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Dhadak 2 Ending Explainer: आखिर में विधि, नीलेश और शंकर के साथ क्या होता है

Dhadak 2 Ending Explainer: फिल्मों में सामाजिक मुद्दों (Social Issues) को उठाना हमेशा ही चुनौतीपूर्ण होता है, मगर ‘धड़क 2’ (Dhadak 2) ने यह काम बखूबी किया है। ये मूवी (Movie) तमिल हिट ‘परियेरुम पेरुमल बीए.बीएल’ (Pariyerum Perumal Ba.Bl) का हिंदी रीमेक (Hindi Remake) है जो अब बड़े पर्दे पर दर्शकों के सामने है। इस फिल्म में सिद्धांत चतुर्वेदी (Siddhant Chaturvedi) और तृप्ति (Tripti) मुख्य किरदार निभा रहे हैं। वही विपिन शर्मा, सौरभ सचदेवा (Saurabh Sachdeva) और साद बिलग्रामी ने सहायक भूमिकाएं निभाई हैं।

क्या है कहानी

‘धड़क 2’ की कहानी जातिगत भेदभाव (Caste Discrimination) की ज्वलंत समस्या पर आधारित है। इसमें सिद्धांत ने भोपाल के भीम नगर (Bheem Nagar) इलाके के दलित युवक नीलेश की भूमिका निभाई है। नीलेश अपनी माँ के सपनों को साकार करने के लिए नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में दाखिला लेता है, जहाँ उसकी मुलाकात विधि से होती है। विधि उच्च जाति (Caste System) से आती है और वकीलों के परिवार की बेटी है। कॉलेज में जातिगत बंटवारे और विरोध के बावजूद विधि नीलेश से प्यार (Love Story) कर बैठती है।

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नीलेश को विधि के चचेरे भाई और कुछ शिक्षकों की ओर से लगातार जातिवादी विरोध (Caste Conflict) का सामना करना पड़ता है, मगर उसका दिल विधि के लिए मजबूती से धड़कता रहता है। जब उनका प्रेम परिवार तक पहुँचता है, तो संघर्ष और द्वंद्व और भी तीव्र हो जाते हैं।

खलनायक की भूमिका (Dhadak 2 Ending Explainer)

फिल्म में केवल जातिगत भेदभाव ही नहीं बल्कि एक सशक्त खलनायक शंकर (Shankar) की भूमिका भी है, जिसे सौरभ सचदेवा ने निभाया है। शंकर का किरदार एक कट्टरपंथी जातिवादी है, जो दलित समुदाय के लोगों को “परजीवी” कहकर अपमानित करता है और हिंसक तरीकों (Violence) से निपटता है। अपनी बहन की उस दलित युवक से प्रेम करने की वजह से उसने उसे आत्महत्या के लिए मजबूर किया और उसकी नफरत की आग दूसरों तक भी फैली हुई है।

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जब विधि का परिवार नीलेश को खत्म करने के लिए शंकर के पास पहुँचता है, तब घटनाएँ अनियंत्रित हो जाती हैं। फिल्म में रेलवे ट्रैक के पास हुई लड़ाई का सीन खासा प्रभावशाली है। शंकर कोशिश करता है नीलेश को खत्म करने की, मगर असफल रहता है। इसके बाद उसकी नज़र विधि के चचेरे भाई रूनी पर पड़ती है और दोनों के बीच भी भिड़ंत होती है। अंततः, शंकर की मौत होती है, मगर किस तरह? ये जानने के लिए आपको फिल्म देखने जाना होगा।

फिल्म का संदेश और अंत

‘धड़क 2’ में जातिवाद की जकड़न और उससे लड़ने की जज्बे को खूबसूरती से पेश किया गया है। फिल्म का अंत उम्मीद से भरा है, जहां नीलेश और विधि अपने प्यार को खुलकर स्वीकार करते हैं। उनकी चचेरी बहन भी समय के साथ अपने पूर्वाग्रहों (Social Prejudice) को छोड़ती दिखती है, जो दर्शाता है कि सामाजिक सोच में बदलाव (Social Change) संभव है।

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