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ट्रंप का ऐतिहासिक दावा, लेकिन चिट्ठी में नेतन्याहू को बचाने की गुहार क्यों; पढ़ें अंदर की पूरी कहानी

trump netanyahu relations: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का रिश्ता हमेशा से सुर्खियों में रहा है। एक तरफ जहाँ ट्रंप पहले अक्सर नेतन्याहू पर तल्ख़ होते दिखे। वहीं हमास के ख़िलाफ़ जंग में उन्होंने नेतन्याहू के साथ खड़े होकर कहीं-कहीं उनका समर्थन भी किया। लेकिन इस समय जो बात पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है, वह है ट्रंप की एक ख़ास चिट्ठी।

यह चिट्ठी ट्रंप ने इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हरज़ोग को लिखी है। सवाल यही है कि आख़िर इस ख़त में ऐसा क्या है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है?

माफ़ी की अपील और भ्रष्टाचार का मामला

ख़बरों के मुताबिक, ट्रंप ने राष्ट्रपति हरज़ोग को एक औपचारिक पत्र भेजकर अपने दोस्त नेतन्याहू को माफ़ करने की गुज़ारिश की है। नेतन्याहू इस वक्त भ्रष्टाचार के मुक़दमे का सामना कर रहे हैं। हालाँकि, इज़राइली राष्ट्रपति कार्यालय ने कानूनी प्रतिबद्धताओं का हवाला देते हुए इस अपील पर सीधा जवाब देने से परहेज़ किया है।

‘द टाइम्स ऑफ़ इज़राइल’ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति हरज़ोग को मिली इस चिट्ठी में ट्रंप ने लिखा, “इस ऐतिहासिक समय में आपको पत्र लिखना मेरे लिए सम्मान की बात है। हमने मिलकर कम से कम तीन सौ सालों से अपेक्षित शांति हासिल की है।”

इसके साथ ही ट्रंप ने साफ़ तौर पर नेतन्याहू (trump netanyahu relations) को पूरी तरह से माफ़ करने का अनुरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि युद्ध के समय नेतन्याहू एक दूरदर्शी और फ़ैसला लेने में सक्षम प्रधानमंत्री के तौर पर सामने आए हैं, और अब वह इजराइल को शांति के युग की ओर ले जा रहे हैं। ट्रंप ने यह भी याद दिलाया कि वह खुद अब्राहम एकॉर्ड में और देशों को जोड़ने के लिए मध्य के नेताओं से लगातार जुड़े हुए हैं।

ट्रंप ने इजराइली न्याय प्रणाली का सम्मान करते हुए भी यह कहा कि नेतन्याहू के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित और अनुचित अभियोजन हैं।

एकजुटता का आह्वान

ट्रंप ने अपने और हरज़ोग के बीच स्थापित “बेहतरीन रिश्ते” को याद करते हुए आगे लिखा, “जनवरी में शपथ लेते ही हम इस बात पर सहमत हुए थे कि अब हमारा ध्यान बंधकों को घर वापस लाने और शांति समझौते पर केंद्रित होना चाहिए। अब हमने ये अभूत सफलताएँ हासिल कर ली हैं और हमास को नियंत्रण में रखा है, तो अब समय आ गया है कि नेतन्याहू को माफ़ करके और उस कानूनी लड़ाई को हमेशा के लिए ख़त्म करके इजराइल को एकजुट करने पर ध्यान दें।”

विपक्ष का कड़ा विरोध

लेकिन ट्रंप की इस चिट्ठी से इजराइल का विपक्ष भड़का हुआ है। विपक्षी नेता यायर लापिड ने ट्रंप की माफ़ी की अपील की सख़्त आलोचना करते हुए इसे इजराइल की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।

लापिड का बयान सीधा और कड़ा था: “अमेरिकी राष्ट्रपति से कहो, हस्तक्षेप की भी एक सीमा होती है। इस मामले में हस्तक्षेप करना बंद करो। हमें गर्व है, हम कोई अमेरिकी संरक्षित राज्य नहीं हैं। हम एक स्वतंत्र राष्ट्र हैं।” विपक्ष का यह तीख़ा रुख़ दिखाता है कि इस मामले ने देश की आंतरिक राजनीति में कितनी बड़ी दरार पैदा कर दी है।

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नेतन्याहू पर लगे आरोप

आपको बता दें कि 2019 में नेतन्याहू पर तीन अलग-अलग मामलों में मुक़दमा चलाया गया था। इनमें व्यापारियों से लगभग सात लाख शेकेल के उपहार के तौर पर रिश्वत लेने का इल्जाम भी शामिल था। 2020 में शुरू हुए इस मुक़दमे का फ़ैसला अभी आना बाकी है। नेतन्याहू ने हर आरोप में ख़ुद को निर्दोष बताया है और इसे वामपंथी ताकतों की साज़िश करार दिया है, जिनका मक़सद एक चुने हुए दक्षिणपंथी नेता को सत्ता से हटाना है।

इजराइल में जिस तरह से ट्रंप के इस पत्र का विरोध हो रहा है, उसे देखते हुए माना जा रहा है कि राष्ट्रपति हरज़ोग अपने फ़ैसले पर बहुत सोच-समझकर ही आगे बढ़ेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोस्ती की यह अपील इजराइल की स्वतंत्र न्याय प्रणाली के सामने टिक पाती है।

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