जानें VB-G RAM G Bill के 4 बड़े फायदे
VB-G RAM G Bill Benefits: देश की ग्रामीण राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। केंद्र सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा के स्वरूप में आमूल-चूल परिवर्तन करते हुए इसे ‘विकसित भारत जी राम जी बिल’ के रूप में पेश किया है। हालांकि संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष इस पर हमलावर है मगर सरकार का दावा है कि यह बदलाव ग्रामीण भारत की किस्मत बदलने वाला साबित होगा। आइए समझते हैं कि इस नए बिल में ऐसा क्या है जो इसे पुरानी योजना से अलग और फायदेमंद बनाता है।
100 नहीं अब 125 दिन का मिलेगा काम
सबसे पहला और बड़ा फायदा काम के दिनों को लेकर है। अब तक ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती थी। नए बिल के तहत अब इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। यानी अब मजदूरों को 25 दिन का अतिरिक्त काम मिलेगा और सीधा सा गणित है कि उनके हाथ में 25 दिन की ज्यादा मजदूरी आएगी। यह कदम ग्रामीण परिवारों की सालाना आय बढ़ाने की दिशा में एक ठोस प्रयास माना जा रहा है।
बुवाई और कटाई के लिए विशेष ‘विंडो’
अक्सर देखा जाता था कि जब खेतों में बुवाई या कटाई का पीक सीजन होता था तब भी मनरेगा के काम चलते रहते थे। इससे मजदूरों के सामने संकट खड़ा हो जाता था कि वे खेत में काम करें या सरकारी योजना में। नई व्यवस्था में इस समस्या का समाधान निकाला गया है। अब खेती के मुख्य सीजन के दौरान 60 दिनों यानी दो महीने के लिए सरकारी कामों को रोक दिया जाएगा। इससे मजदूर खेती के काम से भी कमाई कर सकेंगे और सीजन खत्म होने पर वापस योजना से जुड़ सकेंगे।
पेमेंट का नया फॉर्मूला: अब नहीं करना होगा लंबा इंतजार
मजदूरों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर उनके पारिश्रमिक को लेकर है। पुरानी व्यवस्था में काम के बदले भुगतान के लिए 15 दिन यानी दो हफ्ते का समय तय था। कई बार इसमें और भी देरी हो जाती थी। ‘विकसित भारत जी राम जी बिल’ में इस प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया गया है। अब मजदूरों को हर हफ्ते उनके काम का भुगतान मिल सकेगा। हफ्ते दर हफ्ते पैसे हाथ में आने से ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
एक फायदा ये भी
सरकार इस योजना को सिर्फ गड्ढे खोदने तक सीमित नहीं रखना चाहती। नए प्रावधानों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे यानी इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर खास ध्यान दिया जाएगा।
इसमें सड़कों का जाल बिछाना और उन्हें मुख्य बाजारों से जोड़ना शामिल है ताकि किसानों की पहुंच शहरों तक आसान हो सके। इसके अलावा जल संसाधनों के संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। पानी से जुड़े प्रोजेक्ट्स को पहले पूरा किया जाएगा ताकि खेती और भविष्य की जरूरतों के लिए जल संचयन हो सके।
विपक्ष ने जताई आपत्ति
जहां एक तरफ सरकार इसके फायदों को गिना रही है वहीं विपक्ष ने इस पर सवाल (विकसित भारत जी राम जी बिल) उठाने शुरू कर दिए हैं। मुख्य विवाद का विषय फंडिंग को लेकर है। पहले मनरेगा का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी मगर अब राज्यों को भी इसमें अपनी हिस्सेदारी देनी होगी। विपक्ष का तर्क है कि इससे राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
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बहरहाल यह बदलाव जमीन पर कितने प्रभावी होंगे यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा। मगर इतना साफ है कि सरकार ने ग्रामीण विकास के मॉडल को एक नई दिशा देने की कोशिश जरूर की है।

