PDA पाठशाला के जरिए अखिलेश का बड़ा दांव, अब BJP की टेंशन बढ़ना लाजमी
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव भले ही दो साल दूर हों, लेकिन Samajwadi Party ने अभी से जमीन तैयार करना शुरू कर दिया है। पार्टी की नई पहल “PDA Pathshala” न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में एक वैकल्पिक सोच को पेश कर रही है बल्कि ये Social Justice के संदेश को भी नई धार दे रही है। यह प्रयास सत्ता पक्ष की Ruling Party Policies पर सवाल उठाने से आगे जाकर खुद की वैकल्पिक नीति पेश करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
सामाजिक समूहों को साधने की रणनीति
PDA, यानी Backward Classes, Dalit Vote Bank और Minority Community समाजवादी पार्टी इन तीन वर्गों को अपनी राजनीति का केंद्र बना रही है। पार्टी का मानना है कि मौजूदा सरकार इन वर्गों की शिक्षा और अधिकारों को लेकर गंभीर नहीं है। ऐसे में PDA Pathshala न सिर्फ शैक्षणिक केंद्र नहीं, बल्कि हक और पहचान की लड़ाई का मंच बन रही हैं। यह पहल पार्टी के पारंपरिक वोटबैंक को एकजुट करने का एक ठोस प्रयास है, जिसमें Education Politics को हथियार बनाया गया है।
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शिक्षा की बदहाली पर विपक्ष की मुखरता
Samajwadi Party का यह आरोप रहा है कि BJP vs SP की जंग में भाजपा सरकार की School Merger Policy और संसाधनों की कमी ने Rural Education और गरीब तबकों को शिक्षा से और दूर कर दिया है। ऐसे में PDA Pathshala के जरिए समाजवादी पार्टी इस शून्य को भरने का दावा कर रही है। अब तक प्रदेश के 100 से अधिक स्थानों पर यह पहल शुरू की जा चुकी है, जो यह संकेत देती है कि यह केवल Election Manifesto तक सीमित नहीं रहने वाली।
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चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा बन सकता है मुद्दा
सूत्रों की मानें तो Akhilesh Yadav व्यक्तिगत रूप से PDA Pathshala की निगरानी कर रहे हैं और इसे Uttar Pradesh Election 2027 के चुनावी मेनिफेस्टो में शामिल करने का मन बना चुके हैं। इससे स्पष्ट है कि पार्टी इसे महज एक सामाजिक सेवा की पहल नहीं, बल्कि एक ठोस Political Agenda के रूप में देख रही है। यह भाजपा पर सिर्फ हमला नहीं, बल्कि जनता को शिक्षा के अधिकार के प्रति जागरूक करने का मंच भी है, जो Politicization of Education का उदाहरण है।
भाजपा के लिए बढ़ सकती है परेशानी
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा की स्कूलों के विलय और शिक्षा क्षेत्र में कटौती की नीतियों को लेकर पहले ही कई सवाल उठते रहे हैं। अब जब Samajwadi Party इस खालीपन को अपने एजेंडे से भर रही है, तो इसका असर सत्ताधारी पार्टी के ग्रामीण और हाशिये पर खड़े तबकों में दिख सकता है।


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