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योगी का रास्ता अपनाएंगे अखिलेश; जिस जहां से डरते थे नेता, वहीं से शुरू होगा चुनावी शंखनाद

UP Politics 2026: उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव में लगभग एक साल का वक्त बाकी है, मगर राजनीति में हलचल तेज हो चुकी है। राज्य के नेताओं के बीच सियासी बयानबाजी और रणनीतिक फैसले अब अपनी धार तेज कर चुके हैं। 2027 के चुनाव से पहले पार्टियां अपनी-अपनी बिसात बिछाने में जुट गई हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है: इस बार वह अपनी चुनावी यात्रा की शुरुआत राम नवमी के दिन नोएडा से करने जा रहे हैं।

नोएडा से क्यों शुरू हो रही है अखिलेश यादव की रैली

अखिलेश यादव का यह कदम कई मायनों में खास माना जा रहा है। नोएडा से प्रचार की शुरुआत को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक लंबे समय से यह मिथक बना हुआ है कि जो भी मुख्यमंत्री या नेता नोएडा से अपनी चुनावी यात्रा की शुरुआत करता है, उसे सत्ता में आने के छह महीने के भीतर परेशानी का सामना करना पड़ता है। यही कारण रहा कि अपने पहले कार्यकाल में अखिलेश यादव ने कभी नोएडा का रुख नहीं किया था। इसके अलावा, 2017 और 2022 में भी उन्होंने अपनी चुनावी यात्रा की शुरुआत अन्य जिलों से की थी, मगर सत्ता पर काबिज नहीं हो सके।

योगी आदित्यनाथ ने तोड़ा मिथक

यहां पर एक दिलचस्प तथ्य यह है कि योगी आदित्यनाथ ने इस मिथक को तोड़ा था। उन्होंने नोएडा से प्रचार की शुरुआत की और इसके बाद मुख्यमंत्री बनने में सफल रहे। हालांकि, सपा के लिए यह एक नई चुनौती और अवसर भी हो सकता है। 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने अपनी प्रसिद्ध साइकिल यात्रा की शुरुआत गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) से की थी, और उस वर्ष सपा ने चुनाव में शानदार जीत हासिल की थी। इसी संदर्भ में अब पार्टी इस बार भी नोएडा से अभियान शुरू करने को शुभ संकेत मान रही है।

सपा की राजनीतिक रणनीति और हिंदुत्व का संदेश

अखिलेश यादव की यह चुनावी रैली कुछ नई राजनीति के संकेत भी दे रही है। राम नवमी जैसे धार्मिक दिन पर प्रचार की शुरुआत सपा की सॉफ्ट हिंदुत्व राजनीति को सामने ला रही है, जो भाजपा और अन्य हिंदूवादी दलों के प्रभाव को चुनौती देती है। यही कारण है कि इस रैली को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सपा प्रवक्ता मनोज काका ने इसे शुभ साबित होने का दावा करते हुए कहा कि 2012 की तरह ही यह यात्रा पार्टी के लिए सफलता लेकर आएगी।

भाजपा की प्रतिक्रिया भी आई सामने

इस फैसले पर भाजपा के नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता मनीष शुक्ला का कहना है कि अगर सपा नोएडा से अपनी चुनावी यात्रा शुरू कर रही है तो उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा को धन्यवाद देना चाहिए। वहीं, भाजपा के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने दावा किया कि 2027 में भी सपा हार का सामना करेगी क्योंकि पार्टी का ध्यान सिर्फ एक परिवार तक सीमित है और जनता अब समझदार हो चुकी है।

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इस समय उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा और भाजपा के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। अखिलेश यादव का नोएडा से अभियान शुरू करना सपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक कदम हो सकता है, मगर क्या यह सपा को सत्ता दिला पाएगा या यह भी एक मिथक की तरह साबित होगा, यह देखना बाकी है। समय के साथ ही इसका उत्तर मिलेगा, मगर एक बात साफ है कि अखिलेश यादव का यह कदम राजनीतिक चर्चाओं को एक नया मोड़ दे रहा है और आने वाले चुनावों की दिशा पर असर डाल सकता है।

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