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इलेक्शन से पहले कांग्रेस के नेता नसीमुद्दीन का इस्तीफा, वजह जानिए

Naseemuddin Siddiqui Resignation: यूपी की सियासत में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। शनिवार दोपहर उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भेज दिया। इस पत्र में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और यूपी प्रभारी अविनाश पांडे को संबोधित किया गया है।

कांग्रेस के लिए तगड़ा झटका

ये इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्य में अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इस कदम से पार्टी को एक बड़ा राजनीतिक नुकसान हुआ है, क्योंकि सिद्दीकी का प्रभाव पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में काफी गहरा था। उनकी कड़ी मेहनत और अल्पसंख्यक समुदाय में पकड़ को कांग्रेस के लिए एक मजबूत सियासी आधार माना जाता था। विधानसभा चुनाव (UP Election 2027) से लगभग एक साल पहले उनका पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए कठिन दौर की शुरुआत हो सकता है।

इस्तीफे की वजह जानिए

सिद्दीकी ने अपने इस्तीफे में स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी नेता से कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं जताई है। उनका कहना था कि उन्हें कांग्रेस में पिछले 8 वर्षों से ‘जमीन से जुड़ा’ काम नहीं दिया गया। वे खुद को संगठन के भीतर हाशिए पर महसूस कर रहे थे। इस्तीफा देते समय सिद्दीकी ने कहा, “मैं कभी भी हाई प्रोफाइल नेता नहीं रहा। मैं हमेशा से जमीन पर काम करने वाला आदमी हूं, मगर बीते आठ सालों से मुझे इस स्तर पर कोई काम नहीं मिला।”

सिद्दीकी ने यह भी कहा कि उन्हें उच्च पदों पर बैठाए जाने से कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुझे पार्टी द्वारा मीडिया चेयरमैन बनाने या कमेटी का सदस्य बनाने से कोई फर्क नहीं पड़ा। मुझे हमेशा से जमीन पर काम करने का अवसर चाहिए था, जो मुझे नहीं मिला।

कांग्रेस के नेताओं की प्रतिक्रिया

नसीमुद्दीन सिद्दीकी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय अब सिद्दीकी से मुलाकात कर उन्हें इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाने का प्रयास करेंगे। इस दौरान पार्टी के नेताओं ने सिद्दीकी के इस्तीफे को एक बड़े सियासी नुकसान के रूप में देखा है, खासकर क्योंकि उनका प्रभाव संगठन के लिए बहुत मायने रखता था।

क्या होगा आगे?

दिग्गज नेता सिद्दीकी का कांग्रेस से जाना न केवल पार्टी के लिए एक बड़ी सियासी चुनौती हो सकती है, बल्कि इससे अल्पसंख्यक वोट बैंक और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के प्रभाव पर भी असर पड़ सकता है। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के लिए यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या पार्टी भविष्य में इस संकट से उबर पाएगी या उसे और नेताओं का भी नुकसान होगा।

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नसीमुद्दीन सिद्दीकी के इस्तीफे को केवल एक व्यक्ति की नाराजगी के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह कांग्रेस पार्टी के भीतर एक बड़ा संगठनात्मक संकट और नेतृत्व के प्रभाव को लेकर सवाल उठाता है। अगर कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में अपनी सियासी जमीन फिर से मजबूत करनी है, तो उसे अपनी रणनीतियों और नेतृत्व की कार्यशैली में गंभीर बदलाव करने होंगे।

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