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घोसी का नया ‘किंगमेकर’! अखिलेश का टिकट इस अनजान शख्स को, क्यों? पूरा प्लान जानें

सपा विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद खाली हुई घोसी विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं और इसके लिए समाजवादी पार्टी ने तैयारी कर ली है। मगर भाजपा के सामने दोहरी चुनौती है। कहा तो यह भी जा रहा है कि अखिलेश यादव ने बी.जे.पी. को एक ऐसे चक्रव्यूह में फंसा दिया है जिससे निकल पाना भाजपा के लिए मुश्किल हो सकता है।

दरअसल घोसी सीट पर उपचुनाव के लिए सपा की तरफ से स्वर्गीय सुधाकर सिंह के छोटे बेटे सुजीत सिंह को टिकट दिए जाने की संभावना है। वो सियासत में लंबे समय से सक्रिय भी हैं। इस सीट से दो बार ब्लॉक प्रमुख भी रह चुके हैं। कहा जा रहा है कि आने वाले उपचुनाव में सपा सुजीत सिंह पर दांव लगा सकती है। मगर मुश्किल भाजपा के सामने है क्योंकि भाजपा के पास इस सीट पर सपा की टक्कर का कोई प्रत्याशी मौजूद नहीं है।

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हालांकि चर्चा में नाम विजय राजभर का भी है जिन्होंने 2019 में हुए उपचुनाव में जीत दर्ज की थी। इससे इस सीट पर राजभर समाज को प्रभावित करने की कोशिश भाजपा करेगी। मगर भाजपा के लिए दिक्कत वाली बात ये भी है कि भाजपा के सहयोगी दलों में शामिल ओपी राजभर भी इस सीट पर अपना कैंडिडेट उतारने की ज़िद पर अड़ सकते हैं। या फिर भाजपा से अलग होकर या यह कह लीजिए कि अपने कैंडिडेट को सिंबल देकर चुनाव में उतार सकते हैं।

जानें इस सीट पर किस जाति का प्रभाव

भाजपा के सामने उसके सहयोगी दल सुभषपा की ओर से पेच फंसाया जा सकता है। और इसके पीछे का बड़ा कारण यह भी है क्योंकि लोकसभा चुनावों में राजभर के बेटे चुनाव हार गए थे। जानकारों की मानें तो राजभर बेटे को विधायक बनाने के लिए इस सीट पर दावा कर सकते हैं और वैसे भी इस सीट पर राजभर वोटर भी निर्णायक भूमिका में है। जातीय समीकरणों पर बात करें तो इस सीट पर सबसे ज्यादा मुस्लिम वोट बैंक है मगर साथ ही दलित यादव राजभर चौहान का भी इस सीट पर प्रभाव है।

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वहीं इस सीट पर होने वाले उपचुनाव के बाद घोसी विधानसभा के नाम पर एक और रिकॉर्ड दर्ज हो जाएगा क्योंकि इस सीट पर एक ही टर्म में दो बार उपचुनाव होगा। दरअसल घोसी में 2022 के चुनावों में सपा के सिंबल पर दारा सिंह चौहान जीते। मगर उनके पाला बदलने की वजह से इस सीट से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। 2023 में एक बार फिर इस सीट पर उपचुनाव हुआ जिसमें सपा से सुधाकर सिंह जीते। अब सुधाकर सिंह के निधन के चलते फिर यहां एक बार उपचुनाव होगा।

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उपचुनाव होने के साथ-साथ सभी पार्टियों के लिए एक सेमीफाइनल वाला मुकाबला भी हो जाएगा कि विधानसभा चुनावों में किसकी कितनी तैयारी है। सपा विधायक सुधाकर सिंह के छोटे बेटे को टिकट दिए जाने के पीछे सपा की एक खास रणनीति यह भी है कि सुधाकर सिंह लोगों के बीच काफी फेमस और लोकप्रिय थे। वह अखाड़े के मंझे खिलाड़ी होने के साथ-साथ मुलायम सिंह यादव के करीबी थे और अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते थे। आम लोगों की दिक्कत परेशानियों को सुनकर वह सीधे अधिकारियों तक से भिड़ जाते थे। इस वजह से लोग उनको पसंद भी करते थे और अब उनके राजनीतिक वारस के रूप में उनके छोटे बेटे को भी लोग उसी निगाह से देख रहे हैं।

बताते चलें कि सुधाकर सिंह की पत्नी टीचर हैं। बड़ा बेटा कारोबार संभाल रहा है और छोटा बेटा राजनीति में सक्रिय है और अब समाजवादी पार्टी की तरफ से खासतौर पर मुखिया अखिलेश यादव की तरफ से सुधाकर सिंह के छोटे बेटे सुजीत सिंह पर दाव लगाने की तैयारी है। इससे जो है समाजवादी पार्टी तमाम जातीय समीकरण भी साध सकेगी और साथ ही लोगों की सहानुभूति भी समाजवादी पार्टी को मिल सकती है। फिलहाल देखना होगा कि गोसी में जब उपचुनाव होता है तो यूपी की तस्वीर क्या निकल कर सामने आती है।

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