कोहली भी पीछे, चेतेश्वर पुजारा के 5 रिकॉर्ड जो हर फैन को चौंका देंगे
भारतीय टेस्ट क्रिकेट का पर्याय माने जाने वाले चेतेश्वर पुजारा ने 24 अगस्त 2025 को सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया। अपने धैर्य, तकनीक और लंबी पारियों के लिए मशहूर रहे पुजारा ने भारत के लिए 103 टेस्ट खेले और 43.60 की औसत से 7195 रन बनाए। भले ही उन्हें सीमित ओवरों में ज्यादा मौके नहीं मिलेमगर टेस्ट क्रिकेट में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। उनके बल्ले से कई ऐसे रिकॉर्ड निकले जो आने वाले वर्षों तक भारतीय क्रिकेट को प्रेरित करते रहेंगे। आइए जानें उनके 5 खास रिकॉर्ड (Cheteshwar Pujara Record) जिन्होंने उन्हें अलग पहचान दी।
पहला रिकॉर्ड (Cheteshwar Pujara Record)
पुजारा का धैर्य उनका सबसे बड़ा हथियार था। 16 मार्च 2017 को रांची में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने 525 गेंदों (Most balls faced in Test innings by Indian) का सामना किया और क्रीज पर 672 मिनट तक डटे रहे। यह किसी भी भारतीय बल्लेबाज द्वारा एक पारी में खेले गए सर्वाधिक गेंदों का रिकॉर्ड है। उनके बाद राहुल द्रविड़ का नाम आता है, जिन्होंने 495 गेंदों का सामना किया था।
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दूसरा रिकॉर्ड
पुजारा ने अपने करियर में 18 दोहरे शतक जमाए, जो भारत की ओर से सबसे ज्यादा हैं। पूरी दुनिया की सूची में भी वह चौथे स्थान पर हैं। इस लिस्ट में महान डॉन ब्रैडमैन शीर्ष पर हैं, जिनके नाम 37 दोहरे शतक दर्ज हैं।
तीसरा रिकॉर्ड
टीम इंडिया की जीत में पुजारा का योगदान बेहद अहम रहा। उन्होंने भारत की जीत वाली टेस्ट पारियों में 36 बार 50 या उससे अधिक का स्कोर बनाया। इस मामले में वह विराट कोहली (30) से आगे निकलते हैं। सूची में सचिन तेंदुलकर 44 बार के साथ पहले और राहुल द्रविड़ 38 बार के साथ दूसरे नंबर पर हैं।
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चौथा रिकॉर्ड
2017 में श्रीलंका के खिलाफ पुजारा ने ऐसा दुर्लभ कारनामा किया। उन्होंने मैच के सभी पांचों दिन बल्लेबाजी की। पिछले 40 साल में ऐसा करने वाले वह अकेले भारतीय रहे। कुल मिलाकर क्रिकेट इतिहास में सिर्फ 13 बल्लेबाजों ने ही यह उपलब्धि हासिल की है।
पांचवा रिकॉर्ड
पुजारा का बल्ला दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया (यानी SENA देशों) में भी भारत के लिए ढाल साबित हुआ। वह ऐसी 11 भारतीय जीत का हिस्सा रहे, जो इन कठिन परिस्थितियों में दर्ज की गईं। इस मामले में वो विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे, ऋषभ पंत, केएल राहुल और जसप्रीत बुमराह से भी आगे हैं, जो 10-10 बार विजयी टीम का हिस्सा बने।


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