Panchayat Elections में कांग्रेस नहीं लेगी गठबंधन का सहारा, जीत के लिए बनाई ये रणनीति
उप्र की सियासत (UP Politics) में गंगा-जमुनी तहज़ीब की तरह एक समय कांग्रेस (Uttar Pradesh Congress) की गूंज हर गली-मोहल्ले में सुनाई देती थी। मगर बीते लगभग पचास वर्षों से वो सत्ता की देहरी पर दस्तक देने के बावजूद दरवाज़ा नहीं खोल सकी। इस लंबे राजनीतिक वनवास से उबरने के लिए वो अब तक जिन गठबंधन रूपी बैसाखियों पर टिकी थी, उनसे वो स्वयं को धीरे-धीरे मुक्त करने की तैयारी में है।
एक नई राजनीतिक सरगर्मी के संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस ने आगामी उप्र पंचायत चुनावों (Panchayat Elections) में अपने बलबूते मैदान में उतरने का संकल्प लिया है। यह निर्णय केवल एक चुनावी चाल नहीं बल्कि अपने खोए हुए जनाधार को पुनः पाने का आत्मविश्वास भरा ऐलान है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस अकेले लड़ेगी, तो उसे अपनी वास्तविक ज़मीन और जनसंपर्क की ताकत का अंदाज़ा हो सकेगा और ये आत्ममूल्यांकन 2027 के विधानसभा चुनाव की दिशा तय करेगा।
ज़िला संगठनों से बदले की बुनियाद
कांग्रेस के ज़मीनी ढांचे में हलचल शुरू हो चुकी है। जिला संगठनों को स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं जो कार्यकर्ता पंचायत चुनावों (Panchayat Elections) में दमखम दिखाएगा। वही 2027 के विधानसभा चुनावों में टिकट (ticket distribution) की कतार में सबसे आगे खड़ा होगा। पार्टी अब ‘सिफारिश’ की रजिस्ट्री को एक तरफ रख, जुझारूपन, कर्मठता और वास्तविक जनाधार को टिकट देने का पैमाना बना रही है।
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यह किसी नाटक का मंच नहीं, जहां पात्र पहले से तय हों यह एक खुली प्रतिस्पर्धा है, जहां हर वर्कर अपनी मेहनत से किरदार गढ़ेगा और पार्टी के भविष्य की पटकथा लिखेगा।
अजय राय की बैठक: रणनीति के सूत्र
पिछले सप्ताह लखनऊ में आयोजित बैठक में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने प्रदेश के प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया। यह कोई औपचारिक मिलन नहीं, बल्कि एक वैचारिक युद्धघोष था जिसमें 2026 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों (Panchayat Elections) और 2027 की विधानसभा रणनीति (political strategy) की रूपरेखा तैयार की गई।
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बैठक में दो बातें विशेष रूप से दोहराई गईं कि पंचायत चुनावों (Panchayat Elections) अकेले लड़ना हैं, बिना किसी गठबंधन की लाठी के सहारे। प्रदर्शन ही पहचान बनेगा जो ज़मीन पर दिखेगा, वही ऊपर उठेगा।
हर सीट पर कांग्रेस का झंडा
लखनऊ से कार्यकर्ताओं को संदेश भेजा गया है कि अबकी बार पंचायत से विधानसभा तक की यात्रा खुद तय करनी है। पार्टी अब सभी 403 विधानसभा सीटों पर जमीनी नेटवर्क खड़ा करने की तैयारी में है। चाहे गठबंधन हो या न हो कांग्रेस की कोशिश यह है कि हर सीट पर एक संगठित, मज़बूत और जनसमर्थित टीम तैनात की जाए।
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प्रदेश पदाधिकारी का कहना है कि 2027 में कम से कम 50 सीटों पर जीत पार्टी का लक्ष्य है एक ऐसा आंकड़ा जो सत्ता की देहरी को फिर से छू सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के तहत कांग्रेस को ज़मीनी समर्थन मिला था, जिससे पार्टी का मनोबल फिर से ऊँचा हुआ है।
बूथ से विधान तक: पाँच स्तरीय नेटवर्क
कांग्रेस अब एक नींव से शिखर तक की लड़ाई की तैयारी में है। पंचायत से लेकर बूथ स्तर तक पाँच स्तरीय नेटवर्क खड़ा करने की योजना बन रही है। मेरठ के पार्टी प्रवक्ता हरिकिशन अंबेडकर ने कहा कि पार्टी अब पूरी तरह चुनावी मोड में है। पंचायत चुनावों (Panchayat Elections) कोई साधारण आयोजन नहीं बल्कि 2027 की नींव की पहली ईंट है।


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