टेस्ट की एक पारी में सबसे ज्यादा गेंद खेलने वाले 5 भारतीय बल्लेबाज़, लिस्ट में पुजारा भी
टेस्ट क्रिकेट (Test cricket records) की खूबसूरती सिर्फ चौकों और छक्कों में नहीं बल्कि उस धैर्य में छिपी होती है जिसकी मिसाल कुछ भारतीय बल्लेबाजों ने बार‑बार पेश की है। जब कोई बल्लेबाज घंटों तक मैदान पर टिककर टीम को मजबूती देता है, तो उसका नाम क्रिकेट की सुनहरी यादों में दर्ज हो जाता है।
आइए जानते हैं उन भारतीय बल्लेबाजों के बारे में जिन्होंने एक पारी में सबसे ज़्यादा गेंदों (Most Balls Faced by an Indian in a Test Innings) का सामना करके इतिहास रचा।
चेतेश्वर पुजारा – अटूट दीवार
मार्च 2017 में रांची टेस्ट के दौरान पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध ऐसी पारी खेली जिसे आज भी क्रिकेट प्रेमी याद करते हैं। उन्होंने 668 मिनट तक विकेट पर टिकते हुए 202 रन बनाए और इस दौरान 525 गेंदें (Most Balls Faced by an Indian in a Test Innings) खेलीं। वह अब तक के पहले और इकलौते भारतीय बल्लेबाज हैं जिन्होंने किसी एक पारी में 500 से ज्यादा गेंदों का सामना किया।
ये भी पढ़ें- कोहली भी पीछे, चेतेश्वर पुजारा के 5 रिकॉर्ड जो हर फैन को चौंका देंगे
राहुल द्रविड़ – मिस्टर डिपेंडेबल
इस सूची में दूसरा नाम आता है राहुल द्रविड़ का। 2004 में रावलपिंडी में पाकिस्तान के विरुद्ध उन्होंने अपनी क्लासिक तकनीक से 740 मिनट बल्लेबाजी की। द्रविड़ ने 495 गेंदों का सामना करते हुए 270 रनों की पारी खेली, जिसमें 34 चौके और एक छक्का शामिल था। उनकी यह पारी भारतीय क्रिकेट की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है।
नवजोत सिंह सिद्धू – Test cricket records
1997 में पोर्ट ऑफ स्पेन में हुए टेस्ट मैच के दौरान सिद्धू ने अपनी करियर की सबसे शानदार पारी खेली। उन्होंने 491 गेंदों पर 211 रन बनाए और इसमें 19 चौके व एक छक्का शामिल रहा। 673 मिनट तक क्रीज पर टिके रहकर उन्होंने टीम को मजबूती दी और अपनी ‘सहार कर देने वाली’ बल्लेबाजी से दर्शकों का दिल जीता।
ये भी पढ़ें- भारत की Asia Cup 2025 टीम से बाहर हुए IPL में दमदार प्रदर्शन करने वाले ये तीन खिलाड़ी
रवि शास्त्री – ठोस और संयमी
1992 के सिडनी टेस्ट में रवि शास्त्री ने दिखाया कि लंबी पारी खेलने के लिए धैर्य और तकनीक कितनी अहम होती है। उन्होंने 477 गेंदें खेलते हुए 206 रन बनाए, जिसमें 17 चौके और 2 छक्के शामिल थे। इस दौरान 477 मिनट तक उन्होंने क्रीज़ नहीं छोड़ी और टीम को मजबूती दी।
सुनील गावस्कर – लिटिल मास्टर की क्लास
1981 में बैंगलोर में इंग्लैंड के विरुद्ध खेले गए टेस्ट में गावस्कर ने अपनी पारंपरिक रक्षात्मक शैली से धैर्य की मिसाल पेश की। उन्होंने 708 मिनट टिककर 472 गेंदों में 172 रन बनाए, जिसमें 19 चौके शामिल थे। यह पारी उस जमाने में भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ बनने वाली गिनी जाती है।
द्रविड़ भी दिखा चुके हैं कमाल
2002 में द्रविड़ ने लंदन के ओवल मैदान पर एक बार फिर अपने धैर्य और तकनीक का कमाल दिखाया। उन्होंने 629 मिनट तक बल्लेबाजी करते हुए 468 गेंदों पर 217 रन बनाए और 28 चौकों से गेंदबाजों की लय बिगाड़ दी।


Pingback: Awards won by dhyan chand- जानें उनकी चार ऐतिहासिक उपलब्धियां