एक फरवरी से बदलेगा जमीन रजिस्ट्री का नियम, नई व्यवस्था से आम लोगों को होगा बड़ा फायदा
Rule Change From February 2026: एक फरवरी से भारत में जमीन की खरीद-फरोख्त के लिए एक नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। अब रजिस्ट्री के समय आधार सत्यापन अनिवार्य होगा, जिससे रियल एस्टेट क्षेत्र में धोखाधड़ी की संभावना बहुत कम हो जाएगी। इससे न केवल सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी बल्कि आम नागरिकों के लिए ये एक सुरक्षा कवच के रूप में काम करेगा।
जानें क्या होगा बदलाव
अब से रजिस्ट्री के दौरान न केवल खरीदार और विक्रेता के आधार नंबर का सत्यापन किया जाएगा बल्कि गवाहों के आधार नंबर भी जांचे जाएंगे। इससे एक ओर जहां बोगस गवाहों के खेल पर लगाम लगेगी, वहीं धोखाधड़ी से बचाव होगा। उपनिबंधक कार्यालयों में बायोमेट्रिक मशीनें लगाई गई हैं, जिससे खरीदार और विक्रेता की पहचान तुरंत यूआईडीएआई के सर्वर से मिलाई जा सकेगी। यदि सभी जानकारी सही पाई जाती है, तो रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह कदम भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी से निपटने की दिशा में अहम साबित होगा।
फर्जी दस्तावेजों का होगा खात्मा
हाल तक रजिस्ट्री प्रक्रिया में सिर्फ आधार कार्ड की फोटोकॉपी से काम चल जाता था। इससे फर्जी आधार कार्ड के जरिए दूसरों की संपत्ति बेचने का खतरा बना रहता था। अब इस नई व्यवस्था से ऐसे मामले पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे। जिले के तीन प्रमुख तहसीलों – सदर, बिसलपुर और पूनपुर में हर महीने सैकड़ों बेनामे होते हैं। इस नई प्रणाली के लागू होने से इन प्रकरणों में सख्ती आएगी और फर्जीवाड़े की गुंजाइश न के बराबर हो जाएगी।
सुरक्षा में होगा सुधार
इस नई व्यवस्था में सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त कदम उठाए गए हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति के अंगूठे के निशान धुंधले हैं या पहचान में कोई समस्या आ रही है, तो फेस ऑथेंटिकेशन यानी चेहरे की पहचान का विकल्प भी दिया जाएगा। इसके साथ ही, विशेष मामलों में आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजकर भी सत्यापन किया जा सकेगा। इस प्रणाली को लागू करने से गवाहों की पहचान को लेकर होने वाली समस्याएं भी हल हो जाएंगी। पहले गवाहों के बारे में कई बार सवाल उठते थे, मगर अब उनके आधार नंबर से सत्यापन किया जाएगा, जिससे भविष्य में कानूनी विवादों से बचा जा सकेगा।
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इस व्यवस्था से रियल एस्टेट में निवेश करने वाले आम नागरिकों के लिए यह एक बड़ी राहत साबित होगी। अब कोई भी व्यक्ति बेनामी संपत्तियों के रजिस्ट्री से बच सकेगा और धोखाधड़ी के मामले में कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही गवाहों की पहचान की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, जिससे किसी भी विवादित संपत्ति के मामले में गवाह अपना पक्ष नहीं बदल सकेंगे।
भूमाफियाओं का खेल होगा खत्म
इस नए कदम का असर न केवल भूमाफियाओं पर पड़ेगा बल्कि ये रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश करने वाले हर नागरिक को सुरक्षा प्रदान करेगा। जहां पहले जमीन की बिक्री में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी होती थी। वहीं अब आधार सत्यापन की प्रक्रिया से ऐसे मामलों में बड़ी कमी आएगी। सरकार की इस पहल से अब जमीन की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, जिससे आम जनता का विश्वास इस सेक्टर पर बढ़ेगा।

