों के चक्करों से मिलेगी मुक्ति
एक आम आदमी के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि अब उसे जाति, आय या निवास प्रमाण पत्र के लिए अलग-अलग विभागों की चौखट नहीं घिसनी पड़ती। एक बार फैमिली आईडी में पंजीकरण होने के बाद, सारा विवरण सरकारी सिस्टम में दर्ज हो जाता है। राहुल श्रीवास्तव की रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में लोग अब इस ‘वन-स्टॉप सॉल्यूशन’ का लाभ उठा रहे हैं।
न परीक्षा का झंझट न ऑनलाइन आवेदन, घर घर नौकरी देगी सरकार
वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार की कुल 98 योजनाएं इस आईडी से लिंक हैं। इसमें राशन, स्वास्थ्य (आयुष्मान भारत), आवास और कृषि से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। योगी सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि समाज का अंतिम व्यक्ति चाहे वह बुजुर्ग हो, महिला हो या दिव्यांग तकनीक के इस पुल के जरिए मुख्यधारा से जुड़ सके।

