वर्ल्डहोम

जयशंकर का ‘दलाल’ वाला वार, पाकिस्तान में हाहाकार! क्यों बौखलाए शहबाज के मंत्री

S Jaishankar Statement: दो पक्षों के आपसी विवाद में गाली-गलौज, मारपीट एवं भुगत लेने की धमकी देना आम बात होती है। ऐसे में यदि कोई पक्ष आवेश में आकर दूसरे को ‘दलाल’ बोल दे तो विवाद गहराने में देर नहीं लगती।

भारत में गली-मोहल्लों में आपस की लड़ाई में एक-दूसरे के खिलाफ ‘दलाल’ शब्द का इस्तेमाल करना नई बात नहीं है, मगर यह तीखा शब्द अचानक भारत और पाकिस्तान के बीच बवाल का नया कारण बन गया है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की एक टिप्पणी ने पाकिस्तान के दिग्गजों को बेचैन कर दिया है। इसके बाद सीमा पार से जुबानी हमले एकाएक तेज हो गए हैं।

जयशंकर के बयान से पाक को लगी मिर्ची

क्या राजनेता, क्या बिजनेसमैन और क्या पत्रकार, सभी एक साथ भारतीय विदेश मंत्री की टिप्पणी पर बरस पड़े हैं। सीमा पार से जारी यह जुबानी जंग कहां जाकर थमेगी, कोई नहीं जानता। दरअसल विदेश मंत्री जयशंकर ने ईरान युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्थता की रिपोर्ट्स पर कहा था कि भारत वैश्विक भू-राजनीति में दलाल राष्ट्र की तरह काम नहीं कर सकता। उनके इस बयान से पाकिस्तान को मिर्ची लग गई है।

इस मसले पर पाक के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, राष्ट्रपति आसिफ अली के प्रवक्ता मुर्तजा सोलांगी, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार, पीएम शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा एहसान अफजल खान व पत्रकार अस्मा शिराजी की कुंठा सामने आ चुकी है। पड़ोसी मुल्क के ये दिग्गज एस. जयशंकर को विदेशी कूटनीति का पाठ पढ़ाने पर उतर आए हैं। असल में पाकिस्तान इन दिनों अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रूकवाने के लिए मध्यस्थता करने को उतावला नजर आ रहा है। पाकिस्तान के अलावा तुर्की व एक अन्य मुल्क भी इस लाइन में लगा है।

पाकिस्तान चाहता है कि शांति वार्ता का आयोजन इस्लामाबाद में हो। जहां दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करें। मध्यस्थता के नाम पर वह दुनिया भर में अपनी कूटनीति और अमेरिका एवं ईरान के साथ दोस्ताना संबंधों का ढोल पीट रहा है। हालांकि ईरान के रणनीतिकारों को पाकिस्तान पर कतई भरोसा नहीं है। चूंकि वह जानता है कि इस्लामाबाद पर आंख मूंदकर विश्वास करना अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। वह कब थाली के बैंगन की भांति लुढ़क जाएगा, कोई नहीं जानता।

पाकिस्तान ने दलाली के जरिए कमाए करोड़ों

युद्ध में मध्यस्थता के नाम पर पाकिस्तान पहले भी अपनी जेब गरम करता रहा है। सच्चाई किसी से छिपी नहीं है। जिन्ना का मुल्क लंबे समय से ऐसी ‘दलाली’ करता आया है। चाहे वह रूस-अफगानिस्तान युद्ध हो, या अमेरिका-तालिबान युद्ध। उसने पूर्व में दलाली से करोड़ों डॉलर कमाए हैं। ईरान-अमेरिका युद्ध से भी उसकी योजना डॉलर कमाने की ही है।

खासकर जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उस पर मेहरबान हैं तो उसकी उम्मीदें काफी ज्यादा बढ़ी हुई हैं। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख पिछले कुछ समय से ट्रंप से नजदीकी बढ़ाने में कामयाब रहे हैं। यह बात भारत को अखरती रही है। विदेश मंत्री जयशंकर ने पाकिस्तान को सिर्फ आईना दिखाया है। अपनी असलियत को सुनकर वह तिलमिला उठा है।

ईरान से पंगा लेने का अंजाम, गढ़ में बुरी तरह हारे ट्रंप

इसके इतर मिडिल ईस्ट में जिस प्रकार के हालात कायम हैं, उससे नहीं लगता कि मामला आसानी से हल हो जाएगा। यूक्रेन ने अचानक रूस पर हमले तेज कर दुनिया को चौंका दिया है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के मध्य एक बार फिर तनाव बढ़ने लगा है। ईरान को अमेरिका ने पांच दिन की डेडलाइन दे रखी है। यह डेडलाइन पूरी होने के उपरांत यदि बात नहीं बनी तो कोई बड़ा कदम यूएस उठा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *