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UP वाला ‘क्रेज’ अब बिहार में, अखिलेश यादव की रैलियों में जनता ने तोड़ दिए सारे रिकॉर्ड

Bihar Polling 2025: राष्ट्रीय राजनीति में इन दिनों बिहार विधानसभा चुनाव की चर्चा ज़ोरों पर है। इस चुनावी समर में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव के साथ महागठबंधन के प्रत्याशियों के लिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी पूरी ताक़त झोंक दी। उनका तूफानी प्रचार अभियान बिहार में एक नया ही रंग दिखाता दिखा। लेकिन प्रचार के दौरान जो तस्वीरें सामने आईं वे सिर्फ़ चुनावी सभाओं की नहीं जनता के जुनून की कहानी कह रही हैं। आज हम इन्हीं तस्वीरों पर विस्तार से बात करेंगे कि आख़िर अखिलेश यादव की रैलियों में कैसा माहौल देखने को मिला।

भीड़ का असीम उत्साह

ज़रा पहली तस्वीर पर ग़ौर फ़रमाइए। एक तरफ़ अखिलेश यादव का हेलीकॉप्टर है और उनके क़रीबी लोग नज़र आ रहे हैं। मगर असली कहानी तो घेरे के बाहर है। जहाँ लोगों का एक विशाल हुजूम अपने नेता की एक झलक पाने को बेताब खड़ा है। यह भीड़ बताती है कि अखिलेश यादव के प्रति उत्सुकता सिर्फ़ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है।

एक और चौंकाने वाली तस्वीर में देखिए एक युवक बिजली के खंभे पर चढ़ा हुआ है। उसके चारों तरफ उड़ती धूल और नीचे खड़ी अनगिनत जनता। आप बस यही अंदाज़ा लगा सकते हैं कि आख़िर कितने लोग वहाँ उन्हें देखने सुनने पहुँचे हैं। जनसैलाब को देखकर यह गिनती करना मुश्किल हो जाता है।

बांस-बल्लियों पर चढ़कर देखा नेता को

रैली स्थल पर साउंड सिस्टम लगाने के लिए जो बांस-बल्लियां लगाई गईं लोग उन पर भी चढ़कर बैठ गए। आसपास के घरों की छतें और दीवारें भी दर्शकों से पट गईं। लोग दूर से ही उत्सुकता के माहौल में अपने पसंदीदा नेता को देखने और सुनने के लिए पहुँचे। इन दृश्यों में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस दोनों के झंडे साफ़ दिखाई देते हैं जो महागठबंधन की एकजुटता और अखिलेश यादव की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है।

Bihar Polling 2025
Bihar Polling 2025

एक तस्वीर में अखिलेश यादव स्वयं लालटेन पकड़े खड़े हैं। उनके आसपास जो युवा वर्ग दिखाई दे रहा है वह ख़ासतौर पर सबसे ज़्यादा उत्साहित है। ठीक वैसे ही जैसे तेजस्वी यादव की रैलियों में युवा बड़ी संख्या में आते हैं और उनके सवालों का जवाब देते हैं। तेजस्वी की बातों पर नारे लगाते हैं और उनकी बातों को दिल से मानते हैं। युवाओं का यही क्रेज अब बिहार में अखिलेश यादव के लिए भी देखने को मिल रहा है।

यू.पी. वाला क्रेज अब बिहार में

जिस तरह का माहौल उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की रैलियों में होता था ठीक वैसा ही क्रेज अब बिहार की धरती पर भी उतर चुका है। लोग खंभों पेड़ों और बाँस-बल्लियों पर चढ़कर उन्हें सुनने और देखने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं।

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समाजवादी पार्टी ने खुद इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी ने बिहार के मधुबनी के बिस्फी विधानसभा में इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी मोहम्मद आसिफ अहमद जी के समर्थन में जनता से वोट की अपील की। इन तस्वीरों में छत पर खड़े और बाँस-बल्लियों पर बैठे लोग साफ दिखते हैं।

राजनीतिक ‘पैठ’ और 2027 का नैरेटिव

ये तस्वीरें बहुत कुछ कहती हैं। ये बताती हैं कि उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति एक-दूसरे से बहुत अलग नहीं है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और मुलायम सिंह यादव के पुत्र होने के नाते उनका क्रेज यूपी में होना स्वाभाविक है। लेकिन जब बिहार में भी इतनी भारी भीड़ उनके पीछे आती है तो साफ़ पता चलता है कि अखिलेश यादव ने आने वाले 2027 के चुनाव के लिए एक बड़ा नैरेटिव सेट करने की पूरी कोशिश कर दी है।

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उनकी जनसभाओं में इस तरह की भीड़ अब आम होती जा रही है। लोग न सिर्फ़ उन्हें देखना चाहते हैं बल्कि यह भी जानना चाहते हैं कि अखिलेश यादव क्या कहते हैं। उनकी बातों में जो मज़ाकिया अंदाज़ है जिस तरह से वह भाजपा पर निशाना साधते हैं और तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने की बात कहते हैं उससे जनता आकर्षित होती है। उनका कटाक्ष करने का तरीका नेताओं को लोकप्रिय बना देता है और यही चीज़ बिहार में अखिलेश यादव के साथ हो रही है।

यही वजह है कि अब यह तय है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में बिहार से बड़े चेहरे भी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार करने उतरेंगे। अखिलेश यादव ने अपनी पूरी ताक़त बिहार में लगा दी है। इसके अलावा उनकी पत्नी डिम्पल यादव भी एक के बाद एक कई इलाकों में रैलियां करती नज़र आईं। उनकी रैलियों में भी भारी भीड़ ने यह साबित किया कि समाजवादी पार्टी को सिर्फ़ उत्तर प्रदेश ही नहीं बिहार में भी खूब पसंद किया जाता है।

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अब दूसरे चरण का चुनाव प्रचार लगभग ख़त्म हो चुका है। 11 तारीख को वोटिंग होगी और 14 को नतीजे आएंगे। तब पता चलेगा कि महागठबंधन की इन तैयारियों बड़े नेताओं की रैलियों और जनता के इस जुनून का ज़मीनी असर क्या हुआ है।

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बड़ा सवाल: क्या इन रैलियों का असर वोटों पर पड़ेगा

अब जबकि बिहार में दूसरे चरण का चुनाव प्रचार समाप्त होने को है, यह देखना होगा कि इन बढ़ती रैलियों, जनता के उत्साह और महागठबंधन की रणनीतियों का असली प्रभाव चुनाव परिणामों पर कैसे पड़ेगा। 11 नवंबर को होने वाली वोटिंग और 14 नवंबर को आएंगे नतीजे यह तय करेंगे कि बिहार में समाजवादी पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता और अखिलेश यादव की रैलियों में देखे गए जनसमर्थन का वास्तविक राजनीतिक परिणाम क्या होता है।

 

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