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26 January 2026: न पुतिन, न ट्रंप और न ही जिनपिंग; जानें कौन है वो पावरफुल हस्ती जो आ रही है भारत

26 January 2026: अबकी गणतंत्र दिवस परेड में भारत विश्व की एक सबसे ताकतवर हस्ती को आमंत्रित करने वाला है। वो ना तो यूएसए प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप है और ना ही रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन है। इसमें फ्रांस, इंग्लैंड या जर्मनी जैसे सुपर पावर के हेड का नाम भी नहीं है। अब आप सोच रहे होंगे अगर यह लोग नहीं है तो अब बचा चीन जरूर चीन के राष्ट्रपति आ रहे होंगे। आपका यह कयास लगाना भी जायज है क्योंकि हिंदुस्तान और चीन के रिश्ते इन दिनों सुधर रहे हैं। मगर मैं आपको बता दूं कि जिनपिंग भी वह हस्ती नहीं है जो भारत के गणतंत्र दिवस में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

अब आप सोच रहे होंगे कि तब कौन है? जितने बड़े और प्रसिद्ध नेता हैं और पीएम मोदी के अच्छे खास दोस्त हैं उनका नाम तो मैंने पहले ही मना कर दिया। फिर कौन हो सकता है? तो आपको बता दूं कि उनके नाम है उर्सुला वॉन और एंटोनियो कोस्टा।

कौन हैं उर्सुला वॉन

भारत पहली बार परंपरा से हटकर इन्हें आमंत्रित कर रहा है। उर्सुला वॉन यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष हैं और वहीं एंटोनियो कोस्टा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हैं। यह पहली बार होगा जब किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन के दो प्रमुख नेता एक साथ भारत के इस प्रतिष्ठित समारोह में शिरकत करेंगे। ये दोनों नेता जनवरी 2026 में नई दिल्ली पहुंचेंगे जो भारत यूरोपीय संघ संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकेत है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अभी औपचारिक निमंत्रण और स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है। जिसके पूरा होने पर नई दिल्ली और ब्रूसलेस जल्द ही आधिकारिक घोषणा करेगा। यह आप अच्छे से जानते होंगे कि भारत के नजरिए में गणतंत्र दिवस का मुख्य अतिथि आमंत्रण अत्यंत प्रतीकात्मक महत्व रखता है। नई दिल्ली रणनीति और आतिथ्य का संतुलन बनाते हुए मुख्य अतिथि का चयन करती है। जिसमें सामरिक कूटनीतिक कारण व्यापारिक हित और अंतरराष्ट्रीय भू राजनीति निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

नई ऊंचाइयों को छू रहा है भारत

इस बार ईयू नेतृत्व को आमंत्रित करना भारत और ईयू के रिश्ते को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का स्पष्ट संकेत है। और तब जब इसी साल फरवरी में ईयू के कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स ने भारत का दौरा किया था। भारत का यह बहुत बड़ा फैसला बताया जा रहा है। 27 सदस्य ईयू के साथ भारत के संबंध पिछले कुछ महीनों में मजबूत होते हुए नजर आ रहे हैं।

यूएसए प्रेसिडेंट ट्रंप के नेतृत्व वाली प्रशासन की अनिश्चित नीतियों के बीच ईयू ने बीस अक्टूबर को एक नया सामरिक एजेंडा अपनाया जिसमें भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को उच्च स्तर पर ले जाने का संकल्प है। जिसमें भारत ईयू मुक्त व्यापार समझौता यानी कि एफटीए की चल रही बातचीत को अंतिम रूप देना, प्रौद्योगिकी, रक्षा, सुरक्षा और जनसपर्क सहयोग को गहरा करना शामिल है। जनवरी में ईयू नेताओं को भारत आने पर दिल्ली में ही भारत ईयू लीडर समिट आयोजित होगा जो मूल रूप से 2026 की शुरुआत में निर्धारित था।

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बता दें कि ये आमंत्रण भारत की मल्टी अलाइनमेंट नीति का हिस्सा है। जिसमें वह अमेरिका, रूस और यूरोप जैसे सभी प्रमुख शक्ति केंद्रों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखता है। वहीं एफटीए पूरा होने पर भारत को इयू बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी जो उसके निर्यात को बढ़ावा देगी। साथ ही रक्षा और डिजिटल प्रौद्योगिकी में सहयोग से भारत के आत्मनिर्भर भारत पहल को और ताकत मिलेगी। बताया जा रहा है कि जनवरी समिट में दोनों पक्ष जलवायु परिवर्तन, डिजिटल गवर्नेंस और इंडोपेसिफिक रणनीति पर भी चर्चा करेंगे।

वैसे यह ऐतिहासिक आमंत्रण भारत ईयू साझेदारी की नए युग की शुरुआत है। जब 26 जनवरी 2026 को राजपथ पर ईयू झंडा लहराएगा तब यह ना केवल हमारी राजनीतिक सफलता होगी बल्कि वैश्विक सहयोग की नई मिसाल भी कायम करेगी। दोनों पक्षों के बीच विश्वास और सहयोग की यह यात्रा अब निर्णायक मोड़ पर नजर आ रही है। वैसे यह हमारे लिए तो ऐतिहासिक फैसला है मगर हमारे दुश्मनों के लिए यह बेहद दुखद खबर है।

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